पढ़ाई, ऑफिस का काम, मनोरंजन और बातचीत, सब कुछ अब मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन पर होता है। दिन भर स्क्रीन देखने के बाद आंखों में जलन, भारीपन या सिरदर्द होना आम शिकायत बन गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया में बड़ी संख्या में लोगों की दृष्टि की समस्या ऐसी है, जिसे रोका जा सकता था या जिसका इलाज अभी तक नहीं हुआ है, जैसे सही चश्मा न लगना। जानिए आंखों की देखभाल कैसे करें।
स्क्रीन से आंखों पर क्या असर होता है
लगातार स्क्रीन देखने पर हम सामान्य से कम पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखें सूखने लगती हैं। पास की चीज पर लंबे समय तक नजर टिकाने से आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं। इससे आंखों में जलन, लालपन, धुंधलापन, सिरदर्द और गर्दन-कंधे में दर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसे अक्सर डिजिटल आई स्ट्रेन कहा जाता है। ये परेशानियां ज्यादातर अस्थायी होती हैं और सही आदतों से कम हो सकती हैं।

20-20-20 नियम
आंखों को आराम देने के लिए 20-20-20 नियम एक आसान और लोकप्रिय तरीका है। इसमें हर 20 मिनट पर लगभग 20 सेकंड के लिए करीब 20 फीट दूर किसी चीज को देखा जाता है। इससे पास की चीज पर लगातार टिकी नजर को आराम मिलता है। इसके साथ ही बीच-बीच में जानबूझकर पलकें झपकाने की आदत डालें।
स्क्रीन इस्तेमाल करने का सही तरीका
- लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन आंखों से लगभग एक हाथ की दूरी पर और आंखों के स्तर से थोड़ा नीचे रखें
- कमरे में पर्याप्त रोशनी रखें, अंधेरे कमरे में तेज स्क्रीन देखने से बचें
- स्क्रीन की चमक आसपास की रोशनी के अनुसार रखें और अक्षर इतने बड़े रखें कि आंखें सिकोड़नी न पड़ें
- खिड़की या बल्ब की चमक सीधे स्क्रीन पर न पड़े
- सोने से ठीक पहले देर तक मोबाइल देखने से बचें, इससे नींद पर भी असर पड़ता है
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बच्चों की आंखों का ध्यान
बच्चों में पास की चीजें ज्यादा देर देखने और बाहर कम खेलने को कमजोर दूर की नजर यानी मायोपिया के बढ़ते मामलों से जोड़ा जाता है। रोज कुछ समय दिन की रोशनी में बाहर खेलना बच्चों की आंखों के लिए फायदेमंद माना जाता है। अगर बच्चा किताब बहुत पास रखकर पढ़ता है, टीवी के बहुत पास बैठता है, आंखें मलता है या बोर्ड पर लिखा पढ़ने में दिक्कत बताता है, तो आंखों की जांच कराएं।
आंखों की जांच कब कराएं
धुंधला दिखना, बार-बार सिरदर्द, रात में देखने में परेशानी, आंखों में दर्द या लालपन जो ठीक न हो, या अचानक नजर कमजोर होना, इन सब में आंखों के डॉक्टर से जांच कराएं। WHO के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और डायबिटीज से जुड़ी आंखों की बीमारियों का खतरा बढ़ता है, इसलिए 40 की उम्र के बाद और डायबिटीज के मरीजों को नियमित आंखों की जांच करानी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप, खासकर स्टेरॉयड वाले ड्रॉप, इस्तेमाल न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ब्लू लाइट वाले चश्मे जरूरी हैं?
आंखों की थकान कम करने में ब्रेक, सही दूरी और रोशनी ज्यादा अहम हैं। चश्मे की जरूरत डॉक्टर से जांच के बाद तय करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी लक्षण होने या इलाज शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): Blindness and vision impairment। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





