विटामिन डी शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है, क्योंकि यह भोजन से कैल्शियम सोखने में मदद करता है। कैल्शियम और विटामिन डी मिलकर हड्डियों और दांतों को मजबूत रखते हैं। धूप वाले देश में रहने के बावजूद कई लोगों में इसकी कमी पाई जाती है, क्योंकि ज्यादातर समय घर या दफ्तर के अंदर बीतता है। जानिए विटामिन डी की कमी के लक्षण और इसे पूरा करने के तरीके।
विटामिन डी शरीर में क्या काम करता है
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार विटामिन डी आंतों से कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। इसके बिना शरीर भोजन से पर्याप्त कैल्शियम नहीं ले पाता। यह मांसपेशियों, नसों और रोग प्रतिरोधक तंत्र के कामकाज में भी भूमिका निभाता है। लंबे समय तक कमी रहने पर बच्चों में रिकेट्स और बड़ों में ऑस्टियोमलेशिया जैसी हड्डियों की बीमारी हो सकती है, जिसमें हड्डियां नरम और कमजोर हो जाती हैं।

विटामिन डी की कमी के आम लक्षण
कई लोगों में शुरुआत में कोई साफ लक्षण नहीं दिखता। कमी बढ़ने पर ये संकेत दिख सकते हैं:
- हड्डियों या कमर में दर्द
- मांसपेशियों में कमजोरी या ऐंठन
- जल्दी थकान महसूस होना
- बच्चों में हड्डियों का टेढ़ा होना या विकास में देरी
ये लक्षण कई दूसरी समस्याओं में भी हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद से दवा शुरू न करें।
किन लोगों को ज्यादा खतरा
जो लोग बहुत कम धूप में निकलते हैं, बुजुर्ग, जिनका शरीर पूरी तरह ढका रहता है, गहरे रंग की त्वचा वाले, मोटापे से ग्रस्त लोग और कुछ आंत या किडनी की बीमारियों वाले मरीजों में कमी का खतरा ज्यादा होता है। सिर्फ मां के दूध पर निर्भर नवजात बच्चों के लिए डॉक्टर अलग से सलाह दे सकते हैं।
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धूप और भोजन से विटामिन डी कैसे मिले
त्वचा पर धूप पड़ने से शरीर खुद विटामिन डी बनाता है, इसलिए यह इसका सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है। कितनी देर धूप चाहिए, यह मौसम, जगह, समय और त्वचा के रंग पर निर्भर करता है, इसलिए कोई एक तय समय सब पर लागू नहीं होता। तेज धूप में देर तक रहने से त्वचा झुलस सकती है, इसलिए संतुलन रखें। भोजन में वसा वाली मछली, अंडे की जर्दी और कुछ मशरूम में विटामिन डी होता है। भारत में FSSAI ने दूध और खाद्य तेल जैसे उत्पादों को विटामिन डी से फोर्टिफाई करने के मानक तय किए हैं। ऐसे उत्पादों के पैकेट पर +F का निशान होता है।
जांच और सप्लीमेंट में सावधानी
विटामिन डी का स्तर खून की जांच से पता चलता है, जिसे 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन डी टेस्ट कहा जाता है। डॉक्टर लक्षण और जोखिम देखकर यह जांच कराने की सलाह देते हैं। NIH के अनुसार जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट लेने से खून में कैल्शियम बढ़ सकता है, जिससे उल्टी, कमजोरी और किडनी को नुकसान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए ऊंची खुराक वाली गोलियां या इंजेक्शन केवल डॉक्टर की सलाह पर और तय मात्रा में ही लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या शाकाहारी लोगों को विटामिन डी मिल सकता है?
हां, धूप, फोर्टिफाइड दूध और तेल, और कुछ मशरूम इसके स्रोत हैं। जरूरत होने पर डॉक्टर सप्लीमेंट बता सकते हैं।
क्या विटामिन डी की जांच हर साल करानी चाहिए?
यह व्यक्ति के जोखिम पर निर्भर करता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराएं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी लक्षण होने या इलाज शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
स्रोत: अमेरिका का नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH), ऑफिस ऑफ डाइटरी सप्लीमेंट्स: Vitamin D, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI): फोर्टिफाइड फूड। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





