स्ट्रोक, जिसे आम बोलचाल में लकवा या ब्रेन अटैक भी कहा जाता है, एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें दिमाग के किसी हिस्से तक खून का बहाव रुक जाता है या दिमाग की कोई नस फट जाती है। खून और ऑक्सीजन न मिलने से दिमाग की कोशिकाएं तेजी से नष्ट होने लगती हैं। इसलिए स्ट्रोक में समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है। जानिए स्ट्रोक के लक्षण कैसे पहचानें।
स्ट्रोक कितने प्रकार का होता है
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक (NINDS) के अनुसार स्ट्रोक मुख्य रूप से दो तरह का होता है। इस्कीमिक स्ट्रोक में खून का थक्का दिमाग की नस को रोक देता है। यह सबसे आम प्रकार है। हेमरेजिक स्ट्रोक में दिमाग की कोई नस फट जाती है और खून बहने लगता है। कई बार कुछ मिनटों के लिए स्ट्रोक जैसे लक्षण आकर चले जाते हैं, जिसे मिनी स्ट्रोक या TIA कहते हैं। इसे भी चेतावनी मानकर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

BE FAST: लक्षण पहचानने का आसान तरीका
स्ट्रोक के लक्षण याद रखने के लिए डॉक्टर BE FAST तरीका बताते हैं:
- B (बैलेंस): अचानक चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना
- E (आंखें): अचानक एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखना या दिखना बंद होना
- F (फेस): मुस्कुराने को कहें, चेहरा एक तरफ झुका दिखे
- A (आर्म): दोनों हाथ उठाने को कहें, एक हाथ नीचे गिरे या कमजोर लगे
- S (स्पीच): बोलने में लड़खड़ाहट या बात समझने में दिक्कत
- T (टाइम): इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो बिना देर किए अस्पताल पहुंचें
अचानक बहुत तेज सिरदर्द भी स्ट्रोक का संकेत हो सकता है, खासकर हेमरेजिक स्ट्रोक में।
तुरंत क्या करें
लक्षण दिखते ही एम्बुलेंस के लिए 112 या 108 पर कॉल करें और ऐसे अस्पताल जाएं, जहां स्ट्रोक के इलाज और सीटी स्कैन की सुविधा हो। लक्षण शुरू होने का समय नोट करें, क्योंकि इलाज का फैसला इसी पर निर्भर करता है। थक्के वाले स्ट्रोक में थक्का घोलने वाली दवा या दूसरी प्रक्रिया लक्षण शुरू होने के कुछ ही घंटों में ज्यादा असरदार होती है। मरीज को खाने-पीने को कुछ न दें, क्योंकि निगलने में दिक्कत हो सकती है। घरेलू नुस्खों या झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें।
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किन लोगों को ज्यादा खतरा
WHO के अनुसार दिल और नसों की बीमारियों, जिनमें स्ट्रोक शामिल है, के बड़े जोखिम कारक हैं: हाई ब्लड प्रेशर, तंबाकू सेवन, असंतुलित भोजन, शारीरिक निष्क्रियता और शराब का ज्यादा सेवन। डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और दिल की धड़कन की कुछ बीमारियां भी खतरा बढ़ाती हैं। बढ़ती उम्र और परिवार में स्ट्रोक का इतिहास भी जोखिम बढ़ाते हैं।
बचाव के उपाय
ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं और डॉक्टर की बताई दवा समय पर लें। तंबाकू और धूम्रपान छोड़ें, नमक कम करें, फल-सब्जियां ज्यादा खाएं और रोज शारीरिक गतिविधि करें। जिन्हें पहले TIA या स्ट्रोक हो चुका है, उन्हें डॉक्टर के साथ नियमित फॉलो-अप करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या स्ट्रोक युवाओं को भी हो सकता है?
हां, यह किसी भी उम्र में हो सकता है, हालांकि उम्र के साथ खतरा बढ़ता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी लक्षण होने या इलाज शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): Cardiovascular diseases फैक्ट शीट, अमेरिका का NINDS (नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ): Stroke। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





