अस्पताल में एक बार भर्ती होना भी परिवार की सालों की बचत पर भारी पड़ सकता है। हेल्थ इंश्योरेंस इसी जोखिम से बचाने का तरीका है। लेकिन कई लोग पॉलिसी लेते समय सिर्फ प्रीमियम देखते हैं और क्लेम के समय पता चलता है कि कई खर्च कवर ही नहीं थे। इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले उसकी कुछ जरूरी शर्तें समझना बेहद जरूरी है।
सम इंश्योर्ड कितना हो
सम इंश्योर्ड वह अधिकतम रकम है, जो बीमा कंपनी एक पॉलिसी वर्ष में इलाज के लिए देगी। इसे तय करते समय अपने शहर में इलाज का खर्च, परिवार के सदस्यों की संख्या और उम्र देखें। फैमिली फ्लोटर पॉलिसी में पूरे परिवार के लिए एक ही सम इंश्योर्ड होता है, जिसे कोई भी सदस्य इस्तेमाल कर सकता है। बुजुर्ग माता-पिता के लिए अलग पॉलिसी लेना कई बार बेहतर रहता है, ताकि पूरे परिवार का कवर एक ही व्यक्ति के इलाज में खत्म न हो जाए।

पॉलिसी की जरूरी शर्तें
- वेटिंग पीरियड: पहले से मौजूद बीमारियों और कुछ खास इलाज के लिए कवर एक तय समय बाद शुरू होता है
- रूम रेंट लिमिट: तय सीमा से महंगा कमरा लेने पर दूसरे खर्चों में भी कटौती हो सकती है
- को-पेमेंट: क्लेम का तय प्रतिशत हिस्सा आपको खुद देना होता है
- सब-लिमिट: कुछ बीमारियों या इलाज पर अलग से सीमा तय होती है
- अस्पताल में भर्ती से पहले और बाद का खर्च: कितने दिनों तक कवर है, यह देखें
- डे-केयर इलाज: ऐसे इलाज जिनमें 24 घंटे भर्ती की जरूरत नहीं होती
ये सभी शर्तें पॉलिसी दस्तावेज और उसके सार में लिखी होती हैं। एजेंट की बात के बजाय लिखित दस्तावेज पर भरोसा करें।
कैशलेस और रिइंबर्समेंट क्लेम
कैशलेस क्लेम में बीमा कंपनी के नेटवर्क अस्पताल में इलाज का भुगतान सीधे कंपनी या उसकी TPA करती है। इसके लिए अस्पताल के बीमा डेस्क पर पॉलिसी की जानकारी देनी होती है। नेटवर्क से बाहर के अस्पताल में इलाज होने पर पहले खुद भुगतान करना पड़ता है और बाद में बिल जमा करके रिइंबर्समेंट क्लेम किया जाता है। सभी बिल, रिपोर्ट और डिस्चार्ज समरी संभालकर रखें।
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सही जानकारी देना क्यों जरूरी
प्रस्ताव फॉर्म में अपनी और परिवार की पुरानी बीमारियों, दवाओं और धूम्रपान जैसी आदतों की सही जानकारी दें। जानकारी छिपाने पर बाद में क्लेम खारिज हो सकता है। पॉलिसी मिलने के बाद फ्री-लुक पीरियड में उसकी शर्तें पढ़ें। पसंद न आए तो इस अवधि में नियमों के अनुसार पॉलिसी लौटाई जा सकती है।
टैक्स लाभ और शिकायत
पुरानी टैक्स व्यवस्था में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर आयकर कानून की धारा 80D के तहत कटौती का लाभ मिलता है। क्लेम या सेवा से जुड़ी शिकायत पहले बीमा कंपनी के शिकायत अधिकारी के पास करें। समाधान न मिले, तो IRDAI के बीमा भरोसा पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है या बीमा लोकपाल से संपर्क किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कंपनी की ग्रुप पॉलिसी काफी है?
नौकरी बदलने या छूटने पर ग्रुप कवर खत्म हो सकता है, इसलिए एक निजी पॉलिसी रखना बेहतर माना जाता है।
स्रोत: बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI), IRDAI बीमा भरोसा शिकायत पोर्टल, बीमा लोकपाल परिषद। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





