गले में खराश हो या हल्का बुखार, कई लोग बिना डॉक्टर से पूछे मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक ले लेते हैं। कुछ दिन में आराम मिलते ही दवा छोड़ भी देते हैं। यह आदत आज की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी दवा-प्रतिरोध को बढ़ाती है। जानिए एंटीबायोटिक का सही इस्तेमाल कैसे करें।
एंटीबायोटिक क्या करती हैं
एंटीबायोटिक ऐसी दवाएं हैं, जो बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण का इलाज करती हैं। ये बैक्टीरिया को मारती हैं या उनकी बढ़त रोकती हैं। निमोनिया, मूत्र मार्ग संक्रमण और टीबी जैसी कई बीमारियों के इलाज में इनकी अहम भूमिका है। लेकिन ये वायरस पर असर नहीं करतीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसी वायरल बीमारियों में एंटीबायोटिक लेने से फायदा नहीं होता, उल्टा दुष्प्रभाव और दवा-प्रतिरोध का खतरा बढ़ता है।

दवा-प्रतिरोध क्या है
जब बैक्टीरिया, वायरस, फंगस या परजीवी उन दवाओं के प्रति खुद को ढाल लेते हैं, जो पहले उन पर असर करती थीं, तो इसे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस कहते हैं। WHO इसे दुनिया के लिए बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में गिनता है। इससे सामान्य संक्रमण का इलाज भी मुश्किल, लंबा और महंगा हो जाता है। सर्जरी, कैंसर के इलाज और प्रसव जैसी स्थितियों में संक्रमण से बचाव भी कठिन हो सकता है। WHO के अनुसार एंटीबायोटिक का गलत और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल इसकी बड़ी वजह है।
सही इस्तेमाल के नियम
- एंटीबायोटिक सिर्फ योग्य डॉक्टर के पर्चे पर लें
- डॉक्टर ने जितनी खुराक और जितने दिन बताए हैं, उसी का पालन करें
- आराम मिलने पर अपनी मर्जी से दवा बंद न करें, डॉक्टर से पूछें
- बची हुई दवा बाद के लिए न रखें और किसी और को न दें
- पिछली बार के पर्चे से खुद दोबारा दवा न खरीदें
- डॉक्टर से एंटीबायोटिक लिखने का दबाव न डालें
- किसी दवा से एलर्जी हो, तो डॉक्टर को जरूर बताएं
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दवा के पैकेट पर लाल लकीर
भारत में कुछ दवाओं के पैकेट पर लाल रंग की खड़ी लकीर होती है। स्वास्थ्य मंत्रालय के जागरूकता अभियान के अनुसार इसका मतलब है कि यह दवा केवल डॉक्टर के पर्चे पर ही बेची और ली जानी चाहिए। कई एंटीबायोटिक इसी श्रेणी में आती हैं। लाल लकीर वाली दवा बिना पर्चे के न खरीदें।
संक्रमण से बचाव भी जरूरी
जितने कम संक्रमण होंगे, उतनी कम एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए साबुन से हाथ धोना, साफ पानी और ताजा भोजन, समय पर टीकाकरण और खांसते-छींकते समय मुंह ढकना जैसे उपाय अपनाएं। पशुपालन और खेती में भी एंटीबायोटिक का बेवजह इस्तेमाल दवा-प्रतिरोध बढ़ाता है, इसलिए पशु चिकित्सक की सलाह से ही दवा दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या हर बुखार में एंटीबायोटिक जरूरी है?
नहीं, कई बुखार वायरल होते हैं। जरूरत है या नहीं, यह डॉक्टर जांच के बाद तय करते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी लक्षण होने या इलाज शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): Antimicrobial resistance फैक्ट शीट। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।






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