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धनिया की खेती: रबी में बीज मसाले के लिए बुवाई का सही समय, बीज को दो भाग में तोड़ने का तरीका, सिंचाई और स्टेम गॉल से बचाव

राजस्थान और मध्य प्रदेश के किसानों के लिए धनिया एक अहम नकदी फसल है। सही तकनीक से इसकी उपज और गुणवत्ता दोनों बढ़ सकती हैं।

खेत में सफेद फूलों वाली धनिया की फसल का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • धनिया भारत की रसोई का सबसे आम मसाला है। इसकी हरी पत्तियां सब्जियों में डाली जाती हैं और सूखे बीज मसाले के रूप में इस्तेमाल होते हैं।
  • धनिया का एक दाना असल में दो बीजों से मिलकर बना होता है। बुवाई से पहले दानों को हल्के हाथ से रगड़कर या दबाकर दो हिस्सों में तोड़ लिया जाता है।
  • धनिया को हल्की और नियमित सिंचाई की जरूरत होती है। पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद या अंकुरण के बाद करें।
  • राजस्थान की रामगंज मंडी देश की सबसे बड़ी धनिया मंडियों में गिनी जाती है।

धनिया भारत की रसोई का सबसे आम मसाला है। इसकी हरी पत्तियां सब्जियों में डाली जाती हैं और सूखे बीज मसाले के रूप में इस्तेमाल होते हैं। भारत दुनिया में धनिया का बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। बीज मसाले के लिए धनिया की खेती मुख्य रूप से रबी मौसम में होती है। राजस्थान का हाड़ौती इलाका, यानी कोटा, बारां, बूंदी और झालावाड़, साथ ही मध्य प्रदेश और गुजरात इसके बड़े उत्पादक इलाके हैं। इस लेख में जानिए बीज के लिए धनिया की खेती का पूरा तरीका।

जलवायु और मिट्टी

धनिया ठंडे और सूखे मौसम की फसल है। फूल आने और दाना बनने के समय ज्यादा ठंड, पाला या बादल वाला मौसम नुकसान कर सकता है। इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या काली मिट्टी अच्छी रहती है। खेत की दो से तीन जुताई कर मिट्टी भुरभुरी बना लें और पाटा लगाएं। आखिरी जुताई से पहले सड़ी गोबर की खाद मिलाना फायदेमंद है।

मुख्य बातें: खेत में सफेद फूलों वाली धनिया की फसल का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

बुवाई का सही समय

बीज के लिए धनिया की बुवाई आम तौर पर मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर तक की जाती है। बहुत जल्दी बोने पर गर्मी के कारण अंकुरण कम होता है और देर से बोने पर फसल पाले की चपेट में आ सकती है। अपने इलाके के मौसम के अनुसार कृषि विज्ञान केंद्र से सही समय की सलाह लें।

बीज तैयार करना

धनिया का एक दाना असल में दो बीजों से मिलकर बना होता है। बुवाई से पहले दानों को हल्के हाथ से रगड़कर या दबाकर दो हिस्सों में तोड़ लिया जाता है। ध्यान रखें कि बीज पिसे नहीं। टूटे हुए बीज जल्दी और बेहतर अंकुरित होते हैं। बुवाई से पहले बीज को कुछ घंटे पानी में भिगोना और फिर छाया में सुखाना भी अंकुरण में मदद करता है। रोगों से बचाव के लिए कृषि विभाग की सलाह के अनुसार बीज उपचार करें।

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बीज दर और दूरी

सिंचित खेती में आम तौर पर 15 से 20 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है। कतार से कतार की दूरी लगभग 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखें। बीज 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई पर बोएं। अंकुरण में आम तौर पर 10 से 15 दिन लगते हैं।

उन्नत किस्में

राजस्थान और दूसरे राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों और ICAR के राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र, अजमेर ने धनिया की कई उन्नत किस्में विकसित की हैं। राजस्थान में आरसीआर नाम से जानी जाने वाली कई किस्में लोकप्रिय हैं। किस्म चुनते समय उपज, दाने का आकार, तेल की मात्रा और रोग प्रतिरोध पर ध्यान दें।

सिंचाई

धनिया को हल्की और नियमित सिंचाई की जरूरत होती है। पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद या अंकुरण के बाद करें। इसके बाद मिट्टी की नमी के अनुसार 15 से 20 दिन के अंतर पर सिंचाई करें। फूल आने और दाना बनने के समय नमी की कमी नहीं होनी चाहिए। फव्वारा यानी स्प्रिंकलर सिंचाई से पानी की बचत होती है।

रोग और कीट

धनिया में स्टेम गॉल यानी तना पिटिका रोग एक बड़ी समस्या है, जिसमें तने और पत्तियों पर सूजन वाली गांठें बन जाती हैं। इसके अलावा उकठा यानी विल्ट और चूर्णिल आसिता यानी पाउडरी मिल्ड्यू भी लगते हैं। कीटों में माहू यानी एफिड प्रमुख है। रोगमुक्त बीज, बीज उपचार, फसल चक्र और सही समय पर बुवाई से इनका खतरा कम होता है। दवा का इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।

कटाई

फसल आम तौर पर 110 से 140 दिन में तैयार होती है। जब दाने हरे से हल्के भूरे या पीले होने लगें, तब कटाई करें। बहुत ज्यादा पकने पर दाने झड़ जाते हैं और रंग खराब हो जाता है। कटाई के बाद पौधों को छाया में सुखाना बेहतर है, ताकि दानों का प्राकृतिक हरा पीला रंग और खुशबू बनी रहे। रंग और चमक अच्छी हो तो मंडी में बेहतर दाम मिलता है।

मंडी और बाजार

राजस्थान की रामगंज मंडी देश की सबसे बड़ी धनिया मंडियों में गिनी जाती है। गुजरात और मध्य प्रदेश की मंडियों में भी धनिया की बड़ी खरीद होती है। धनिया के दाम घरेलू मांग, निर्यात और फसल के आकार पर निर्भर करते हैं। बेचने से पहले Agmarknet और e-NAM पर ताजा भाव देखें और दाने की सफाई और ग्रेडिंग पर ध्यान दें।

हरा धनिया या बीज धनिया

कई किसान बीज की फसल के साथ बीच बीच में हरी पत्तियों की एक कटाई भी ले लेते हैं। हालांकि ज्यादा कटाई से बीज की उपज घट सकती है। केवल हरी पत्तियों के लिए धनिया की बुवाई साल के ज्यादातर समय की जा सकती है और यह 30 से 45 दिन में तैयार हो जाती है। शहरों के पास के किसान हरे धनिये से अच्छी आमदनी कमाते हैं।

पाले से बचाव

दिसंबर और जनवरी में पाले की आशंका हो तो शाम को हल्की सिंचाई करें। खेत के किनारों पर धुआं करने का तरीका भी कुछ इलाकों में अपनाया जाता है। फूल और दाना बनने के समय पाला पड़ने से उपज पर सबसे ज्यादा असर होता है।

धनिया की बुवाई कब करें

मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर तक।

धनिया का बीज दर कितना है

लगभग 15 से 20 किलो प्रति हेक्टेयर।

बीज को तोड़कर क्यों बोते हैं

हर दाना दो बीजों से बना होता है, तोड़ने से अंकुरण बेहतर होता है।

धनिया की सबसे बड़ी मंडी कौन सी है

राजस्थान की रामगंज मंडी।

स्रोत: ICAR-राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र, अजमेर, Spices Board India, Agmarknet मंडी भाव

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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