टेस्ट क्रिकेट में कई बार ऐसा होता है कि पहली पारी के बाद एक टीम बहुत आगे निकल जाती है। ऐसे में कमेंटेटर पूछते हैं कि क्या कप्तान फॉलो-ऑन देंगे। भारतीय टीम इस महीने न्यूजीलैंड में दो टेस्ट खेलने वाली है, वेलिंगटन में 19 से 23 नवंबर और क्राइस्टचर्च में 27 नवंबर से 1 दिसंबर तक। इससे पहले यह समझना दिलचस्प है कि फॉलो-ऑन नियम क्या है और कप्तान कब इसका इस्तेमाल करते हैं।
फॉलो-ऑन क्या है
सामान्य टेस्ट मैच में दोनों टीमें बारी-बारी से दो-दो पारियां खेलती हैं। लेकिन अगर पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम पहली पारी में विरोधी टीम से तय रनों से ज्यादा आगे हो, तो उसका कप्तान विरोधी टीम को तुरंत दूसरी पारी खेलने को कह सकता है। यानी विरोधी टीम को लगातार दो पारियां खेलनी पड़ती हैं। इसे फॉलो-ऑन देना कहते हैं।

कितनी बढ़त जरूरी
क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब यानी MCC के नियम 14 में फॉलो-ऑन के लिए न्यूनतम बढ़त मैच की अवधि के हिसाब से तय है:
- पांच या उससे ज्यादा दिन का मैच: कम से कम 200 रन
- तीन या चार दिन का मैच: कम से कम 150 रन
- दो दिन का मैच: कम से कम 100 रन
- एक दिन का मैच: कम से कम 75 रन
अंतरराष्ट्रीय टेस्ट पांच दिन के होते हैं, इसलिए वहां 200 रन की बढ़त जरूरी है। घरेलू प्रथम श्रेणी मैच, जैसे रणजी ट्रॉफी, आम तौर पर चार दिन के होते हैं, जहां 150 रन की सीमा लागू होती है।
खेल छोटा हो जाए तो
अगर बारिश या किसी और वजह से मैच का पहला दिन पूरी तरह धुल जाए, तो नियम के अनुसार बची हुई अवधि के हिसाब से फॉलो-ऑन की सीमा तय होती है। जैसे पांच दिन के टेस्ट का पहला दिन बर्बाद हो जाए, तो उसे चार दिन का मैच मानकर 150 रन की बढ़त काफी होगी।
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फैसला कैसे बताया जाता है
फॉलो-ऑन देना अनिवार्य नहीं, बल्कि कप्तान का विकल्प है। MCC के नियम के अनुसार कप्तान को विरोधी कप्तान और अंपायरों को अपने फैसले की सूचना देनी होती है और एक बार सूचना देने के बाद फैसला बदला नहीं जा सकता।
कप्तान फॉलो-ऑन क्यों देते हैं
- समय की बचत: मैच जल्दी खत्म करने और जीत की संभावना बढ़ाने के लिए
- मनोवैज्ञानिक दबाव: बड़ी हार के बाद तुरंत दोबारा बल्लेबाजी करना विरोधी टीम के लिए मुश्किल होता है
- मौसम का डर: आगे बारिश की आशंका हो, तो मैच जल्दी खत्म करने की कोशिश
कप्तान फॉलो-ऑन से क्यों बचते हैं
आधुनिक क्रिकेट में कई कप्तान फॉलो-ऑन देने से बचते हैं। इसके कई कारण हैं:
- गेंदबाजों की थकान: लगातार दो पारियों में गेंदबाजी से तेज गेंदबाज थक जाते हैं और चोट का खतरा बढ़ता है
- चौथी पारी का डर: अगर विरोधी टीम दूसरी पारी में बड़ा स्कोर बना दे, तो फॉलो-ऑन देने वाली टीम को आखिरी दिन टूटी पिच पर बल्लेबाजी करनी पड़ सकती है
- पिच का स्वभाव: भारत जैसी परिस्थितियों में पिच आखिरी दिनों में स्पिनरों की मदद करती है, इसलिए कप्तान चाहते हैं कि विरोधी टीम चौथी पारी में बल्लेबाजी करे
कोलकाता 2001 की मिसाल
फॉलो-ऑन के जोखिम का सबसे मशहूर उदाहरण 2001 का कोलकाता टेस्ट है। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को फॉलो-ऑन दिया था, लेकिन वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ की ऐतिहासिक साझेदारी के दम पर भारत ने दूसरी पारी में विशाल स्कोर खड़ा किया और फिर हरभजन सिंह की गेंदबाजी के सहारे मैच जीत लिया। फॉलो-ऑन के बाद टेस्ट जीतने के उदाहरण बेहद कम हैं, इसलिए यह मैच आज भी याद किया जाता है।
WTC फाइनल में अलग स्थिति
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल जैसे मैचों में रिजर्व दिन का प्रावधान रहता है, जिससे खेल की अवधि को लेकर फॉलो-ऑन की गणना पर सवाल उठते हैं। ऐसे मैचों के लिए ICC अपनी खेल शर्तों में स्पष्ट करता है कि फॉलो-ऑन की सीमा किस आधार पर तय होगी। इसलिए किसी खास टूर्नामेंट में नियम को लेकर संदेह हो, तो उस टूर्नामेंट की आधिकारिक खेल शर्तें देखना सबसे सही है।
रणनीति पर असर
पहली पारी में पीछे चल रही टीम के बल्लेबाजों के लिए फॉलो-ऑन बचाना अपने आप में एक लक्ष्य बन जाता है। कई बार निचले क्रम के बल्लेबाज कुछ रन जोड़कर फॉलो-ऑन टाल देते हैं, जिससे टीम को मनोवैज्ञानिक राहत मिलती है और मैच बचाने का मौका बढ़ता है। WTC में जीत के 12 और ड्रॉ के सिर्फ 4 अंक मिलते हैं, इसलिए जीत की संभावना बढ़ाने वाले फैसलों का महत्व भी बढ़ गया है।
टेस्ट में फॉलो-ऑन के लिए कितने रन की बढ़त चाहिए
पांच दिन के टेस्ट में कम से कम 200 रन की बढ़त।
क्या फॉलो-ऑन देना जरूरी है
नहीं, यह बढ़त वाली टीम के कप्तान का विकल्प है। वह चाहे तो खुद दूसरी पारी खेल सकता है।





