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PM Surya Ghar Yojana: कानपुर में 53 हजार से ज्यादा छतों पर सोलर, किसे मिलेगा ₹78 हजार तक फायदा?

PM Surya Ghar Yojana: कानपुर में 53 हजार घरों पर सोलर प्लांट
PM Surya Ghar Yojana: कानपुर में 53 हजार घरों पर सोलर प्लांट

सारांश

  • कानपुर नगर में 53,382 घरों में रूफटॉप सोलर प्लांट लग चुके हैं।
  • जिले में अब तक 172.06 MW रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित हुई है।
  • योजना के तहत 3 किलोवाट या उससे अधिक सिस्टम पर अधिकतम ₹78,000 की केंद्रीय सब्सिडी मिल सकती है।
  • 1 किलोवाट पर ₹30,000 और 2 किलोवाट पर ₹60,000 तक केंद्रीय सहायता का प्रावधान है।
  • पात्र घरेलू उपभोक्ता National Portal के जरिए आवेदन कर सकते हैं।
  • सोलर सिस्टम से घर की बिजली जरूरत पूरी करने के साथ अतिरिक्त बिजली को नेट मीटरिंग के जरिए ग्रिड में भेजा जा सकता है।
PM Surya Ghar Yojana: प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत कानपुर नगर में रूफटॉप सोलर लगाने का काम तेज गति से चल रहा है। जिला प्रशासन की समीक्षा के अनुसार, अब तक 53,382 घरों की छतों पर सोलर प्लांट लग चुके हैं। इनसे जिले में कुल 172.06 मेगावाट सौर क्षमता तैयार हुई है। प्रदर्शन के आधार पर कानपुर को प्रदेश में तीसरा स्थान बताया गया है। लाभार्थियों को अब तक 432.18 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी हो चुकी है। आंकड़े अधिकारियों की समीक्षा बैठक पर आधारित हैं और बाद में पोर्टल अपडेट से थोड़ा बदल सकते हैं।

योजना का मकसद घरेलू बिजली बिल घटाना और छत पर पैदा होने वाली बिजली को ग्रिड से जोड़ना है। जिन परिवारों का बिजली कनेक्शन सक्रिय है और छत उपयुक्त है, वे आधिकारिक पोर्टल से आवेदन कर सकते हैं। सब्सिडी की रकम क्षमता पर निर्भर करती है, हर आवेदक को अधिकतम सीमा अपने आप नहीं मिलती।

PM Surya Ghar Yojana: छह महीने में लक्ष्य से आगे कैसे निकला कानपुर?

मौजूदा सत्र में कानपुर को 42,684 सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य दिया गया है। अप्रैल से सितंबर के छह महीनों के लिए अलग लक्ष्य 21,342 प्लांट था। इसी अवधि में जिले में 25,035 प्लांट लगे। इस हिसाब से छह माह का लक्ष्य 117.3 प्रतिशत पूरा हुआ। सालाना लक्ष्य अभी बाकी है, इसलिए शेष माह में भी इंस्टॉलेशन जारी रहने की बात कही गई है।

योजना से जुड़े प्लांटों के कारण अब तक अनुमानित 1,30,764 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी का दावा किया गया है। यह अनुमान उत्पादन और पारंपरिक बिजली के विस्थापन पर आधारित है, मापी हुई हर छत की अलग रिपोर्ट नहीं। स्वच्छ ऊर्जा बढ़ने से ग्रिड पर दिन के पीक लोड में कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।

समीक्षा बैठक में अधिकारियों को क्या निर्देश मिले?

मंगलवार को विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन ने प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पात्र परिवारों को योजना से जोड़ने की रफ्तार बढ़ाने को कहा। लंबित आवेदन और अटके मामले समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए गए। बैठक में पीओ नेडा राकेश पांडेय ने योजना की स्थिति अधिकारियों के सामने रखी।

प्रशासन का जोर उन घरों पर है जहां तकनीकी मंजूरी हो चुकी है, लेकिन विक्रेता या नेट मीटरिंग अटकी हुई है। लंबित पत्रावली घटने से सब्सिडी जारी होने का समय भी कम हो सकता है। जिला स्तर पर लक्ष्य और हासिल क्षमता दोनों को साथ रखकर निगरानी चल रही है।

PM Surya Ghar Yojana: 1, 2 और 3 किलोवाट पर सब्सिडी कितनी मिलती है?

केंद्र की ओर से रूफटॉप सिस्टम पर क्षमता के हिसाब से सहायता दी जाती है। योजना के अनुसार 1 किलोवाट पर 30 हजार रुपये तक, 2 किलोवाट पर 60 हजार रुपये तक और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर अधिकतम 78 हजार रुपये तक सब्सिडी मिल सकती है। 3 किलोवाट से बड़ा सिस्टम लगाने पर केंद्रीय सहायता इसी上限 तक रहती है। कुछ राज्यों में अलग से राज्य सहायता भी जुड़ सकती है, वह उत्तर प्रदेश के मौजूदा नियम के अनुसार देखनी होगी।

सब्सिडी सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में आती है, विक्रेता को नकद नहीं दी जाती। इंस्टॉलेशन, निरीक्षण और डिस्कॉम की मंजूरी पूरी होने के बाद ही राशि जारी होती है। खाता नाम बिजली कनेक्शन या आधार से मेल नहीं खाए तो भुगतान रुक सकता है।

आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज और चरण जरूरी हैं?

रजिस्ट्रेशन आधिकारिक पोर्टल पर होता है। आवेदक को राज्य और बिजली वितरण कंपनी चुननी होती है, फिर उपभोक्ता खाता संख्या डालनी होती है। फॉर्म में आधार कार्ड, बिजली का ताजा बिल, बैंक पासबुक की प्रति, मोबाइल नंबर और फोटो मांगे जाते हैं। जमा करने के बाद डिस्कॉम की तकनीकी मंजूरी का इंतजार करना पड़ता है।

मंजूरी के बाद पंजीकृत विक्रेता चुनकर छत पर सिस्टम लगवाया जाता है। काम पूरा होने, मीटर बदलने या नेट मीटरिंग जुड़ने और निरीक्षण के बाद सब्सिडी खाते में आती है। विक्रेता सिर्फ पोर्टल पर सूचीबद्ध एजेंसी से लें। अनौपचारिक ठेकेदार से लगवाया सिस्टम सब्सिडी के दायरे से बाहर हो सकता है।

PM Surya Ghar Yojana: लाभ लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

छत की दिशा, छाया और ढांचे की मजबूती उत्पादन तय करती है। 1 किलोवाट सिस्टम हर घर का बिल शून्य नहीं कर देता। रात की खपत और कम धूप वाले महीनों में ग्रिड बिजली फिर भी लगती है। अतिरिक्त दिन की बिजली नेट मीटरिंग नियमों के तहत समायोजित होती है, नकद भुगतान हर राज्य में एक समान नहीं है।

कानपुर के 53,382 प्लांट और 172.06 मेगावाट क्षमता बताती है कि योजना जिला स्तर पर बड़े पैमाने पर पहुंच चुकी है। 432.18 करोड़ रुपये की जारी सब्सिडी भी मांग दिखाती है। नया आवेदक पोर्टल पर पात्रता जांचकर, दस्तावेज तैयार रखकर और पंजीकृत विक्रेता चुनकर ही प्रक्रिया शुरू करे। लंबित मामलों के निस्तारण के निर्देश के बाद प्रतीक्षा सूची वाले परिवारों को स्थिति का अपडेट अपने आवेदन नंबर से मिल सकता है।

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लेखक

Adarsh Pandey

आदर्श पांडेय डेमोक्रेटिक भारत लाइव में न्यूज़ राइटर हैं। वे देश की ताजा खबरें, आपका पैसा (कारोबार), मनोरंजन और लाइफस्टाइल से जुड़े विषय कवर करते हैं। डिजिटल मीडिया में उन्हें एक साल से अधिक का अनुभव है।

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