Bihar Dalit Politics: बिहार में दलित राजनीति के दो प्रमुख चेहरों चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच सियासी दूरी साफ दिख रही है। पिछले महीने आरक्षण में उप-वर्गीकरण यानी कोटे के अंदर कोटा को लेकर दोनों के बीच खुली बहस हुई। भाजपा के हस्तक्षेप के बाद यह विवाद फिलहाल शांत बताया गया, लेकिन दोनों एक बार फिर आमने-सामने आए।
भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में भी रुख अलग रहा। चिराग पासवान ने पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए सरकार पर दबाव बनाने की बात कही। मांझी ने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया और कहा कि 28 वर्षीय तिवारी के पास बिना लाइसेंस का हथियार था।
तिवारी 17 जून को पुलिस से तीखी बहस के बाद हुई कार्रवाई में मारे गए थे। राजनीतिक जानकारों के हवाले से कहा गया है कि यह टकराव दलित नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा से भी जुड़ा है। दोनों अनुसूचित जाति के अलग-अलग सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
Bihar Dalit Politics: कई मुद्दों पर पहले भी रहा अंतर
यह पहली बार नहीं है जब दोनों नेताओं के रुख अलग दिखे हों। इससे पहले भी कुछ मौकों पर उन्होंने एक-दूसरे से भिन्न राय रखी है। अलग-अलग मुद्दों पर अलग बयान देकर दोनों अपने सामाजिक आधार को संबोधित करते दिखते हैं। एनडीए के अंदर अधिक प्रभावशाली दलित चेहरा कौन, यह सवाल भी चर्चा में रहता है। पिछले महीने उप-कोटा पर दोनों सबसे मुखर रहे।
भाजपा ने एक पक्ष का साथ नहीं दिया
उप-वर्गीकरण के विवाद में भाजपा ने रणनीतिक रूप से किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया। दलितों के भीतर उप-कोटा के सवाल पर पार्टी ने दूरी बनाए रखी, ऐसा स्रोत में कहा गया है। विवाद शांत पड़ने का श्रेय इसी हस्तक्षेप को दिया जा रहा है। गठबंधन के अंदर संतुलन बनाए रखने की कोशिश दिखी। मुद्दा कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील है।
Bihar Dalit Politics: मांझी और सुमन की उप-कोटा मांग
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी मुसहर समुदाय से आते हैं। वे लंबे समय से अनुसूचित जाति के भीतर अधिक वंचित वर्गों के लिए अलग उप-कोटा की मांग करते रहे हैं। उनके बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने भी आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा मांगी है। तर्क यह है कि आजादी के करीब आठ दशक बाद यह देखना जरूरी है कि लाभ किन वर्गों तक पहुंचा और कौन वंचित रहे।
आरक्षण के खिलाफ नहीं, दायरा बढ़ाने की बात
मांझी और संतोष सुमन का कहना है कि वे आरक्षण के विरोधी नहीं हैं। उनका जोर या तो आरक्षण का दायरा बढ़ाने पर है या उन वर्गों के लिए अलग व्यवस्था करने पर जिन्हें पर्याप्त लाभ नहीं मिला। यह उनकी सार्वजनिक स्थिति है। उप-वर्गीकरण को वे न्यायसंगत वितरण से जोड़ते हैं। चिराग पासवान इस व्याख्या से सहमत नहीं दिखे।
Bihar Dalit Politics: चिराग पासवान का क्रीमी लेयर विरोध
चिराग पासवान ने अनुसूचित जाति और जनजाति आरक्षण में क्रीमी लेयर लगाने की मांग का विरोध किया है। उनका तर्क है कि आरक्षण आर्थिक आधार पर नहीं दिया गया। यह सदियों के सामाजिक भेदभाव, बहिष्कार और छुआछूत जैसी समस्याओं के समाधान के लिए है। इसी बिंदु पर मांझी परिवार से तीखा मतभेद सामने आया। दोनों तर्क अलग सामाजिक अनुभव से जुड़े हैं।
तेजस्वी यादव का भाजपा पर आरोप
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया कि पर्दे के पीछे से वह इस बहस को हवा दे रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी लोगों का मूड भांपने के लिए ऐसी चर्चा सामने लाती है। मांझी और पासवान को उन्होंने राजनीतिक किरदार बताया तथा आरोप लगाया कि ध्यान पद और सत्ता पर ज्यादा है। यह विपक्ष का आरोप है, भाजपा का जवाब स्रोत में नहीं है।
Bihar Dalit Politics: सुप्रीम कोर्ट का अगस्त 2024 फैसला
विवाद की पृष्ठभूमि में अगस्त 2024 का सुप्रीम कोर्ट फैसला है। छह-एक के बहुमत से अदालत ने राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति दी। उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन और सरकारी नौकरियों में कम प्रतिनिधित्व के आधार पर अधिक वंचित वर्गों तक लाभ पहुंचाना था। केंद्र और राज्यों से क्रीमी लेयर के मानदंड पर विचार करने को भी कहा गया।
ईवी चिन्नैया फैसला पलटा गया
इसी फैसले के साथ 2004 के ईवी चिन्नैया मामले में पांच न्यायाधीशों की पीठ का निर्णय पलट दिया गया। उस पुराने फैसले में अनुसूचित जातियों को समरूप समूह माना गया था और राज्यों को उप-वर्गीकरण का अधिकार नहीं दिया गया था। नया फैसला राज्यों को नीति बनाने की गुंजाइश देता है। बिहार में इसी कानूनी बदलाव के बाद राजनीतिक बहस तेज हुई।
रोहिणी आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं
ओबीसी के भीतर आरक्षण लाभ के असमान वितरण की जांच के लिए केंद्र ने अक्टूबर 2017 में न्यायमूर्ति जी. रोहिणी की अध्यक्षता में आयोग बनाया था। आयोग का काम उप-वर्गीकरण के वैज्ञानिक आधार और मानदंड तैयार करना था। रिपोर्ट 21 जुलाई 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी गई। अब तक यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। एससी उप-कोटा बहस इससे अलग लेकिन समान दिशा की चर्चा है।
Bihar Dalit Politics: भरत तिवारी मामले में दो विपरीत बयान
भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर पर चिराग पासवान ने शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मांझी ने कहा कि तिवारी के पास बिना लाइसेंस का हथियार था और पुलिस कार्रवाई सही थी। तिवारी स्वयं को सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता बताते थे। 17 जून की बहस के बाद हुई कार्रवाई में उनकी मौत हुई। जांच और आधिकारिक निष्कर्ष स्रोत में विस्तार से नहीं दिए गए।
चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच कोटे के अंदर कोटा तथा भरत तिवारी मामले पर मतभेद साफ हैं। मांझी-सुमन उप-कोटा और समीक्षा की बात करते हैं, चिराग क्रीमी लेयर और आर्थिक आधार का विरोध करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में राज्यों को एससी उप-वर्गीकरण की अनुमति दी और पुराना चिन्नैया फैसला पलटा। भाजपा ने किसी एक पक्ष का खुलकर साथ नहीं दिया।
तेजस्वी यादव ने भाजपा पर बहस हवा देने का आरोप लगाया। एनडीए के भीतर दलित नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा के रूप में भी इसे देखा जा रहा है। आगे दोनों के रुख और गठबंधन का संतुलन तय करेगा कि बहस कितनी दूर जाती है।
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