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एनीमिया: 57% महिलाएं और 67% बच्चे प्रभावित, जानें लक्षण, जांच, खानपान और एनीमिया मुक्त भारत अभियान

एनीमिया क्या है, WHO के हीमोग्लोबिन मानक, लक्षण, जोखिम वाले समूह, खानपान से बचाव और सरकार का एनीमिया मुक्त भारत अभियान।

एनीमिया के लक्षण और बचाव बताने वाला डेमोक्रेटिक भारत लाइव का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • संक्षेप में: एनीमिया यानी खून की कमी भारत की बड़ी स्वास्थ्य समस्या है।
  • हल्के मामलों में अक्सर लक्षण साफ नहीं दिखते, इसलिए खून की जांच ही पक्की पहचान का तरीका है।
  • सरकार ने 2018 में एनीमिया मुक्त भारत अभियान शुरू किया, जो 6x6x6 रणनीति पर आधारित है: छह लाभार्थी समूह, छह उपाय और छह संस्थागत व्यवस्थाएं।
  • खून की कमी के कारण अलग हो सकते हैं, इसलिए जांच और डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवा लें।

संक्षेप में: एनीमिया यानी खून की कमी भारत की बड़ी स्वास्थ्य समस्या है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार 15 से 49 साल की 57 प्रतिशत महिलाएं, 6 से 59 महीने के 67.1 प्रतिशत बच्चे और 25 प्रतिशत पुरुष एनीमिया से प्रभावित थे। इसका सबसे आम कारण आयरन की कमी है, जिसे सही खानपान, जांच और इलाज से रोका जा सकता है।

एनीमिया क्या है

खून में हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को पूरे शरीर तक पहुंचाता है। हीमोग्लोबिन तय स्तर से कम होने पर एनीमिया होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार गैर-गर्भवती महिलाओं में 12 g/dL से कम, गर्भवती महिलाओं और 6 से 59 महीने के बच्चों में 11 g/dL से कम और पुरुषों में 13 g/dL से कम हीमोग्लोबिन एनीमिया माना जाता है। आयरन के अलावा फोलिक एसिड या विटामिन B12 की कमी, पेट के कीड़े, मलेरिया और कुछ आनुवंशिक बीमारियां भी इसकी वजह हो सकती हैं।

लक्षण जिन पर ध्यान दें

  • जल्दी थकान, कमजोरी और काम में मन न लगना
  • त्वचा, नाखूनों और आंखों के अंदरूनी हिस्से का पीलापन
  • थोड़ा चलने पर सांस फूलना और दिल की धड़कन तेज होना
  • चक्कर आना, सिरदर्द और हाथ-पैर ठंडे रहना
  • बच्चों में पढ़ाई में ध्यान न लगना और विकास धीमा होना

हल्के मामलों में अक्सर लक्षण साफ नहीं दिखते, इसलिए खून की जांच ही पक्की पहचान का तरीका है।

किसे ज्यादा खतरा

किशोरियां, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं और छोटे बच्चे सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। गर्भावस्था में खून की कमी से समय से पहले प्रसव और कम वजन वाले शिशु का खतरा बढ़ता है। गर्भवती महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से पोषण के लिए आर्थिक मदद मिलती है।

खानपान से बचाव

  • हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चना, राजमा, बाजरा और रागी जैसे आयरन वाले खाद्य पदार्थ लें। मांसाहारी लोग अंडा, मछली और मांस से भी आयरन पा सकते हैं।
  • भोजन के साथ आंवला, नींबू, संतरा या अमरूद जैसे विटामिन-C वाले फल लें। इससे आयरन बेहतर अवशोषित होता है।
  • खाने के तुरंत पहले या बाद चाय-कॉफी पीने से बचें, क्योंकि ये आयरन के अवशोषण को कम करती हैं।
  • आयरन-फोर्टिफाइड आटा, चावल या नमक का इस्तेमाल भी मददगार है।

त्योहारों में संतुलित खानपान पर हमारी यह गाइड भी पढ़ें।

एनीमिया मुक्त भारत अभियान

सरकार ने 2018 में एनीमिया मुक्त भारत अभियान शुरू किया, जो 6x6x6 रणनीति पर आधारित है: छह लाभार्थी समूह, छह उपाय और छह संस्थागत व्यवस्थाएं। इसके तहत बच्चों, किशोरों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आयरन-फोलिक एसिड (IFA) की खुराक, साल में दो बार पेट के कीड़ों की दवा, डिजिटल तरीके से हीमोग्लोबिन जांच और पोषण परामर्श दिया जाता है। IFA की गोलियां आंगनवाड़ी, स्कूल और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त मिलती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एनीमिया की जांच कैसे होती है?

खून की सामान्य जांच (हीमोग्लोबिन या CBC) से। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर यह जांच मुफ्त होती है।

क्या आयरन की गोली खुद से ले सकते हैं?

खून की कमी के कारण अलग हो सकते हैं, इसलिए जांच और डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवा लें।

क्या केवल खानपान से एनीमिया ठीक हो सकता है?

हल्के मामलों में खानपान से सुधार हो सकता है, लेकिन मध्यम या गंभीर मामलों में इलाज जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, यह चिकित्सीय सलाह नहीं है। किसी भी लक्षण, जांच या दवा के लिए योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

स्रोत: WHO: Anaemia फैक्ट शीट, ICMR-NIN (भारतीयों के लिए आहार दिशा-निर्देश), NFHS-5 (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय), एनीमिया मुक्त भारत।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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