दिवाली के पांच दिन खुशियों के साथ बड़ा खर्च भी लेकर आते हैं। मिठाई, उपहार, कपड़े, सजावट, पूजा सामग्री, यात्रा और सेल की खरीदारी जुड़कर कई बार महीने के बजट से कहीं आगे निकल जाती है। त्योहार खत्म होने के बाद जरूरी है कि खर्च का हिसाब लगाकर बजट को दोबारा पटरी पर लाया जाए। जानिए त्योहार के बाद बजट कैसे संभालें।
पहला कदम: पूरा हिसाब लिखें
एक कागज या मोबाइल में पूरे त्योहार के खर्च को लिखें:
- नकद खर्च
- UPI और डेबिट कार्ड से भुगतान, बैंक स्टेटमेंट से देखकर
- क्रेडिट कार्ड से की गई खरीदारी
- EMI पर ली गई चीजें और उनकी मासिक किस्त
- यात्रा और मेहमानों पर हुआ खर्च
कुल रकम जानने से पता चलता है कि अगले कुछ महीनों में कितनी भरपाई करनी है।

खर्च को श्रेणियों में बांटें
- जरूरी खर्च: पूजा, घर की जरूरी मरम्मत, परिवार के कपड़े
- चाह वाले खर्च: सेल में खरीदा गैरजरूरी सामान, महंगे उपहार
- बचत या निवेश: सोना या दूसरी चीजें जो संपत्ति मानी जा सकती हैं
इससे अगले साल के लिए समझ आता है कि कहां खर्च कम किया जा सकता है।
सबसे पहले कर्ज और बिल
क्रेडिट कार्ड का बकाया और दूसरे ऊंचे ब्याज वाले कर्ज सबसे पहले चुकाएं। इनका ब्याज आपकी बचत पर मिलने वाले ब्याज से कहीं ज्यादा होता है।
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आपात फंड की भरपाई
अगर त्योहार के खर्च के लिए आपात फंड से पैसा निकाला है, तो उसे अगले कुछ महीनों में दोबारा भरने की योजना बनाएं। हर महीने एक तय रकम अलग खाते या RD में डालें। आम सलाह के अनुसार आपात फंड में कुछ महीनों के जरूरी खर्च के बराबर रकम होनी चाहिए।
अगले दो-तीन महीने सादा रखें
- बाहर खाने और ऑनलाइन ऑर्डर कम करें
- नई खरीदारी कुछ समय के लिए टालें
- घर में बची मिठाई और सूखा सामान पहले इस्तेमाल करें
- बिजली और मोबाइल के बिल पर नजर रखें
सब्सक्रिप्शन और ऑटो पे की जांच
त्योहार की सेल में कई लोग ट्रायल सब्सक्रिप्शन या सदस्यता ले लेते हैं, जो बाद में अपने आप पैसा काटने लगती हैं। बैंक स्टेटमेंट और UPI ऐप में ऑटो पे की सूची देखें और जिनकी जरूरत नहीं, उन्हें बंद करें।
शादी के मौसम का ध्यान
दिवाली के बाद शादियों का मौसम शुरू होता है, जिसमें उपहार, यात्रा और कपड़ों का खर्च फिर आता है। इसके लिए पहले से एक सीमा तय कर लें।
अगले साल के लिए तैयारी
अगर इस साल का कुल त्योहार खर्च पता है, तो उसे 12 से भाग देकर हर महीने उतनी रकम अलग रखनी शुरू करें। इससे अगले साल त्योहार पर उधार या क्रेडिट कार्ड पर निर्भरता कम होगी।
क्या त्योहार पर खर्च करना गलत है?
बिल्कुल नहीं। त्योहार खुशी का मौका है। जरूरी बस इतना है कि खर्च आपकी क्षमता के भीतर हो और उसके बाद परिवार की जरूरी जरूरतों पर असर न पड़े।
स्रोत: भारतीय रिजर्व बैंक: वित्तीय शिक्षा, राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा केंद्र (NCFE)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





