ताज़ा खबर
What Is the IMF? How the International Monetary Fund Works, Quotas, Loans and India’s 1991 Crisis BREAKING: गुरुग्राम में प्रदूषण के कारण निर्माण कार्यों पर रोक और पचास प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम लागू EVM और VVPAT कैसे काम करते हैं: वोट डालने से गिनती तक पूरी प्रक्रिया, पर्ची 7 सेकंड क्यों दिखती है और कितनी पर्चियां गिनी जाती हैं BREAKING: चक्रवात मुरासु आंध्र तट के करीब, भारी बारिश और उड़ानों के रद्द होने से जनजीवन प्रभावित Kashi Vishwanath Temple Guide: History, the Dham Corridor, Aarti Timings and Online Booking ATM फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट: महीने में कितनी बार मुफ्त निकासी, उसके बाद कितना शुल्क और कैसे बचें BREAKING: आईसीसी वनडे रैंकिंग में अफगानिस्तान ने रचा इतिहास, इंग्लैंड और श्रीलंका को पछाड़कर छठा स्थान पाया What Is the SCO? Members, Aims and India’s Role in the Shanghai Cooperation Organisation
ट्रेंडिंग
राजनीति

EVM और VVPAT कैसे काम करते हैं: वोट डालने से गिनती तक पूरी प्रक्रिया, पर्ची 7 सेकंड क्यों दिखती है और कितनी पर्चियां गिनी जाती हैं

भारत में चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से होते हैं और साथ में VVPAT से पर्ची भी निकलती है। जानिए यह पूरी व्यवस्था कैसे काम करती है।

मतदान केंद्र पर EVM का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM से होते हैं।
  • दोनों एक केबल से जुड़ी होती हैं। EVM बैटरी से चलती है और इसे बिजली की जरूरत नहीं होती।
  • मतदान शुरू होने से पहले उम्मीदवारों के एजेंटों के सामने मॉक पोल यानी नकली मतदान कराया जाता है।
  • EVM को लेकर समय-समय पर राजनीतिक दल सवाल उठाते रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं भी दायर हुई हैं।

भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM से होते हैं। मतदाता बटन दबाता है, बीप की आवाज आती है और बगल में रखी VVPAT मशीन की खिड़की में एक पर्ची दिखती है। करोड़ों मतदाता हर चुनाव में यह प्रक्रिया अपनाते हैं, लेकिन EVM कैसे काम करती है, वोट कहां दर्ज होता है और गिनती कैसे होती है, इस पर कई सवाल रहते हैं। इस लेख में चुनाव आयोग की जानकारी के आधार पर पूरी प्रक्रिया समझिए।

EVM का इतिहास

चुनाव आयोग के अनुसार EVM का पहली बार इस्तेमाल 1982 में केरल के पारावुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में हुआ था। बाद के वर्षों में इसका इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ा और 2004 के लोकसभा चुनाव से पूरे देश में सभी सीटों पर EVM से मतदान होने लगा। EVM और VVPAT का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की दो कंपनियां, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी BEL और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी ECIL करती हैं।

मुख्य बातें: मतदान केंद्र पर EVM का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

EVM के हिस्से

EVM के दो मुख्य हिस्से होते हैं:

  • बैलेट यूनिट: जिस पर उम्मीदवारों के नाम, चुनाव चिह्न और नीले बटन होते हैं, यह मतदान कक्ष के अंदर रखी जाती है
  • कंट्रोल यूनिट: जो पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी के पास रहती है, इसी में वोट दर्ज होते हैं

दोनों एक केबल से जुड़ी होती हैं। EVM बैटरी से चलती है और इसे बिजली की जरूरत नहीं होती। चुनाव आयोग के अनुसार EVM किसी नेटवर्क, इंटरनेट या वायरलेस से नहीं जुड़ी होती।

VVPAT क्या है

VVPAT का पूरा नाम वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल है। यह बैलेट यूनिट के साथ रखा एक छोटा प्रिंटर है। चुनाव आयोग के अनुसार VVPAT का पहली बार इस्तेमाल 2013 में नगालैंड के नोकसेन विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में हुआ था। 2019 के लोकसभा चुनाव से सभी मतदान केंद्रों पर EVM के साथ VVPAT का इस्तेमाल होता है।

यह भी पढ़ें: लोकसभा चुनाव कैसे होता है: 543 सीटें, 272 का बहुमत, नामांकन से मतगणना और सरकार गठन तक पूरी प्रक्रिया | राज्यसभा चुनाव कैसे होता है: विधायकों की वोटिंग, कोटा फॉर्मूला और खुला मतदान, पूरी प्रक्रिया समझें

वोट डालने की प्रक्रिया

  1. मतदाता की पहचान मतदाता सूची और पहचान पत्र से की जाती है
  2. उंगली पर अमिट स्याही लगाई जाती है
  3. मतदान अधिकारी कंट्रोल यूनिट पर बैलेट बटन दबाता है, जिससे बैलेट यूनिट वोट के लिए तैयार होती है
  4. मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार के आगे का नीला बटन दबाता है
  5. उम्मीदवार के नाम के आगे लाल बत्ती जलती है और बीप की आवाज आती है
  6. VVPAT की खिड़की में लगभग सात सेकंड तक पर्ची दिखती है, जिसमें उम्मीदवार का क्रमांक, नाम और चुनाव चिह्न होता है
  7. इसके बाद पर्ची कटकर VVPAT के सीलबंद डिब्बे में गिर जाती है

मतदाता पर्ची को छू या घर नहीं ले जा सकता। पर्ची इसलिए दिखाई जाती है ताकि मतदाता अपनी आंखों से पुष्टि कर सके कि वोट उसी उम्मीदवार को गया जिसे उसने चुना।

मॉक पोल और सीलिंग

मतदान शुरू होने से पहले उम्मीदवारों के एजेंटों के सामने मॉक पोल यानी नकली मतदान कराया जाता है। इसमें कुछ वोट डालकर देखा जाता है कि मशीन के नतीजे और VVPAT की पर्चियां मेल खाती हैं। इसके बाद मॉक पोल के वोट हटाकर मशीन को सील किया जाता है। मशीनों के आवंटन में भी दो बार रैंडम तरीके से चुनाव होता है, ताकि किसी को पहले से पता न हो कि कौन-सी मशीन किस मतदान केंद्र पर जाएगी।

गिनती कैसे होती है

मतगणना के दिन कंट्रोल यूनिट पर रिजल्ट बटन दबाने से हर उम्मीदवार को मिले वोट दिखते हैं। इसके अलावा VVPAT पर्चियों का मिलान भी होता है। अप्रैल 2019 में एन. चंद्रबाबू नायडू बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हर विधानसभा क्षेत्र या लोकसभा सीट के हर विधानसभा खंड में रैंडम तरीके से चुनी गई पांच मशीनों की VVPAT पर्चियां गिनकर EVM के नतीजे से मिलाई जाती हैं। पहले यह संख्या एक मशीन प्रति विधानसभा क्षेत्र थी।

मतदाता के लिए जरूरी बातें

अगर किसी मतदाता को लगे कि VVPAT की पर्ची में उसके चुने उम्मीदवार की जगह किसी और का नाम दिखा, तो वह पीठासीन अधिकारी से लिखित शिकायत कर सकता है। चुनाव संचालन नियमों के तहत ऐसे मामले में मतदाता से घोषणा ली जाती है और उम्मीदवारों के एजेंटों की मौजूदगी में जांच के लिए परीक्षण वोट डलवाया जाता है। हालांकि शिकायत झूठी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी है।

सवाल और जवाब

EVM को लेकर समय-समय पर राजनीतिक दल सवाल उठाते रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं भी दायर हुई हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि EVM में कई स्तर की तकनीकी और प्रशासनिक सुरक्षा है, जैसे एक बार प्रोग्राम होने वाली चिप, नेटवर्क से कोई जुड़ाव नहीं, रैंडम आवंटन, उम्मीदवारों के एजेंटों की मौजूदगी में जांच और सीलिंग और स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी। सुप्रीम कोर्ट ने अब तक EVM से मतदान की व्यवस्था को बरकरार रखा है।

EVM पहली बार कब इस्तेमाल हुई

1982 में केरल के पारावुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में।

VVPAT पर्ची कितनी देर दिखती है

लगभग सात सेकंड तक, उसके बाद पर्ची कटकर सीलबंद डिब्बे में गिर जाती है।

स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग: EVM सवाल-जवाब, सुप्रीम कोर्ट: एन. चंद्रबाबू नायडू बनाम भारत संघ (2019)

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X