केंद्र सरकार द्वारा गठित दो अंतर मंत्रालयी केंद्रीय दलों ने आंध्र प्रदेश के चक्रवात अर्नब प्रभावित क्षेत्रों का दौरा शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने गोदावरी नदी के किनारे स्थित पूर्वी गोदावरी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले के तटीय इलाकों में फसलों, घरों, सार्वजनिक अवसंरचना और मछुआरों की संपत्तियों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र सरकार से 4,600 करोड़ रुपये की राहत सहायता का अनुरोध किया है। यह प्राकृतिक आपदा 29 अक्टूबर को ओडालारेवु के निकट तट से टकराई थी।

केंद्रीय टीमों का गठन और जमीनी निरीक्षण
केंद्र सरकार की ओर से प्रतिनियुक्त दो अलग-अलग अंतर मंत्रालयी टीमों ने शनिवार को चक्रवात अर्नब के कारण हुए व्यापक नुकसान का स्थलीय निरीक्षण किया। यह चक्रवात 29 अक्टूबर को तटीय क्षेत्र ओडालारेवु के पास जमीन से टकराया था, जिसके बाद बड़े पैमाने पर कृषि, आवासीय संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को क्षति पहुंची थी। राज्य सरकार की रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र को चक्रवात से हुए नुकसान का कुल अनुमान लगभग 4,600 करोड़ रुपये बताया है और आवश्यक वित्तीय सहायता की मांग रखी है।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले में पहुंचे केंद्रीय दल का नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव चित्तरंजन दास ने किया। इस उच्चस्तरीय दल में कृषि मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। इसके अलावा आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निदेशक प्रखर जैन भी इस निरीक्षण के दौरान केंद्रीय दल के साथ मौजूद रहे। इस दल ने जिले के विभिन्न हिस्सों का सघन दौरा करके जमीनी स्थिति की समीक्षा की।
कोनासीमा जिले में फसलों और बुनियादी ढांचे को नुकसान
संयुक्त सचिव चित्तरंजन दास के नेतृत्व वाले दल ने कोनासीमा जिले के रावुलपालेम इलाके में धान की फसलों की स्थिति का मुआयना किया। इसके बाद अधिकारियों ने अंबाजीपेटा क्षेत्र में चक्रवाती हवाओं और बारिश के कारण बर्बाद हुए केले और नारियल के बागानों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। दल के सदस्यों ने सखिनेतीपल्ली में क्षतिग्रस्त हुए मकानों का निरीक्षण किया और अंतरवेदी मछली पकड़ने के केंद्र में नावों और मछुआरों के अन्य संसाधनों को पहुंचे नुकसान की विस्तृत समीक्षा की।
आधिकारिक गणना के आंकड़ों के अनुसार, डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले में 1,792 कच्चे या फूस के मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। कृषि क्षेत्र में 1.18 लाख एकड़ में लगी धान की फसल को भारी क्षति पहुंची है। इसके अतिरिक्त 10,767 हेक्टेयर में फैली बागवानी फसलें बर्बाद हुई हैं, जिनमें केवल केले के बागान ही लगभग 8,000 हेक्टेयर में प्रभावित पाए गए हैं। चक्रवात की तीव्रता के चलते 73,500 नारियल के पेड़ उखड़ गए हैं। सरकार द्वारा प्रत्येक क्षतिग्रस्त नारियल के पेड़ के लिए 1,500 रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
पूर्वी गोदावरी जिले में फसलों की स्थिति का जायजा
पूर्वी गोदावरी जिले में नुकसान का आकलन करने के लिए पहुंचे दूसरे केंद्रीय दल का नेतृत्व केंद्रीय जल आयोग की अधिकारी कोल्लू रेखा रानी और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के उप सचिव आलोक जवाहर ने किया। इस टीम में राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के वैज्ञानिक एस.वी.एस.पी. शर्मा के साथ केंद्रीय जल आयोग के अन्य तकनीकी अधिकारी भी शामिल थे। इस दल ने कोव्वूर मंडल के दोम्मेरु गांव के समीप गोदावरी नदी के किनारे केले, पपीते और धान की क्षतिग्रस्त फसलों का निरीक्षण किया।
केंद्रीय दल के अधिकारियों ने बाद में मंडपेटा और कपिलेश्वरपुरम मंडलों का दौरा किया, जहां उन्होंने प्रभावित किसानों से सीधे संवाद किया। अधिकारियों ने किसानों से पूछा कि चक्रवात के कारण फसलों की उत्पादकता पर क्या असर पड़ा है और जो पौधे आंशिक रूप से बचे हैं, उनके जीवित रहने की क्या संभावनाएं हैं। वैज्ञानिक विश्लेषण और जमीनी आंकड़ों के आधार पर यह दल अपनी विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
पश्चिम गोदावरी जिले में दर्ज नुकसान का ब्योरा
चक्रवात अर्नब का गंभीर प्रभाव पश्चिम गोदावरी जिले में भी देखने को मिला है, जहां वर्तमान में क्षति मूल्यांकन का कार्य तेजी से जारी है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में 1.80 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में धान की फसल को भारी क्षति पहुंची है। बागवानी फसलों के तहत 2,500 एकड़ से अधिक का क्षेत्र नष्ट हुआ है। इसके साथ ही 4,670 एकड़ में फैले जलीय कृषि यानी एक्वाकल्चर तालाब भी इस चक्रवाती तूफान से प्रभावित हुए हैं।
तटीय इलाकों में आजीविका के बुनियादी ढांचे को भी बड़ा आघात लगा है। नरसापुरम तट के पास कम से कम 460 मछली पकड़ने वाली नावें क्षतिग्रस्त हो गईं। पश्चिम गोदावरी जिले में तेज हवाओं और वर्षा के कारण 12,000 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त दर्ज किए गए हैं। केंद्रीय दल इन सभी क्षेत्रों से प्राप्त आंकड़ों और भौतिक सत्यापन के आधार पर अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करके केंद्र सरकार को सौंपेंगे, जिसके आधार पर वित्तीय सहायता की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्रोत: The Hindu





