ताज़ा खबर
What Is the WTO? How the World Trade Organization Works and the Issues India Raises दलिया खिचड़ी: गेहूं के दलिये, मूंग दाल और सब्जियों से कुकर में बनने वाला हल्का और भरपेट खाना, सही अनुपात और तड़के का तरीका Dhanteras Significance: Why People Buy Gold and Utensils, Dhanvantari Puja and Yam Deepdaan ब्रेकिंग: भारत में जंगल की आग से हर साल 90,300 मौतें, तटीय आबादी खतरे में त्योहार के बाद बजट कैसे दोबारा पटरी पर लाएं: खर्च का हिसाब, बचत की भरपाई और अगले महीनों की योजना BREAKING: आंध्र प्रदेश में चक्रवात अर्नब से हुए नुकसान का आकलन करने केंद्रीय दल पहुंचे PM Vishwakarma Yojana: 18 Trades Covered, Rs 15,000 Toolkit Aid and Loan up to Rs 3 Lakh at 5 Percent ओम पुरी: अंबाला से NSD और FTII तक, अर्ध सत्य के इंस्पेक्टर वेलणकर, दो राष्ट्रीय पुरस्कार और हॉलीवुड ब्रिटिश फिल्मों तक का सफर
ट्रेंडिंग
भारत

ब्रेकिंग: भारत में जंगल की आग से हर साल 90,300 मौतें, तटीय आबादी खतरे में

लांसेट की रिपोर्ट के अनुसार भारत में जंगल की आग से सालाना 90,300 मौतें हो रही हैं और तटीय क्षेत्रों में 1.8 करोड़ लोग खतरे में हैं।

ब्रेकिंग: भारत में जंगल की आग से हर साल 90,300 मौतें, तटीय आबादी खतरे में
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण भारत में जंगल की आग से होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
  • लांसेट की शोध रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जंगल की आग से होने वाली मृत्यु दर में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है।
  • देश में सूखे की स्थिति भी अधिक व्यापक और गंभीर हुई है। साल 2021 से 2025 के बीच भारत का 13 प्रतिशत हिस्सा हर साल कम से कम एक महीने तक सूखे की चपेट में रहा है।
  • भारत की लगभग 1.3 प्रतिशत आबादी, यानी 1.82 करोड़ लोग, समुद्र तट के निकट और समुद्र तल से मात्र 1 मीटर की ऊंचाई पर निवास करते हैं।

ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण भारत में जंगल की आग से होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। लांसेट की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 से 2025 के बीच देश में प्रति वर्ष लगभग 90,300 लोगों की मृत्यु जंगल की आग के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभावों से हुई है। इसके अलावा, समुद्र तटीय क्षेत्रों में रहने वाले करीब 1.82 करोड़ लोग बढ़ते समुद्र जलस्तर और जलवायु परिवर्तन के कारण विस्थापन के जोखिम का सामना कर रहे हैं।

जंगल की आग का संकट
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

जंगल की आग और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

लांसेट की शोध रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जंगल की आग से होने वाली मृत्यु दर में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। साल 2003 से 2012 के दशक में यह संख्या प्रति वर्ष करीब 67,800 थी, जो अब बढ़कर 90,300 तक पहुंच गई है। मृत्यु दर प्रति लाख आबादी पर 5.8 से बढ़कर 6.3 हो गई है। यह आग न केवल प्रत्यक्ष रूप से जानलेवा है, बल्कि इससे फैलने वाला प्रदूषण सांस और हृदय संबंधी बीमारियों को गंभीर बनाता है, जो पहले से दमा या हृदय रोग से जूझ रहे लोगों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। शोध के अनुसार, जंगल में रहने वाले या उसके आसपास निवास करने वाले लोग इस आग की चपेट में सबसे अधिक आते हैं। आग से होने वाली मौतों में कुछ लोग सीधे तौर पर जलने के कारण जान गंवाते हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग जहरीले धुएं और प्रदूषण के कारण असमय काल के गाल में समा जाते हैं।

जल संकट और सूखे की बढ़ती विभीषिका

देश में सूखे की स्थिति भी अधिक व्यापक और गंभीर हुई है। साल 2021 से 2025 के बीच भारत का 13 प्रतिशत हिस्सा हर साल कम से कम एक महीने तक सूखे की चपेट में रहा है। ऐतिहासिक आंकड़ों पर गौर करें तो साल 1981 से 1990 के दशक में देश के 34 प्रतिशत हिस्से में एक महीने तक सूखे के हालात देखे जाते थे। शुद्ध पेयजल की उपलब्धता में भी उल्लेखनीय कमी आई है, जहां 2006 से 2015 की तुलना में 2016 से 2025 के बीच जल संचय में 6.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह गहराता जल संकट न केवल आम जनजीवन के लिए चुनौती बना हुआ है, बल्कि कृषि उत्पादन और अनाज की उपलब्धता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। बार-बार पड़ने वाला सूखा न केवल पानी की कमी को बढ़ाता है, बल्कि खाद्य सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गया है।

तटीय आबादी पर मंडराता विस्थापन का खतरा

भारत की लगभग 1.3 प्रतिशत आबादी, यानी 1.82 करोड़ लोग, समुद्र तट के निकट और समुद्र तल से मात्र 1 मीटर की ऊंचाई पर निवास करते हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण समुद्र का पानी गर्म हो रहा है और जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे इन क्षेत्रों में बाढ़ और विस्थापन का खतरा पैदा हो गया है। शोध के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच समुद्र का तापमान सामान्य से 0.4 डिग्री सेंटीग्रेड अधिक दर्ज किया गया है, जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और मछुआरों की आजीविका के लिए एक बड़ा संकट है। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश जैसे क्षेत्रों में चक्रवात का खतरा भी लगातार बना हुआ है। हालिया परिस्थितियों को देखते हुए, दक्षिण तटीय आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। सरकारी तंत्र चक्रवात की निगरानी के लिए उपग्रह इमेजरी और डॉपलर रडार का उपयोग कर रहा है, ताकि तटीय निवासियों को सुरक्षित रखा जा सके।

वैश्विक ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां

वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा में निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद जीवाश्म ईंधन का प्रभुत्व बना हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि 2025 में स्वच्छ ऊर्जा निवेश 2.1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, लेकिन जीवाश्म ईंधन अभी भी दुनिया की 80 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। बड़ी तेल और गैस कंपनियां भविष्य में उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही हैं, जो जलवायु लक्ष्यों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि, स्वच्छ हवा के प्रयासों ने 77 देशों में प्रति वर्ष लगभग 3,23,000 मौतों को रोकने में मदद की है, जहां 2016 के बाद से जीवाश्म ईंधन से होने वाला वायु प्रदूषण कम हुआ है। बावजूद इसके, पेरिस समझौते के बाद के दशक में जलवायु परिवर्तन से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम और नुकसान घटने के बजाय बढ़े हैं, जो वैश्विक स्तर पर एक गंभीर चिंता का विषय है।

स्रोत: Prabhat Khabar, The Hindu

लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X