अचानक दिल की धड़कन रुकने यानी कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में हर मिनट कीमती होता है। अस्पताल या एम्बुलेंस पहुंचने से पहले आसपास मौजूद व्यक्ति अगर CPR शुरू कर दे, तो मरीज के बचने की संभावना बढ़ सकती है। CPR यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन एक आपातकालीन प्राथमिक उपचार है, जिसे कोई भी आम व्यक्ति सीख सकता है। जानिए CPR कैसे दें।
CPR कब जरूरी है
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के अनुसार अगर कोई वयस्क अचानक गिर जाए, हिलाने और जोर से पुकारने पर कोई प्रतिक्रिया न दे और सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो या सिर्फ हांफने जैसी सांस ले रहा हो, तो यह कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। ऐसे में तुरंत CPR शुरू करना चाहिए। कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक अलग हैं। हार्ट अटैक में दिल की नस में रुकावट होती है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक प्रभावी ढंग से धड़कना बंद कर देता है। हार्ट अटैक कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट की वजह बन सकता है।

हैंड्स-ओनली CPR के स्टेप्स
AHA आम लोगों के लिए वयस्कों में हैंड्स-ओनली CPR की सलाह देता है, जिसमें मुंह से सांस देने की जरूरत नहीं होती:
- पहले देखें कि जगह आपके और मरीज के लिए सुरक्षित है
- मरीज के कंधे थपथपाकर जोर से पुकारें, प्रतिक्रिया न हो तो तुरंत 112 या 108 पर कॉल करें या किसी और से कराएं
- मरीज को पीठ के बल किसी सख्त और समतल सतह पर लिटाएं
- एक हथेली सीने के बीच में रखें और दूसरी हथेली उसके ऊपर रखकर उंगलियां फंसा लें
- कोहनियां सीधी रखते हुए अपने कंधे मरीज के सीने के ठीक ऊपर लाएं
- सीने को तेज और गहराई से दबाएं, AHA के अनुसार वयस्कों में प्रति मिनट 100 से 120 बार की गति से और कम से कम लगभग 5 सेंटीमीटर गहराई तक
- हर दबाव के बाद सीने को पूरी तरह ऊपर आने दें
- एम्बुलेंस या प्रशिक्षित मदद आने तक या मरीज के सांस लेने तक दबाव देते रहें
दबाव देते-देते थक जाएं, तो पास मौजूद दूसरे व्यक्ति को बारी-बारी से CPR देने को कहें, ताकि दबाव रुके नहीं।
AED मशीन क्या है
AED यानी ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर एक पोर्टेबल मशीन है, जो दिल की धड़कन को फिर से सामान्य करने के लिए बिजली का झटका दे सकती है। कई एयरपोर्ट, मॉल और बड़े दफ्तरों में यह मशीन होती है। AED आवाज के जरिए खुद निर्देश देती है कि पैड कहां लगाने हैं और कब मरीज से दूर रहना है। अगर पास में AED हो, तो किसी और से उसे मंगाते हुए CPR जारी रखें।
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बच्चों और डूबने के मामलों में
बच्चों, शिशुओं और डूबने या दम घुटने जैसे मामलों में CPR का तरीका कुछ अलग होता है और उसमें सांस देना भी शामिल हो सकता है। इसके लिए प्रशिक्षित व्यक्ति से औपचारिक प्रशिक्षण लेना सबसे अच्छा है। एम्बुलेंस को कॉल करने पर कई बार फोन पर ही CPR के निर्देश दिए जाते हैं, उन्हें ध्यान से सुनें।
CPR सीखें
कई अस्पताल, रेड क्रॉस जैसी संस्थाएं और प्रशिक्षण केंद्र CPR की ट्रेनिंग देते हैं। डमी पर अभ्यास से सही गहराई और गति समझ में आती है। यह जानकारी किसी अपने की जान बचा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गलत CPR से नुकसान होने का डर हो तो?
कार्डियक अरेस्ट में CPR न करने से जान जाने का खतरा कहीं ज्यादा होता है, इसलिए मदद आने तक CPR शुरू करना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी लक्षण होने या इलाज शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
स्रोत: अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA): What is CPR। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।






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