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प्रदूषण में N95 मास्क: सही मास्क कैसे चुनें, कैसे पहनें और कपड़े का मास्क क्यों काफी नहीं

दिवाली के बाद और सर्दियों में उत्तर भारत की हवा में PM2.5 जैसे बारीक कण बढ़ जाते हैं। जानिए N95 मास्क क्या है, असली मास्क की पहचान, सही फिटिंग, कितने दिन चलाएं और किन लोगों को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

प्रदूषण में N95 मास्क चुनने और पहनने का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • अक्टूबर-नवंबर में उत्तर भारत के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब से बहुत खराब श्रेणी में पहुंच जाती है।
  • N95 एक मानक है, जिसका अर्थ है कि मास्क हवा के बहुत बारीक कणों का बड़ा हिस्सा छान सकता है।
  • ज्यादातर N95 मास्क बार-बार धोने के लिए नहीं बने होते। मास्क गंदा, गीला या खराब हो जाए, या सांस लेने में ज्यादा मुश्किल लगने लगे, तो उसे बदल दें।
  • आमतौर पर नहीं। घर के अंदर हवा साफ रखने के लिए धुआं कम करें, खिड़कियां प्रदूषण ज्यादा होने पर बंद रखें और जरूरत हो तो एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें।

अक्टूबर-नवंबर में उत्तर भारत के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब से बहुत खराब श्रेणी में पहुंच जाती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वायु गुणवत्ता सूचकांक में इस दौरान PM2.5 और PM10 कण मुख्य प्रदूषक होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ये बारीक कण फेफड़ों तक पहुंचकर सेहत पर असर डाल सकते हैं। ऐसे में बाहर निकलते समय सही मास्क मददगार हो सकता है। जानिए प्रदूषण में N95 मास्क कैसे चुनें और पहनें।

N95 मास्क क्या है

N95 एक मानक है, जिसका अर्थ है कि मास्क हवा के बहुत बारीक कणों का बड़ा हिस्सा छान सकता है। इसी तरह के दूसरे मानक भी हैं, जैसे FFP2। भारत में ऐसे रेस्पिरेटर के लिए BIS का मानक भी है। ये मास्क सामान्य कपड़े या सर्जिकल मास्क से अलग होते हैं, क्योंकि इन्हें चेहरे पर कसकर फिट होने के लिए बनाया जाता है।

मुख्य बातें: प्रदूषण में N95 मास्क चुनने और पहनने का ग्राफिक
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कपड़े का मास्क क्यों काफी नहीं

कपड़े के मास्क और रूमाल बड़े धूल कणों को कुछ हद तक रोकते हैं, लेकिन PM2.5 जैसे बारीक कणों के खिलाफ इनका असर कम होता है। सर्जिकल मास्क भी चेहरे पर ढीला रहता है, जिससे किनारों से हवा अंदर आती है।

सही मास्क कैसे चुनें

  • मास्क पर N95, FFP2 या BIS जैसे मानक का निशान और निर्माता का नाम देखें
  • भरोसेमंद दुकान से खरीदें, बहुत सस्ते और बिना जानकारी वाले मास्क से बचें
  • मास्क में नाक के ऊपर मुड़ने वाली धातु की पट्टी हो
  • सिर के पीछे बंधने वाली पट्टियां कान वाली पट्टियों से बेहतर फिटिंग देती हैं
  • मास्क का आकार आपके चेहरे के अनुसार हो, बच्चों के लिए छोटे आकार के मास्क आते हैं

यह भी पढ़ें: दिवाली पर अस्थमा से बचाव: धुएं और प्रदूषण में सांस के मरीज क्या सावधानी रखें और कब डॉक्टर के पास जाएं | वायु प्रदूषण और सेहत: AQI की श्रेणियां कैसे समझें, GRAP के चरण और बचाव के व्यावहारिक तरीके

पहनने का सही तरीका

  • मास्क पहनने से पहले हाथ धो लें
  • मास्क को नाक और ठुड्डी तक पूरा ढकें
  • नाक वाली पट्टी को दबाकर नाक के आकार में मोड़ें
  • पट्टियां ठीक से कसें
  • पहनने के बाद जोर से सांस छोड़कर देखें, किनारों से हवा निकले तो फिटिंग ठीक करें
  • दाढ़ी होने पर फिटिंग ठीक नहीं बैठती, इससे सुरक्षा कम हो सकती है

कितने दिन चलाएं

ज्यादातर N95 मास्क बार-बार धोने के लिए नहीं बने होते। मास्क गंदा, गीला या खराब हो जाए, या सांस लेने में ज्यादा मुश्किल लगने लगे, तो उसे बदल दें। निर्माता के निर्देश पढ़ें। मास्क को धोएं नहीं, जब तक निर्माता ने इसकी अनुमति न दी हो।

किन्हें सावधानी चाहिए

  • दिल या फेफड़ों के मरीज, अस्थमा या COPD के मरीज और गर्भवती महिलाएं N95 पहनने से पहले डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि कसा हुआ मास्क सांस लेने में मुश्किल बढ़ा सकता है
  • छोटे बच्चों के लिए वयस्कों का मास्क ठीक नहीं बैठता
  • मास्क पहनकर चक्कर, सांस फूलना या बेचैनी हो, तो तुरंत मास्क हटाएं और जरूरत हो तो डॉक्टर से मिलें

मास्क के साथ दूसरे उपाय

  • AQI बहुत खराब हो, तो बाहर की गतिविधि और सुबह-शाम की सैर कम करें
  • बाहर व्यायाम करने के बजाय घर के अंदर करें
  • घर की खिड़कियां प्रदूषण ज्यादा होने पर बंद रखें
  • अपने शहर का AQI CPCB के समीर ऐप या वेबसाइट पर देखें

क्या घर के अंदर मास्क पहनना चाहिए?

आमतौर पर नहीं। घर के अंदर हवा साफ रखने के लिए धुआं कम करें, खिड़कियां प्रदूषण ज्यादा होने पर बंद रखें और जरूरत हो तो एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी लक्षण होने या इलाज शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

स्रोत: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): Air pollution। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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