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राष्ट्रीय बांस मिशन: बांस की खेती, नर्सरी और प्रोसेसिंग यूनिट पर सरकारी मदद, खेत में उगे बांस को पेड़ की श्रेणी से बाहर करने का फायदा

हरा सोना कहे जाने वाले बांस से किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय बांस मिशन चला रही है।

खेत में उगे हरे बांस के झुरमुट का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • बांस को अक्सर हरा सोना कहा जाता है। यह तेजी से बढ़ने वाला पौधा है, जिसका इस्तेमाल घर बनाने, फर्नीचर, टोकरी, अगरबत्ती, कागज, कपड़ा और खाने तक में होता है।
  • पहले भारतीय वन अधिनियम में बांस को पेड़ की श्रेणी में रखा गया था।
  • बांस लगाने से पहले अपने इलाके के लिए सही प्रजाति चुनें और यह देखें कि आसपास खरीदार या प्रोसेसिंग इकाई है या नहीं।
  • बांस तेजी से बढ़ता है और बड़ी मात्रा में कार्बन सोखता है। इसकी घनी जड़ें मिट्टी को बांधकर रखती हैं, इसलिए नदी किनारे और ढलानों पर कटाव रोकने में इसका इस्तेमाल होता है।

बांस को अक्सर हरा सोना कहा जाता है। यह तेजी से बढ़ने वाला पौधा है, जिसका इस्तेमाल घर बनाने, फर्नीचर, टोकरी, अगरबत्ती, कागज, कपड़ा और खाने तक में होता है। भारत में बांस का बड़ा भंडार है, लेकिन लंबे समय तक इसके व्यावसायिक इस्तेमाल में कई रुकावटें थीं। किसानों को बांस की खेती से जोड़ने और इसके उद्योग को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय बांस मिशन चला रही है। इस लेख में जानिए यह योजना क्या है और किसान इसका फायदा कैसे ले सकते हैं।

योजना की शुरुआत

राष्ट्रीय बांस मिशन की शुरुआत 2006-07 में हुई थी। बाद में 2018-19 में इसे नए रूप में पुनर्गठित किया गया। नए मिशन में खेत से लेकर बाजार तक पूरी कड़ी पर ध्यान दिया गया, यानी अच्छी गुणवत्ता के पौधे, खेती, कटाई के बाद प्रबंधन, प्रोसेसिंग, उत्पाद बनाना और बिक्री। योजना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत चलती है और राज्यों में राज्य बांस मिशन इसे लागू करते हैं।

मुख्य बातें: खेत में उगे हरे बांस के झुरमुट का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

2017 का बड़ा कानूनी बदलाव

पहले भारतीय वन अधिनियम में बांस को पेड़ की श्रेणी में रखा गया था। इसके कारण किसान अपने खेत में उगा बांस काटने और दूसरी जगह ले जाने के लिए भी कई तरह की अनुमति लेने को मजबूर थे। 2017 में संसद ने कानून में संशोधन कर जंगल के बाहर उगे बांस को पेड़ की परिभाषा से बाहर कर दिया। इसके बाद निजी जमीन पर उगाए गए बांस की कटाई और ढुलाई आसान हो गई और किसानों के लिए बांस की खेती ज्यादा आकर्षक बन गई।

किन कामों पर मदद

  • बांस की नर्सरी बनाना, ताकि अच्छी गुणवत्ता के पौधे मिलें
  • किसानों की निजी जमीन पर बांस का पौधरोपण
  • सरकारी और सामुदायिक जमीन पर पौधरोपण
  • बांस के उपचार और भंडारण की इकाइयां
  • प्रोसेसिंग और उत्पाद बनाने वाली इकाइयां
  • प्रशिक्षण, कौशल विकास और बाजार से जोड़ना

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कितनी मदद मिलती है

योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार किसानों को बांस के पौधरोपण की लागत में सरकारी सहायता दी जाती है, जो आम तौर पर लागत का एक बड़ा हिस्सा होती है और कुछ वर्षों में किस्तों में मिलती है। केंद्र और राज्य इस खर्च को तय अनुपात में साझा करते हैं। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में केंद्र की हिस्सेदारी ज्यादा रहती है। सहायता की सटीक दर और सीमा गतिविधि और राज्य के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए आवेदन से पहले अपने राज्य बांस मिशन से ताजा जानकारी जरूर लें।

कौन ले सकता है फायदा

  • अपनी जमीन पर बांस लगाना चाहने वाले किसान
  • किसान उत्पादक संगठन और स्वयं सहायता समूह
  • नर्सरी चलाने वाले लोग और संस्थाएं
  • बांस से उत्पाद बनाने वाले कारीगर और उद्यमी

आवेदन कैसे करें

  • अपने जिले के कृषि, उद्यान या वन विभाग के कार्यालय में संपर्क करें, जहां राज्य बांस मिशन का काम देखा जाता है।
  • राष्ट्रीय बांस मिशन की वेबसाइट nbm.nic.in पर योजना के दिशानिर्देश और राज्य स्तर के संपर्क देखे जा सकते हैं।
  • आवेदन के साथ जमीन के कागज, आधार, बैंक खाता विवरण और पासपोर्ट फोटो देने होते हैं।
  • प्रोसेसिंग इकाई के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी देनी पड़ती है।

बांस की खेती के फायदे

बांस एक बार लगाने के बाद कई वर्षों तक उपज देता है। कुछ प्रजातियां तीन से चार साल में कटाई लायक हो जाती हैं। इसे खेत की मेड़ पर भी लगाया जा सकता है, जिससे मिट्टी का कटाव रुकता है। बांस कम पानी में भी उग जाता है और बंजर या कम उपजाऊ जमीन पर भी लगाया जा सकता है। अगरबत्ती, फर्नीचर और निर्माण उद्योग में इसकी मांग लगातार बनी रहती है।

ध्यान रखने वाली बातें

बांस लगाने से पहले अपने इलाके के लिए सही प्रजाति चुनें और यह देखें कि आसपास खरीदार या प्रोसेसिंग इकाई है या नहीं। केवल सब्सिडी के भरोसे नहीं, बल्कि बाजार की उपलब्धता देखकर फैसला करें।

बांस से बनने वाले उत्पाद

बांस से अगरबत्ती की सींक, फर्नीचर, चटाई, टोकरी, फर्श की टाइल, प्लाईबोर्ड, कागज की लुगदी, चारकोल और कपड़े के रेशे तक बनते हैं। बांस की कोंपलें यानी करील पूर्वोत्तर और दूसरे इलाकों में सब्जी और अचार के रूप में खाई जाती हैं। बांस को निर्माण कार्य में भी इस्तेमाल किया जाता है। सरकार अगरबत्ती की सींक के लिए आयात पर निर्भरता घटाने और घरेलू बांस से उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।

बांस और पर्यावरण

बांस तेजी से बढ़ता है और बड़ी मात्रा में कार्बन सोखता है। इसकी घनी जड़ें मिट्टी को बांधकर रखती हैं, इसलिए नदी किनारे और ढलानों पर कटाव रोकने में इसका इस्तेमाल होता है।

राष्ट्रीय बांस मिशन कब पुनर्गठित हुआ

2018-19 में।

क्या खेत में उगे बांस को काटने के लिए अनुमति चाहिए

2017 के संशोधन के बाद जंगल के बाहर उगा बांस पेड़ की श्रेणी में नहीं है, हालांकि राज्य के नियम भी देख लें।

योजना की जानकारी कहां मिलेगी

nbm.nic.in और राज्य बांस मिशन के कार्यालय से।

किन कामों पर मदद मिलती है

नर्सरी, पौधरोपण, उपचार इकाई और प्रोसेसिंग इकाई पर।

स्रोत: National Bamboo Mission, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, PIB: National Bamboo Mission

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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