भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीमों ने अहमदाबाद में आयोजित पहली कॉमनवेल्थ कबड्डी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। दोनों टीमों ने पूरे टूर्नामेंट में अपना दबदबा बनाए रखा और एक भी मैच नहीं हारने का गौरव प्राप्त किया। फाइनल मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका और युगांडा को बड़े अंतर से पराजित किया। यह भारत के लिए एक बड़ी खेल उपलब्धि है क्योंकि यह इस चैम्पियनशिप का पहला संस्करण था।

अहमदाबाद में भारतीय पुरुष टीम का ऐतिहासिक प्रदर्शन
अहमदाबाद के मेजबान शहर में आयोजित इस प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में भारतीय पुरुष टीम का सामना श्रीलंका से हुआ। भारतीय टीम ने खेल के शुरुआती मिनटों से ही विपक्षी टीम पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था। मुकाबले के अंत तक भारत ने 54:20 के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। खेल के पहले हाफ में ही भारत ने 30:10 की मजबूत बढ़त बना ली थी, जिससे श्रीलंका के लिए वापसी के सभी रास्ते लगभग बंद हो गए थे। भारतीय टीम की इस जीत में रेडर्स और डिफेंडर्स दोनों का समान योगदान रहा। टीम ने पूरे मैच के दौरान कुल 30 रेड पॉइंट्स और 14 टैकल पॉइंट्स हासिल किए। भारत की रणनीतिक श्रेष्ठता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पूरे मैच में श्रीलंकाई टीम को चार बार ऑलआउट किया, जबकि भारतीय टीम एक बार भी ऑलआउट नहीं हुई।
पुरुष टीम के प्रमुख खिलाड़ियों का व्यक्तिगत योगदान
भारतीय पुरुष टीम की इस स्वर्णिम सफलता में आदित्य शिंदे ने मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने रेडिंग में बेहतरीन कौशल दिखाते हुए 10 रेड पॉइंट्स हासिल किए और अपना सुपर:10 पूरा किया। उनके साथ ही भरत हुड्डा ने भी रेडिंग में अपनी चमक बिखेरी और टीम के लिए आठ महत्वपूर्ण अंक जुटाए। डिफेंस के मोर्चे पर योगेश दहिया ने श्रीलंकाई रेडर्स को अंक लेने का कोई मौका नहीं दिया। योगेश ने शानदार टैकल करते हुए अपना हाई:5 पूरा किया, जो किसी भी डिफेंडर के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इन व्यक्तिगत प्रदर्शनों ने भारत को एकतरफा जीत दिलाने में मदद की।
सुरजीत सिंह नरवाल के नेतृत्व में अजेय सफर
भारतीय पुरुष टीम ने सुरजीत सिंह नरवाल की कप्तानी में इस पूरे टूर्नामेंट में असाधारण प्रदर्शन किया। टीम ने प्रतियोगिता के दौरान कुल आठ मुकाबले खेले और सभी में जीत हासिल की। ग्रुप चरण के दौरान भारत ने इंग्लैंड, युगांडा, मलेशिया, नाइजीरिया, तंजानिया और श्रीलंका जैसी टीमों को मात दी। ग्रुप स्तर पर अपनी बादशाहत कायम करने के बाद भारत ने सेमीफाइनल में प्रवेश किया। सेमीफाइनल मुकाबले में भारत का सामना बांग्लादेश से हुआ, जहां भारतीय टीम ने 56:27 के अंतर से जीत दर्ज कर फाइनल में अपनी जगह पक्की की थी। पूरे टूर्नामेंट में टीम का अपराजित रहना उनकी कड़ी मेहनत और बेहतर तालमेल को दर्शाता है।
भारतीय महिला टीम की शानदार खिताबी जीत
पुरुष टीम की सफलता के साथ ही भारतीय महिला टीम ने भी फाइनल में स्वर्ण पदक जीतकर भारत की खुशी को दोगुना कर दिया। महिला वर्ग के फाइनल में भारत का मुकाबला युगांडा की टीम से था। भारतीय महिलाओं ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और युगांडा को संभलने का मौका नहीं दिया। भारत ने यह मुकाबला 35:15 के स्कोर से अपने नाम किया। पहले हाफ की समाप्ति तक भारत 22:7 से आगे था, जिसने जीत की नींव रख दी थी। भारतीय महिला टीम ने मैच के दौरान युगांडा को दो बार ऑलआउट किया। रेडिंग में साक्षी ने सबसे अधिक प्रभाव डाला और नौ रेड पॉइंट्स हासिल किए। अनु ने छह अंक और कप्तान निधि शर्मा ने पांच अंक जोड़कर टीम की जीत सुनिश्चित की।
महिला टीम का रक्षात्मक प्रदर्शन और टूर्नामेंट का रिकॉर्ड
डिफेंस में ऋतु और सुमन ने भारतीय महिला टीम के लिए दीवार की तरह काम किया। दोनों खिलाड़ियों ने चार:चार टैकल पॉइंट्स हासिल किए, जिससे युगांडा के रेडर्स अंक जुटाने के लिए संघर्ष करते नजर आए। पूरे टूर्नामेंट की बात करें तो साक्षी का प्रदर्शन सबसे उत्कृष्ट रहा। उन्होंने टूर्नामेंट के छह मैचों में कुल 52 अंक जुटाए, जो उनकी निरंतरता को दर्शाता है। भारतीय महिला टीम ने भी अपने अभियान को बिना किसी हार के समाप्त किया। पहली बार आयोजित हुई इस कॉमनवेल्थ कबड्डी चैम्पियनशिप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी को एक नया मंच प्रदान किया है और अहमदाबाद ने इसकी सफल मेजबानी कर एक मिसाल पेश की है।
स्रोत: Aaj Tak





