रिपोर्टों के अनुसार, मानेसर स्थित आईसीएन इंडिया को प्रश्नों की डिजाइनिंग, प्रिंटिंग, जंबलिंग और ओएमआर शीट तैयार करने का काम सौंपा गया था। समीर इसी एजेंसी में कार्यरत था और प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया से सीधे जुड़ा था। गोपनीयता की जिम्मेदारी वाली एजेंसी के कर्मी के पास सवाल-जवाब पहले से उपलब्ध होना जांच का केंद्र बिंदु बना हुआ है।
JSSC CGL Scam: समीर की भूमिका जांच में क्यों अहम बताई जा रही है?
CID के अनुसार, (JSSC CGL Scam) समीर एजेंसी के उन लोगों में था जिन्हें परीक्षा सामग्री की गोपनीयता संभालनी थी। प्रश्नपत्र बनने की प्रक्रिया तक उसकी पहुंच ने बाहरी सिंडिकेट को सीधा रास्ता दिया। जांच का दावा है कि उसने परीक्षा से पहले पूरा प्रश्नपत्र और उत्तर याद कर लिए। इसके बाद वह साधारण कर्मी से गिरोह के अहम सूत्र में बदल गया।
इसी पहुंच का नतीजा यह भी बताया गया है कि समीर बाद में सहायक अनुभाग अधिकारी (ASO) के पद पर चयनित होने में सफल रहा। चयन और लीक के बीच का संबंध अभी वित्तीय और गवाह बयानों से जोड़ा जा रहा है। अंतिम निष्कर्ष चार्जशीट और अदालती आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।
दिल्ली से रांची की हवाई यात्रा का जिक्र क्यों है?
जांच में कहा गया है कि समीर परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य सहयोगियों के साथ दिल्ली से रांची हवाई मार्ग से पहुंचा। इन टिकटों और यात्रा खर्च का इंतजाम सह-अभियुक्त सोमांश प्रकाश की ओर से हुआ था। CID इस यात्रा को पेपर लीक (JSSC CGL Scam) नेटवर्क से जोड़कर देख रही है। किस तारीख को उड़ान हुई, किन नामों की बुकिंग हुई और भुगतान किस खाते से हुआ, ये विवरण वित्तीय पड़ताल का हिस्सा हैं।
यात्रा अकेले अपराध साबित नहीं करती। जांच एजेंसी इसे समय, संपर्क और भुगतान की कड़ी के रूप में जोड़ रही है। सोमांश प्रकाश की भूमिका कितनी दूर तक जाती है, यह आगे के बयान और खाता विश्लेषण पर निर्भर करेगा।
JSSC CGL Scam: रांची के किन कोचिंग संस्थानों पर रडार है?
CID यह भी देख रही है कि पेपर लीक (JSSC CGL Scam) से जुड़ा पैसा कहां पहुंचा। रडार पर रांची के दो कोचिंग संस्थान हैं: पतंजलि आईएएस एकेडमी और शिवांगन की पाठशाला। रिपोर्टों के अनुसार, यहां अभ्यर्थियों को पास कराने का संगठित ठेका लिया जाता था। पतंजलि आईएएस एकेडमी के संचालक रवि कुमार और शिवांगन की पाठशाला के संचालक संजीत कुमार पहले ही जेल जा चुके हैं।
जांच में परीक्षा एजेंसियों टीडीपीएल और बिंसिस टेक्नोलॉजी के साथ इन कोचिंग संचालकों की मिलीभगत का जिक्र है। CID दोनों संचालकों के बैंक खाते, आय-व्यय, ऑडिट रिपोर्ट और लेन-देन खंगाल रही है। कोचिंग फीस, नकद वसूली और डिजिटल ट्रांसफर को अलग-अलग जोड़कर देखा जा रहा है।
समीर के खाते में कौन से संदिग्ध ट्रांसफर मिले?
वित्तीय पड़ताल में समीर के बैंक खातों से संदिग्ध लेन-देन के प्रमाण मिलने का दावा है। खातों में यूपीआई के जरिए 98,000 रुपये और 30,000 रुपये के ट्रांसफर दर्ज मिले हैं। ये रकम अपने आप में बड़ी रिश्वत साबित नहीं करतीं, लेकिन समय, भेजने वाले खाते और परीक्षा कैलेंडर से मिलान होने पर ये कड़ी बन सकती हैं। CID अब इन्हीं ट्रांसफर को सिंडिकेट के बाकी सदस्यों से जोड़ने की कोशिश में है।
प्रिंटिंग प्रक्रिया की पहुंच का नाजायज इस्तेमाल और याद किए गए सवाल-जवाब, दोनों बातें एक साथ जांच में रखी गई हैं। यदि अभ्यर्थी के रूप में समीर ने वही पेपर हल किया (JSSC CGL Scam) जिसे उसने पहले देखा था, तो यह अनुचित साधन और गोपनीयता भंग दोनों के दायरे में आ सकता है। कानूनी धाराओं का अंतिम निर्धारण अभियोजन दस्तावेज में होगा।
JSSC CGL Scam: जांच अब किस दायरे तक पहुंच चुकी है?
CID का फोकस अब सिर्फ प्रश्नपत्र चुराने वालों तक सीमित नहीं है। दायरा पैसे के प्रवाह, कोचिंग संस्थानों, प्रिंटिंग एजेंसी के कर्मियों और परीक्षा से जुड़ी अन्य एजेंसियों तक बढ़ गया है। समीर के खातों के संदिग्ध ट्रांसफर और बाकी सदस्यों की भूमिका को एक श्रृंखला में बांधने का काम चल रहा है।
अभ्यर्थियों के लिए इसका मतलब यह है कि चयन सूची और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल तब तक बने रह सकते हैं, जब तक जांच रिपोर्ट और अदालत का रुख स्पष्ट न हो। जिन उम्मीदवारों का चयन सही प्रक्रिया से हुआ, उन्हें भी लंबित मामले का असर झेलना पड़ सकता है। आयोग और राज्य सरकार की ओर से आगे की कार्रवाई अलग से घोषित हो सकती है।
JSSC CGL-2023 का यह मामला दिखाता है कि प्रश्नपत्र की छपाई और जंबलिंग जैसी बंद प्रक्रिया भी अंदरूनी पहुंच से कमजोर पड़ सकती है। CID के मौजूदा दावे रिपोर्टों पर आधारित हैं। आरोप सिद्ध होने या खारिज होने का फैसला सबूत, गवाह और अदालती सुनवाई के बाद ही होगा।






टिप्पणियां (1)