दिवाली के खर्च से अभी उबरे भी नहीं होते कि शादियों के न्योते आने लगते हैं। उत्तर भारत में देवउठनी एकादशी के बाद शादियों का मौसम शुरू माना जाता है और यह कई हफ्तों तक चलता है। एक के बाद एक शादियों में उपहार, कपड़े, यात्रा और होटल का खर्च जुड़कर बड़ी रकम बन जाता है। जानिए शादी के मौसम में खर्च कैसे संभालें।
न्योतों की सूची बनाएं
- आने वाले महीनों में जिन शादियों में जाना है, उनकी सूची बनाएं
- हर शादी के आगे लिखें कि जाना जरूरी है या सिर्फ उपहार भेजना काफी होगा
- किस शादी में परिवार के कितने लोग जाएंगे
- शादी शहर में है या बाहर
इससे पूरे मौसम का कुल खर्च पहले से अंदाज में आ जाता है।

कुल बजट तय करें
सबसे पहले तय करें कि इस पूरे मौसम में आप शादियों पर कुल कितना खर्च कर सकते हैं, बिना बचत तोड़े और बिना कर्ज लिए। फिर इसे हर शादी के लिए बांटें। करीबी रिश्ते में ज्यादा और दूर के जान-पहचान वालों में कम रकम रखना स्वाभाविक है।
उपहार और शगुन
- शगुन की रकम पहले से तय कर लें, दूसरों से तुलना में न पड़ें
- उपहार देना हो, तो उपयोगी चीज चुनें
- एक ही परिवार की कई शादियों में संयुक्त उपहार देना भी विकल्प है
- ऑनलाइन शगुन भेजते समय सही खाते और नंबर की पुष्टि करें, ठगी से सावधान रहें
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कपड़ों पर खर्च
- हर शादी के लिए नए कपड़े जरूरी नहीं
- मौजूदा कपड़ों को अलग दुपट्टे, जैकेट या गहनों के साथ नया रूप दें
- परिवार में कपड़े और गहने आपस में बदलकर इस्तेमाल करें
- महंगे परिधान किराये पर लेने का विकल्प भी कई शहरों में है
यात्रा और ठहरने का खर्च
शादी बाहर हो, तो ट्रेन या बस का टिकट जितना पहले हो सके, बुक करें। शादी के मौसम में किराये बढ़ जाते हैं। रिश्तेदारों के साथ मिलकर गाड़ी करना सस्ता पड़ सकता है।
घर में शादी हो तो
- शादी का खर्च सालों पहले से योजना बनाकर बचाएं
- बेटी या बेटे की शादी के लिए लंबी अवधि की बचत और निवेश का सहारा लें
- बजट का एक हिस्सा अनपेक्षित खर्च के लिए रखें
- दिखावे के लिए बड़ा कर्ज लेने से बचें, इसका बोझ सालों चलता है
- कुछ राज्य सरकारें गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए सामूहिक विवाह और सहायता योजनाएं चलाती हैं, पात्रता के लिए समाज कल्याण विभाग से जानकारी लें
कर्ज से बचें
शादी के खर्च के लिए क्रेडिट कार्ड या ऊंचे ब्याज वाले पर्सनल लोन पर निर्भर न रहें। अगर उधार लेना ही पड़े, तो ब्याज दर, कुल लागत और चुकाने की क्षमता पहले जांच लें।
मना करना भी ठीक है
हर शादी में जाना संभव नहीं होता। जहां न जा सकें, वहां फोन से शुभकामना देना या शगुन भेजना भी रिश्ते निभाने का तरीका है।
शादी के खर्च का हिसाब कैसे रखें?
मोबाइल में एक अलग नोट या खर्च ऐप में शादी के मौसम की श्रेणी बनाएं और हर खर्च तुरंत लिखें। मौसम खत्म होने पर इससे अगले साल की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
स्रोत: राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा केंद्र (NCFE), भारतीय रिजर्व बैंक: वित्तीय शिक्षा। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





