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ग्रेट बैरियर रीफ: दुनिया का सबसे बड़ा प्रवाल भित्ति तंत्र, 2300 किलोमीटर में फैले हजारों रीफ और बार बार की कोरल ब्लीचिंग का खतरा

समुद्र के नीचे फैली यह जीवित संरचना इतनी बड़ी है कि अंतरिक्ष से भी दिखाई देती है।

समुद्र के नीचे रंग बिरंगे प्रवाल और मछलियों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • ऑस्ट्रेलिया के उत्तर पूर्वी तट पर क्वींसलैंड राज्य के सामने समुद्र में एक ऐसी संरचना है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा जीवित ढांचा कहा जाता है।
  • यह रीफ समुद्री जीवन का बहुत बड़ा घर है। यहां सैकड़ों तरह के कठोर कोरल, 1500 से ज्यादा तरह की मछलियां, कई तरह के शार्क और रे, समुद्री कछुओं की कई प्रजातियां, डॉल्फिन और व्हेल पाई जाती हैं।
  • ऑस्ट्रेलिया सरकार और वैज्ञानिक संस्थाएं रीफ को बचाने के लिए कई कदम उठा रही हैं।
  • ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर समुदायों का इस क्षेत्र से हजारों साल पुराना रिश्ता है।

ऑस्ट्रेलिया के उत्तर पूर्वी तट पर क्वींसलैंड राज्य के सामने समुद्र में एक ऐसी संरचना है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा जीवित ढांचा कहा जाता है। यह है ग्रेट बैरियर रीफ, यानी दुनिया का सबसे बड़ा प्रवाल भित्ति तंत्र। करीब 2300 किलोमीटर में फैले इस तंत्र में हजारों अलग अलग रीफ और सैकड़ों द्वीप हैं। यह इतना बड़ा है कि अंतरिक्ष से भी दिखाई देता है। लेकिन पिछले कुछ दशकों में समुद्र के बढ़ते तापमान के कारण यह गंभीर खतरे में है। इस लेख में जानिए ग्रेट बैरियर रीफ की खास बातें और इसके सामने खड़ी चुनौतियां।

प्रवाल भित्ति क्या है

प्रवाल यानी कोरल असल में छोटे छोटे समुद्री जीव होते हैं, जिन्हें पॉलिप कहा जाता है। ये अपने चारों ओर कैल्शियम कार्बोनेट का कड़ा ढांचा बनाते हैं। लाखों पॉलिप मिलकर हजारों सालों में विशाल संरचनाएं बनाते हैं, जिन्हें प्रवाल भित्ति या कोरल रीफ कहते हैं। कोरल के ऊतकों में जूजैंथेली नाम के सूक्ष्म शैवाल रहते हैं, जो प्रकाश संश्लेषण से कोरल को भोजन देते हैं और उन्हें रंग भी देते हैं।

मुख्य बातें: समुद्र के नीचे रंग बिरंगे प्रवाल और मछलियों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

आकार और फैलाव

ग्रेट बैरियर रीफ ऑस्ट्रेलिया के कोरल सागर में करीब 2300 किलोमीटर लंबाई में फैला है। इसमें लगभग 2900 अलग अलग रीफ और करीब 900 द्वीप हैं। ग्रेट बैरियर रीफ मरीन पार्क का कुल क्षेत्रफल लगभग 3.44 लाख वर्ग किलोमीटर है, जो कई देशों के आकार से भी बड़ा है।

जैव विविधता

यह रीफ समुद्री जीवन का बहुत बड़ा घर है। यहां सैकड़ों तरह के कठोर कोरल, 1500 से ज्यादा तरह की मछलियां, कई तरह के शार्क और रे, समुद्री कछुओं की कई प्रजातियां, डॉल्फिन और व्हेल पाई जाती हैं। डुगोंग जैसे दुर्लभ समुद्री स्तनधारी भी यहां रहते हैं। कई प्रवासी पक्षी द्वीपों पर घोंसले बनाते हैं।

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संरक्षण और विश्व धरोहर

ऑस्ट्रेलिया ने 1975 में ग्रेट बैरियर रीफ मरीन पार्क कानून बनाया और इसकी देखरेख के लिए ग्रेट बैरियर रीफ मरीन पार्क अथॉरिटी बनाई। 1981 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया। पार्क को अलग अलग जोन में बांटा गया है, जहां मछली पकड़ने और पर्यटन जैसी गतिविधियों के अलग नियम हैं।

कोरल ब्लीचिंग का खतरा

जब समुद्र का पानी लंबे समय तक सामान्य से ज्यादा गर्म रहता है, तो कोरल तनाव में आकर अपने अंदर रहने वाले शैवाल को बाहर निकाल देते हैं। इससे वे सफेद पड़ जाते हैं, जिसे कोरल ब्लीचिंग कहते हैं। अगर तापमान जल्दी सामान्य हो जाए तो कोरल ठीक हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक गर्मी रहने पर वे मर जाते हैं। ग्रेट बैरियर रीफ पर 1998, 2002, 2016, 2017, 2020, 2022 और 2024 में बड़े स्तर पर ब्लीचिंग दर्ज की गई। वैज्ञानिक इसे जलवायु परिवर्तन से जुड़ा मानते हैं।

दूसरे खतरे

  • क्राउन ऑफ थॉर्न्स स्टारफिश, जो कोरल को खा जाती है
  • खेतों से बहकर आने वाला मिट्टी और रसायनों वाला पानी
  • चक्रवात, जो रीफ को तोड़ देते हैं
  • समुद्र के पानी का बढ़ता अम्लीयपन

बचाने की कोशिशें

ऑस्ट्रेलिया सरकार और वैज्ञानिक संस्थाएं रीफ को बचाने के लिए कई कदम उठा रही हैं। पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए किसानों के साथ काम, स्टारफिश पर नियंत्रण, गर्मी सहन करने वाले कोरल पर शोध और रीफ की नियमित निगरानी इनमें शामिल हैं। ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन साइंस हर साल रीफ की स्थिति पर रिपोर्ट जारी करता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि लंबे समय में रीफ का भविष्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी पर निर्भर करता है।

भारत से जुड़ाव

भारत में भी अंडमान निकोबार, लक्षद्वीप, मन्नार की खाड़ी और कच्छ की खाड़ी में प्रवाल भित्तियां हैं। इन पर भी समुद्र के बढ़ते तापमान का असर देखा गया है, इसलिए ग्रेट बैरियर रीफ से जुड़े शोध भारत के लिए भी उपयोगी हैं।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था

ग्रेट बैरियर रीफ ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े पर्यटन आकर्षणों में से एक है। हर साल लाखों पर्यटक यहां स्नॉर्कलिंग, स्कूबा डाइविंग, कांच के तले वाली नावों की सैर और द्वीपों पर घूमने आते हैं। केर्न्स, पोर्ट डगलस और व्हिटसंडे द्वीप समूह इसके मुख्य प्रवेश द्वार हैं। पर्यटन और मछली पालन से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है, इसलिए रीफ का स्वास्थ्य सीधे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है।

आदिवासी समुदायों का संबंध

ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर समुदायों का इस क्षेत्र से हजारों साल पुराना रिश्ता है। उनके लिए रीफ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। आज रीफ के प्रबंधन में इन समुदायों को पारंपरिक संरक्षक के रूप में शामिल किया जाता है।

यूनेस्को की चिंता

पिछले कुछ वर्षों में यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति ने रीफ की स्थिति पर कई बार चिंता जताई है और इसे खतरे वाली विश्व धरोहर सूची में डालने पर चर्चा हुई है। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने इसके जवाब में संरक्षण के लिए अतिरिक्त धन और योजनाओं की घोषणा की। इस मुद्दे पर बहस जारी है।

ग्रेट बैरियर रीफ कहां है

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड तट के पास कोरल सागर में।

यह कितना लंबा है

लगभग 2300 किलोमीटर।

इसे विश्व धरोहर कब घोषित किया गया

1981 में।

कोरल ब्लीचिंग क्या है

गर्म पानी के कारण कोरल का शैवाल छोड़कर सफेद पड़ जाना।

स्रोत: Great Barrier Reef Marine Park Authority, UNESCO World Heritage: Great Barrier Reef, Australian Institute of Marine Science

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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