दिवाली रोशनी का त्योहार है, लेकिन कई जगह यह तेज आवाज वाले पटाखों का भी समय बन जाता है। पटाखों का शोर और कान की सेहत का सीधा संबंध है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बहुत तेज आवाज के संपर्क में आने से सुनने की क्षमता को नुकसान हो सकता है, और यह नुकसान कई बार स्थायी होता है। इसलिए त्योहार की खुशी के साथ कानों का ध्यान रखना भी जरूरी है।
तेज आवाज कानों को कैसे नुकसान पहुंचाती है
कान के अंदरूनी हिस्से में बहुत नाजुक कोशिकाएं होती हैं, जो आवाज को पहचानने में मदद करती हैं। बहुत तेज आवाज इन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। पास में अचानक फटने वाला तेज पटाखा एक बार में भी नुकसान कर सकता है। WHO के अनुसार शोर से होने वाला सुनने का नुकसान रोका जा सकता है, बशर्ते तेज आवाज से बचाव किया जाए।

किन लक्षणों पर ध्यान दें
- पटाखे के बाद कान में घंटी या सीटी जैसी आवाज, जिसे टिनिटस कहते हैं
- कान भरा हुआ या बंद लगना
- आवाजें धीमी या दबी हुई सुनाई देना
- कान में दर्द
- कान से खून या पानी आना
अगर ये लक्षण कुछ घंटों में ठीक न हों, या अचानक सुनना बहुत कम हो जाए, तो जल्द ENT डॉक्टर से मिलें। अचानक सुनने की क्षमता कम होना आपात स्थिति मानी जाती है।
बचाव के आसान उपाय
- तेज आवाज वाले पटाखों से दूरी रखें
- पटाखा जलाने के बाद कान के पास न खड़े रहें
- भीड़ वाली जगह पर जहां लगातार पटाखे फूट रहे हों, ज्यादा देर न रुकें
- जरूरत हो तो इयरप्लग या इयरमफ का इस्तेमाल करें
- कम आवाज वाले या ग्रीन पटाखे चुनें, जहां इसकी अनुमति हो
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बच्चों का खास ध्यान
छोटे बच्चों और नवजात के कान ज्यादा संवेदनशील होते हैं। उन्हें पटाखों वाली जगह से दूर रखें। बाहर ले जाना हो तो उनके कान ढककर रखें। बच्चों को पटाखा जलाते समय हमेशा किसी बड़े की निगरानी में रखें।
बुजुर्गों और मरीजों का ध्यान
बुजुर्ग, दिल के मरीज और जिन्हें पहले से सुनने में दिक्कत है, उनके लिए अचानक तेज आवाज परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे लोगों को घर के अंदर, खिड़की-दरवाजे बंद करके रखें।
पालतू जानवर
कुत्ते और बिल्लियां तेज आवाज से बहुत डरते हैं। उन्हें घर के अंदर शांत कमरे में रखें और अकेला न छोड़ें।
नियमों का पालन
पटाखों से जुड़े नियम, जैसे किन पटाखों की अनुमति है और किस समय जलाए जा सकते हैं, राज्य सरकार, प्रशासन और अदालतों के आदेशों से तय होते हैं। अपने शहर के नियमों की जानकारी स्थानीय प्रशासन से लें। आवाज और वायु प्रदूषण से जुड़ी जानकारी CPCB देता है।
क्या कान में रुई डालना काफी है?
रुई से थोड़ी आवाज कम होती है, लेकिन यह सही सुरक्षा नहीं है। तेज आवाज वाली जगह पर दूरी बनाना और उचित इयरप्लग इस्तेमाल करना ज्यादा असरदार है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी लक्षण होने या इलाज शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): Deafness and hearing loss, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





