Core Diabetes Tests: डायबिटीज को लाइफस्टाइल से जुड़ी ऐसी बीमारी बताया जाता है जो शरीर के कई अंगों पर असर डालती है। पुणे स्थित इनामदार मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट और जनरल फिजिशियन डॉ. शालिनी सिंह सालुंखे कहती हैं कि इस बीमारी के मरीजों को कुछ जांच जरूर करानी चाहिए। उन्होंने किडनी की सफाई क्षमता देखने के लिए सीरम क्रिएटिनिन और ईजीएफआर का जिक्र किया।

पेशाब में प्रोटीन रिसने का पता लगाने के लिए यूरिन एल्ब्यूमिन क्रिएटिनिन रेश्यो बताया। उच्च शुगर के साथ बढ़े एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल से दिल और रक्त वाहिकाओं को नुकसान हो सकता है, इसलिए लिपिड प्रोफाइल कराने को कहा।

लिवर के लिए खास तौर पर एसजीओटी और एसजीपीटी समेत लिवर फंक्शन टेस्ट का सुझाव दिया। बढ़े हुए आंकड़े लिवर में नुकसान का संकेत हो सकते हैं। ये सुझाव डॉक्टर के बयान पर आधारित हैं। व्यक्तिगत इलाज और जांच की आवृत्ति अपने चिकित्सक से तय करें।

Core Diabetes Tests: डॉक्टर ने क्यों बताए ये टेस्ट

डॉ. सालुंखे के अनुसार डायबिटीज केवल शुगर का आंकड़ा नहीं रह जाती। यह कई अंगों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए नियमित ब्लड शुगर के अलावा किडनी, हृदय जोखिम और लिवर की निगरानी जरूरी बताई गई। पुणे की चिकित्सक ने इन्हीं चार समूहों पर जोर दिया। सूची आधिकारिक प्रोटोकॉल का पूर्ण दस्तावेज नहीं, उनके सुझाव का सार है।

सीरम क्रिएटिनिन क्या देखता है

उन्होंने सीरम क्रिएटिनिन कराने की सलाह दी। यह जांच बताती है कि किडनियां खून को कितनी अच्छी तरह साफ कर रही हैं। डायबिटीज में किडनी पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए यह आंकड़ा निगरानी का हिस्सा माना गया। रिपोर्ट का अर्थ डॉक्टर ही समझाएं।

Core Diabetes Tests: ईजीएफआर से किडनी की क्षमता

सीरम क्रिएटिनिन के साथ ईजीएफआर का टेस्ट भी बताया गया। ईजीएफआर से पता चलता है कि गुर्दे रक्त को कितनी कुशलता से छान रहे हैं। दोनों जांच किडनी के कामकाज से जुड़ी हैं। डॉक्टर ने इन्हें डायबिटीज वाले मरीजों के लिए जरूरी बताया। स्वयं व्याख्या न करें।

यूरिन एसीआर से प्रोटीन की जांच

यूरिन एल्ब्यूमिन क्रिएटिनिन रेश्यो से किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है, यह देखा जाता है। इस टेस्ट में पता चलता है कि गुर्दे खून साफ कर रहे हैं या नहीं और पेशाब में प्रोटीन बाहर आ रहा है या नहीं। प्रोटीन रिसना किडनी तनाव का संकेत हो सकता है। डॉक्टर ने इसे कराने पर जोर दिया।

Core Diabetes Tests: लिपिड प्रोफाइल क्यों शामिल

बढ़े ब्लड शुगर के साथ अगर एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ा हो तो दिल और रक्त नलियों को नुकसान हो सकता है। इसलिए लिपिड प्रोफाइल कराने को कहा गया। यह जांच कोलेस्ट्रॉल पैटर्न दिखाती है। हृदय जोखिम समझने में चिकित्सक इसकी मदद लेते हैं। दवा या आहार का फैसला रिपोर्ट के बिना न लें।

लिवर फंक्शन और एसजीओटी एसजीपीटी

डायबिटीज में लिवर फंक्शन टेस्ट कराने की सलाह दी गई। खास तौर पर एसजीओटी और एसजीपीटी का जिक्र है। अगर ये बढ़े हों तो लिवर में नुकसान हो सकता है, ऐसा डॉक्टर ने बताया। लिवर एंजाइम अकेले निदान नहीं होते। आगे की जांच चिकित्सक तय करते हैं।

ये सूची इलाज नहीं, निगरानी का हिस्सा

उल्लिखित टेस्ट बीमारी का इलाज नहीं हैं। ये अंगों की स्थिति जानने के औजार हैं। डॉ. सालुंखे ने इन्हें जरूर कराने लायक बताया। कितनी बार कराना है, यह स्रोत में नहीं लिखा। मरीज अपनी रिपोर्ट लेकर उसी अस्पताल या अपने डॉक्टर से सलाह लें।

Core Diabetes Tests: व्यक्तिगत स्थिति अलग हो सकती है

हर मरीज की आयु, दवाएं और अन्य बीमारियां अलग होती हैं। एक चिकित्सक का सुझाव सामान्य दिशा देता है। अंतिम जांच सूची केस के हिसाब से बदल सकती है। स्वयं दवा बंद-शुरू न करें। प्रयोगशाला की सामान्य सीमाएं रिपोर्ट पर छपी होती हैं।

पुणे की इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. शालिनी सिंह सालुंखे कहती हैं कि डायबिटीज के मरीजों को सीरम क्रिएटिनिन और ईजीएफआर से किडनी की सफाई क्षमता देखनी चाहिए। यूरिन एल्ब्यूमिन क्रिएटिनिन रेश्यो पेशाब में प्रोटीन और गुर्दे के कामकाज की जानकारी देता है।

लिपिड प्रोफाइल बढ़े शुगर के साथ खराब कोलेस्ट्रॉल से दिल और नलियों के जोखिम समझने में मदद करता है। लिवर के लिए एसजीओटी-एसजीपीटी समेत फंक्शन टेस्ट सुझाए गए हैं। ये सुझाव सामान्य जागरूकता के लिए हैं। जांच की जरूरत, समय और इलाज अपने डॉक्टर से तय करें।

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