अक्टूबर-नवंबर में उत्तर भारत के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है। दिवाली के पटाखों का धुआं, ठंडी हवा और पराली के धुएं जैसे कारणों से प्रदूषण और बढ़ता है। ऐसे में अस्थमा, COPD और दूसरी सांस की बीमारियों वाले लोगों को खास सावधानी रखनी चाहिए। जानिए दिवाली पर अस्थमा से बचाव के उपाय।
पहले से तैयारी करें
- अपने डॉक्टर से त्योहार से पहले मिलें और दवा की खुराक की समीक्षा कराएं
- डॉक्टर की बताई नियमित दवा और इनहेलर समय पर लें
- इनहेलर, स्पेसर और जरूरी दवाइयां पर्याप्त मात्रा में घर पर रखें
- बच्चों को अस्थमा है, तो स्कूल और परिवार के बाकी सदस्यों को भी दवा की जानकारी दें
- डॉक्टर ने अस्थमा एक्शन प्लान दिया है, तो उसे आसान जगह पर रखें

हवा की गुणवत्ता पर नजर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हर दिन शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI जारी करता है। समीर ऐप या CPCB की वेबसाइट पर अपने शहर का AQI देखें। AQI खराब या बहुत खराब हो, तो उस दिन बाहर की गतिविधियां कम करें, खासकर सुबह जल्दी और देर शाम।
घर के अंदर बचाव
- प्रदूषण ज्यादा हो, तो खिड़कियां बंद रखें
- घर में धूपबत्ती, अगरबत्ती और कपूर का धुआं कम रखें
- सफाई के समय गीले कपड़े से पोंछा लगाएं, झाड़ू से धूल न उड़ाएं
- एयर प्यूरीफायर हो, तो उसे इस्तेमाल करें और फिल्टर समय पर बदलें
- खाना बनाते समय चिमनी या एग्जॉस्ट फैन चलाएं
यह भी पढ़ें: वायु प्रदूषण और सेहत: AQI की श्रेणियां कैसे समझें, GRAP के चरण और बचाव के व्यावहारिक तरीके | दिवाली पर आंखों की देखभाल: धुएं, पटाखों और प्रदूषण से आंखों को कैसे बचाएं, चोट लगे तो क्या करें
पटाखों से दूरी
अस्थमा के मरीज पटाखे जलाने वाली जगह से दूर रहें। धुएं से भरी गली या छत पर जाने से बचें। परिवार के दूसरे सदस्य पटाखे चलाएं, तो मरीज घर के अंदर खिड़कियां बंद करके रहें। हरित पटाखों से भी धुआं निकलता है, इसलिए दूरी बनाए रखें।
बाहर निकलना जरूरी हो तो
- अच्छी तरह फिट होने वाला N95 या उसके बराबर का मास्क पहनें
- भीड़ और ट्रैफिक वाले रास्तों से बचें
- तेज व्यायाम या दौड़ बाहर करने की जगह घर के अंदर हल्का व्यायाम करें
- इनहेलर हमेशा साथ रखें
खाने-पीने और आराम का ध्यान
पर्याप्त पानी पिएं और गुनगुना पानी लें। ठंडी चीजें खाने से कुछ लोगों में खांसी बढ़ सकती है। नींद पूरी करें और धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहें।
आपात लक्षण पहचानें
इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग से संपर्क करें:
- सांस बहुत तेज फूलना या बोलने में दिक्कत
- इनहेलर लेने के बाद भी आराम न मिलना
- होंठ या नाखूनों का नीला पड़ना
- सीने में तेज जकड़न
- बच्चों में पसलियों के बीच त्वचा का अंदर धंसना
बुजुर्ग और बच्चे
बुजुर्गों और छोटे बच्चों के फेफड़े प्रदूषण से ज्यादा प्रभावित होते हैं। उनके लिए घर के अंदर साफ हवा और दवा की नियमितता का खास ध्यान रखें।
क्या भाप लेने से अस्थमा में आराम मिलता है?
कुछ लोगों को भाप से अस्थायी आराम मिलता है, लेकिन यह दवा का विकल्प नहीं है। कोई भी घरेलू उपाय अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से पूछें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी लक्षण होने या इलाज शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
स्रोत: राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल (NHP), भारत सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।






टिप्पणियां (2)