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कितने घंटे की नींद जरूरी है: उम्र के हिसाब से जरूरत, कम नींद के असर और अच्छी नींद के आसान तरीके

उम्र के हिसाब से कितनी नींद चाहिए, कम नींद का सेहत पर असर, अच्छी नींद की आदतें और कब डॉक्टर से मिलें।

उम्र के हिसाब से जरूरी नींद के घंटे बताने वाला ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • देर रात तक मोबाइल चलाना, काम का दबाव और अनियमित दिनचर्या, इन सबका सबसे पहला असर नींद पर पड़ता है।
  • यह एक सामान्य मार्गदर्शन है। हर व्यक्ति की जरूरत थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन सुबह उठकर तरोताजा महसूस होना अच्छी नींद का सबसे आसान संकेत है।
  • शराब से भले जल्दी नींद आए, लेकिन यह रात में नींद की गुणवत्ता खराब कर सकती है।
  • कुछ हद तक आराम मिल सकता है, लेकिन विशेषज्ञ रोज नियमित और पर्याप्त नींद को ही बेहतर मानते हैं।

देर रात तक मोबाइल चलाना, काम का दबाव और अनियमित दिनचर्या, इन सबका सबसे पहला असर नींद पर पड़ता है। कई लोग कम नींद को मेहनत की निशानी मान लेते हैं, जबकि अच्छी नींद शरीर और दिमाग दोनों के लिए उतनी ही जरूरी है, जितना भोजन और व्यायाम। सवाल है कि आखिर कितने घंटे की नींद जरूरी है। जानिए विशेषज्ञ संस्थाएं क्या कहती हैं।

उम्र के हिसाब से कितनी नींद चाहिए

अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने नींद विशेषज्ञ संस्थाओं की सिफारिशों के आधार पर उम्र के हिसाब से जरूरी नींद बताई है:

  • 4 से 12 महीने के शिशु: 12 से 16 घंटे, दिन की झपकी समेत
  • 1 से 2 साल: 11 से 14 घंटे, झपकी समेत
  • 3 से 5 साल: 10 से 13 घंटे, झपकी समेत
  • 6 से 12 साल: 9 से 12 घंटे
  • 13 से 18 साल: 8 से 10 घंटे
  • 18 साल से ऊपर के वयस्क: 7 घंटे या ज्यादा

यह एक सामान्य मार्गदर्शन है। हर व्यक्ति की जरूरत थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन सुबह उठकर तरोताजा महसूस होना अच्छी नींद का सबसे आसान संकेत है।

मुख्य बातें: उम्र के हिसाब से जरूरी नींद के घंटे बताने वाला ग्राफिक
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कम नींद का सेहत पर असर

अमेरिका के नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI) के अनुसार लगातार कम नींद से ध्यान लगाने, फैसले लेने और याददाश्त पर बुरा असर पड़ता है। लंबे समय तक नींद की कमी को दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और अवसाद जैसी समस्याओं के बढ़े खतरे से जोड़ा गया है। नींद की कमी से गाड़ी चलाते समय झपकी आने और दुर्घटना का खतरा भी बढ़ता है। बच्चों में कम नींद पढ़ाई, व्यवहार और विकास पर असर डाल सकती है।

अच्छी नींद के आसान तरीके

  • रोज एक ही समय पर सोएं और जागें, छुट्टी के दिन भी
  • सोने से कम से कम आधा-एक घंटा पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप से दूरी बनाएं
  • शाम के बाद चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक जैसे कैफीन वाले पेय कम करें
  • रात का खाना सोने से कुछ समय पहले और हल्का रखें
  • सोने का कमरा शांत, अंधेरा और आरामदायक तापमान वाला हो
  • दिन में शारीरिक गतिविधि करें, पर सोने के ठीक पहले भारी व्यायाम से बचें
  • दिन की झपकी छोटी रखें, ताकि रात की नींद पर असर न पड़े

शराब से भले जल्दी नींद आए, लेकिन यह रात में नींद की गुणवत्ता खराब कर सकती है।

यह भी पढ़ें: BMI कैसे निकालें: लंबाई और वजन से सेहतमंद वजन का अंदाजा, WHO की श्रेणियां और भारतीयों के लिए सावधानी | हाई ब्लड प्रेशर: किसे ज्यादा खतरा, जांच कब कराएं और WHO के अनुसार नमक व व्यायाम से जुड़ी सलाह

कब डॉक्टर से मिलें

अगर कई हफ्तों से नींद नहीं आ रही, रात में बार-बार आंख खुलती है या पूरी नींद के बाद भी दिन भर थकान और झपकी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लें। तेज खर्राटे, सोते समय सांस रुकने जैसा महसूस होना या हांफकर जागना स्लीप एप्निया का संकेत हो सकता है, जिसकी जांच जरूरी है। नींद की गोलियां खुद से शुरू न करें, क्योंकि इनकी आदत और दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या हफ्ते भर की कम नींद रविवार को पूरी हो सकती है?

कुछ हद तक आराम मिल सकता है, लेकिन विशेषज्ञ रोज नियमित और पर्याप्त नींद को ही बेहतर मानते हैं।

क्या दोपहर की झपकी अच्छी है?

छोटी झपकी कई लोगों को तरोताजा करती है, पर लंबी झपकी से रात की नींद बिगड़ सकती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी लक्षण होने या इलाज शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

स्रोत: अमेरिका का सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC): About Sleep, अमेरिका का नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI): Sleep Deprivation। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

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लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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