नवंबर शुरू होते ही उत्तर भारत में सुबह-शाम की ठंड बढ़ने लगती है और अलमारी या संदूक से स्वेटर, शॉल, मफलर और कंबल निकल आते हैं। महीनों बंद रहने के बाद इन्हें एक बार धोना जरूरी हो जाता है। लेकिन ऊन नाजुक रेशा है। गर्म पानी, तेज डिटर्जेंट या जोर से रगड़ने पर स्वेटर सिकुड़ जाता है, उस पर रोएं यानी छोटी गोलियां बन जाती हैं और रंग फीका पड़ जाता है। थोड़ी सावधानी से ऊनी कपड़े सालों तक नए जैसे रह सकते हैं।
सबसे पहले लेबल पढ़ें
हर स्वेटर या शॉल के अंदर लगे लेबल पर धोने का तरीका लिखा होता है। ड्राई क्लीन ओनली लिखा हो, तो उसे घर पर न धोएं। पश्मीना, अंगोरा, कश्मीरी और भारी कढ़ाई वाली शॉल अक्सर ड्राई क्लीन के लिए होती हैं। हैंड वॉश या वूल साइकल लिखा हो, तो घर पर धो सकते हैं।

हाथ से धोने का सही तरीका
- बाल्टी में ठंडा या हल्का गुनगुना पानी लें, गर्म पानी बिल्कुल नहीं
- ऊनी कपड़ों के लिए बना हल्का लिक्विड डिटर्जेंट या माइल्ड शैम्पू की थोड़ी मात्रा घोलें
- कपड़े को उल्टा करके पानी में डुबोएं और 5 से 10 मिनट भीगने दें
- हल्के हाथ से दबाकर साफ करें, रगड़ें या ब्रश न करें
- साफ ठंडे पानी में दो बार खंगालें, ताकि डिटर्जेंट पूरी तरह निकल जाए
- आखिरी पानी में एक चम्मच सफेद सिरका डालने से ऊन मुलायम रहती है
निचोड़ने की गलती न करें
ऊनी कपड़े को मरोड़कर निचोड़ने से उसके रेशे खिंच जाते हैं और कपड़ा बेडौल हो जाता है। सही तरीका यह है कि धुले कपड़े को हल्का दबाकर पानी निकालें, फिर साफ सूखे तौलिये पर फैलाएं और तौलिये के साथ रोल कर दें। ऊपर से हल्का दबाने पर ज्यादातर पानी तौलिया सोख लेता है।
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मशीन में धोना हो तो
- मशीन में वूल या डेलिकेट मोड चुनें
- पानी का तापमान ठंडा या 30 डिग्री तक रखें
- स्पिन की रफ्तार सबसे कम रखें
- स्वेटर को उल्टा करके जालीदार लॉन्ड्री बैग में डालें
- ऊनी कपड़ों को जींस या भारी कपड़ों के साथ न धोएं
- ड्रायर का इस्तेमाल न करें, गर्मी से ऊन सिकुड़ जाती है
सुखाने के नियम
ऊनी कपड़े को कभी हैंगर पर या रस्सी पर लटकाकर न सुखाएं। गीली ऊन भारी होती है और लटकाने पर लंबी हो जाती है। उसे किसी समतल जगह पर, जैसे पलंग पर बिछे तौलिये या जाली वाले स्टैंड पर फैलाकर सुखाएं। सुखाते समय हाथ से उसका आकार ठीक कर दें। सीधी तेज धूप से रंग उड़ सकता है, इसलिए हवादार छांव बेहतर है।
रोएं या गोलियां कैसे हटाएं
पहनने और रगड़ से स्वेटर पर छोटी-छोटी गोलियां बन जाती हैं। इन्हें हाथ से नोचने पर कपड़ा पतला होता है। बाजार में मिलने वाला लिंट रिमूवर या फैब्रिक शेवर इसके लिए अच्छा है। घर पर नए डिस्पोजेबल रेजर को बहुत हल्के हाथ से एक ही दिशा में चलाकर भी गोलियां हटाई जा सकती हैं।
कंबल और रजाई का क्या करें
भारी ऊनी कंबल घर पर धोना मुश्किल होता है। हर साल धोने की जगह इन्हें तेज धूप में कुछ घंटे रखकर झाड़ देना काफी है। ज्यादा गंदा हो, तो ड्राई क्लीन कराएं। रजाई पर कवर चढ़ाकर रखें और कवर को नियमित धोते रहें।
बार-बार धोने की जरूरत नहीं
ऊन में प्राकृतिक रूप से गंध और दाग कुछ हद तक दूर रखने का गुण होता है। स्वेटर को हर बार पहनने के बाद धोने की जरूरत नहीं होती। पहनने के बाद उसे कुछ घंटे हवा में रखें। हल्का दाग हो, तो सिर्फ उतनी जगह गीले कपड़े से साफ कर लें। आम तौर पर कुछ बार पहनने के बाद धोना काफी होता है।
बच्चों और बुजुर्गों के ऊनी कपड़े
छोटे बच्चों की त्वचा नाजुक होती है, इसलिए उनके स्वेटर और टोपे धोते समय खुशबू वाले तेज डिटर्जेंट से बचें और खंगालने में खास ध्यान दें, ताकि साबुन का कोई अंश न रहे। बुजुर्गों के लिए हल्के और गर्म ऊनी कपड़े चुनें, जिन्हें पहनना-उतारना आसान हो। मोजे और दस्ताने रोज पसीना सोखते हैं, इसलिए इन्हें स्वेटर की तुलना में जल्दी धोना चाहिए। सिंथेटिक मिलावट वाले ऊनी कपड़े थोड़े मजबूत होते हैं, लेकिन इन पर भी गर्म पानी से बचना बेहतर है।
रखने का सही तरीका
सर्दी के बीच भी स्वेटर को हैंगर पर टांगने के बजाय तह करके रखें। मौसम खत्म होने पर धोकर पूरी तरह सुखाएं और फिर कपड़े के थैले में रखें। अलमारी में नीम की सूखी पत्तियां, लौंग या कपूर की पोटली रखने से कीड़े दूर रहते हैं। प्लास्टिक की थैलियों में बंद करने से नमी फंस सकती है।
क्या ऊनी कपड़ों पर इस्त्री कर सकते हैं
हां, लेकिन वूल सेटिंग पर और कपड़े के ऊपर एक पतला सूती कपड़ा रखकर। भाप वाली इस्त्री को थोड़ी दूरी से इस्तेमाल करने से सिलवटें आसानी से निकल जाती हैं।
सिकुड़ा स्वेटर ठीक हो सकता है क्या
थोड़ा सिकुड़ा हो, तो गुनगुने पानी में हेयर कंडीशनर घोलकर 20 मिनट भिगोएं, फिर हल्के हाथ से खींचकर आकार दें और समतल सुखाएं। ज्यादा सिकुड़ने पर पुराना आकार लौटना मुश्किल है।
स्रोत: वूलमार्क: ऊन की देखभाल





