नौकरी में लंबे समय तक काम करने के बदले कर्मचारी को नियोक्ता की ओर से एकमुश्त रकम मिलती है, जिसे ग्रेच्युटी कहा जाता है। यह रकम नौकरी छोड़ने, रिटायर होने या कर्मचारी के निधन या विकलांगता की स्थिति में मिलती है। लंबे समय तक यह व्यवस्था पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के तहत चलती थी। अब केंद्र सरकार के नए लेबर कोड, यानी सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, के लागू होने के बाद इसमें कुछ अहम बदलाव हुए हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के FAQ के अनुसार ग्रेच्युटी के नए प्रावधान 21 नवंबर 2025 से लागू हैं, जो संहिता लागू होने की तारीख है।
ग्रेच्युटी कब मिलती है
श्रम मंत्रालय के FAQ के मुताबिक ग्रेच्युटी इन स्थितियों में देय होती है:
- नौकरी समाप्त होने पर
- रिटायरमेंट यानी सेवानिवृत्ति की उम्र पूरी होने पर
- इस्तीफा देने पर
- दुर्घटना या बीमारी के कारण मृत्यु या विकलांगता होने पर
सामान्य तौर पर नियमित कर्मचारी को ग्रेच्युटी के लिए पांच साल की लगातार सेवा पूरी करनी होती है। लेकिन मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में पांच साल की शर्त लागू नहीं होती। मृत्यु होने पर ग्रेच्युटी की रकम नॉमिनी या कानूनी वारिसों को दी जाती है।

फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव
नए लेबर कोड का सबसे चर्चित बदलाव फिक्स्ड टर्म यानी तय अवधि के अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों से जुड़ा है। सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत ऐसे कर्मचारी अनुबंध के तहत एक साल की लगातार सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी के हकदार हो जाते हैं। श्रम मंत्रालय के FAQ के अनुसार फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को ग्रेच्युटी आनुपातिक यानी प्रो-राटा आधार पर दी जाती है। इसका मतलब है कि उन्हें पांच साल का इंतजार नहीं करना होगा। हालांकि सिर्फ 11 महीने के अनुबंध पर एक साल की शर्त पूरी नहीं होती।
ग्रेच्युटी कैसे कैलकुलेट होती है
श्रम मंत्रालय के FAQ के अनुसार हर पूरे साल की सेवा, या छह महीने से ज्यादा के हिस्से, के लिए आखिरी बार मिले वेतन के आधार पर 15 दिन का वेतन ग्रेच्युटी के रूप में मिलता है। मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए आम तौर पर यह फॉर्मूला इस्तेमाल होता है:
- ग्रेच्युटी = आखिरी वेतन × 15/26 × सेवा के पूरे साल
यहां 26 को महीने के कार्य दिवस माना जाता है। वेतन में आम तौर पर बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता शामिल होता है।
उदाहरण: अगर किसी कर्मचारी का आखिरी मासिक वेतन यानी बेसिक और महंगाई भत्ता मिलाकर 52,000 रुपये है और उसने 10 साल 7 महीने काम किया है, तो छह महीने से ज्यादा होने के कारण सेवा 11 साल मानी जाएगी। ग्रेच्युटी होगी 52,000 × 15/26 × 11 = 3,30,000 रुपये।
अगर सेवा 10 साल 5 महीने होती, तो छह महीने से कम होने के कारण इसे 10 साल गिना जाता और ग्रेच्युटी 3,00,000 रुपये बनती।
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वेतन की नई परिभाषा का असर
नए लेबर कोड में वेतन यानी वेजेज की परिभाषा भी बदली है। श्रम मंत्रालय के FAQ के मुताबिक अगर भत्ते कुल पारिश्रमिक के 50 प्रतिशत से ज्यादा हों, तो अतिरिक्त राशि वापस वेतन में जोड़ दी जाती है और इसे वैधानिक उद्देश्यों के लिए वेतन माना जाता है। इसका असर यह हो सकता है कि जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी कुल वेतन का छोटा हिस्सा थी, उनकी ग्रेच्युटी गणना का आधार बढ़ जाए।
अधिकतम सीमा कितनी है
श्रम मंत्रालय के FAQ के अनुसार ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा केंद्र सरकार अधिसूचित करती है, जो फिलहाल 20 लाख रुपये है। हालांकि अगर किसी कंपनी के अनुबंध या समझौते में कर्मचारी को इससे बेहतर लाभ दिया गया हो, तो वह लाभ मिल सकता है।
कुछ खास स्थितियां
श्रम मंत्रालय के FAQ में कुछ विशेष मामलों के लिए अलग नियम बताए गए हैं:
- पीस-रेट पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए दैनिक वेतन, नौकरी खत्म होने से पहले के तीन महीनों के कुल वेतन के औसत से निकाला जाता है, ओवरटाइम को छोड़कर।
- मौसमी कर्मचारियों को हर सीजन के लिए 7 दिन का वेतन मिलता है।
- फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों और दिवंगत कर्मचारियों के मामले में ग्रेच्युटी आनुपातिक आधार पर दी जाती है।
- अगर नॉमिनी नाबालिग है तो रकम उसके बालिग होने तक बैंक या वित्तीय संस्था में जमा रखी जा सकती है।
ग्रेच्युटी पाने के लिए क्या करें
नौकरी छोड़ते समय HR विभाग से ग्रेच्युटी का हिसाब लिखित में मांगें। यह जांचें कि आपकी सेवा अवधि और आखिरी वेतन सही दर्ज हैं। नॉमिनी की जानकारी समय रहते अपडेट रखें, ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार को दिक्कत न हो। अगर तय समय में ग्रेच्युटी न मिले या रकम पर विवाद हो, तो श्रम विभाग के संबंधित अधिकारी से शिकायत की जा सकती है।
टैक्स के बारे में
ग्रेच्युटी पर आयकर में छूट के नियम सरकारी और निजी कर्मचारियों के लिए अलग हैं और छूट की एक सीमा होती है। अपनी स्थिति के हिसाब से टैक्स देनदारी समझने के लिए आयकर विभाग की जानकारी देखें या टैक्स विशेषज्ञ से बात करें।
क्या 4 साल 7 महीने की नौकरी पर ग्रेच्युटी मिलेगी
नियमित कर्मचारियों के लिए आम तौर पर पांच साल की लगातार सेवा जरूरी है। इस बारे में अपनी कंपनी की नीति और ताजा नियम HR या श्रम विभाग से पुष्टि कर लें।
नया नियम कब से लागू है
श्रम मंत्रालय के FAQ के अनुसार ग्रेच्युटी के नए प्रावधान 21 नवंबर 2025 से लागू हैं।
सलाह लें: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। अपने मामले में सही गणना के लिए नियोक्ता के HR विभाग या किसी विशेषज्ञ से सलाह लें।
स्रोत: Ministry of Labour & Employment: FAQs on Labour Codes, PIB: Code on Social Security, 2020





