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FSSAI e-Commerce Crackdown: FSSAI का Amazon, Flipkart और स्विगी पर एक्शन, किन प्रोडक्ट्स पर अटकी नजर

FSSAI e-Commerce Crackdown
FSSAI e-Commerce Crackdown

सारांश

  • FSSAI ने पांच बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू की है।
  • कार्रवाई में Amazon, Flipkart India, Swiggy Instamart, BigBasket और Zepto शामिल हैं।
  • Happilo Premium Date Bites - Zesty Orange से जुड़े कथित भ्रामक दावों पर कार्रवाई की गई।
  • Swiggy Instamart और BigBasket पर Milky Mist के कुछ डेयरी उत्पादों की जानकारी और दावों को लेकर कार्रवाई हुई।
  • Amazon Seller Services, Swiggy Instamart और BigBasket पर धतूरे के फल और बीज की बिक्री/लिस्टिंग को लेकर भी कार्रवाई हुई।
  • FSSAI ने पिछले छह महीनों में ई-कॉमर्स और खाद्य कारोबार से जुड़े मामलों में निगरानी और कार्रवाई बढ़ाई है।

FSSAI e-Commerce Crackdown: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक रहे खाद्य उत्पादों की निगरानी सख्त कर दी है। एफएसएसएआई ने बुधवार को बताया कि उसने नियमों के पालन में कमी पाए जाने पर पांच बड़ी कंपनियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें अमेजन, स्विगी इंस्टामार्ट, बिगबास्केट, फ्लिपकार्ट इंडिया और जेप्टो शामिल हैं।

नियामक का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर गलत ब्रांडिंग, गुमराह करने वाले दावे और कुछ मामलों में प्रतिबंधित या जहरीले खाने पीने के सामान की बिक्री व प्रदर्शन जैसी गड़बड़ियां मिली हैं। यह कदम एफएसएस अधिनियम 2006 और लागू एफएसएसएआई नियमों के तहत उठाया गया है। ग्राहकों के लिए इसका मतलब यह है कि ऑनलाइन ऑर्डर करते समय पैक पर लिखे दावों और असल मानक के बीच फर्क अब नियामक की जांच का विषय बन गया है।

एफएसएसएआई ने पिछले छह महीनों में फूड बिजनेस ऑपरेटर्स और ई कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ सख्ती बढ़ाई है। इसी सिलसिले में नेस्ले इंडिया के कुछ शिशु आहार उत्पादों को लेकर भी कानूनी कार्रवाई चल रही है। दोनों मामले अलग हैं, लेकिन एक ही नियामक सक्रियता के तहत सामने आए हैं।

FSSAI e-Commerce Crackdown: किन उत्पादों को लेकर शुरू हुई कार्रवाई?

पीटीआई रिपोर्ट के अनुसार मुख्य मामला फूड प्रोडक्ट हैपिलो प्रीमियम डेट बाइट्स जेस्टी ऑरेंज से जुड़े गुमराह करने वाले दावों से जुड़ा है। यही उत्पाद उन पांच प्लेटफॉर्म के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई का केंद्र बताया गया है।

स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के मामले में एफएसएसएआई ने मिल्की मिस्ट के कुछ डेयरी उत्पादों पर भी कार्रवाई शुरू की है। नियामक के अनुसार इन उत्पादों से जुड़े गुमराह करने वाले दावे और गलत उत्पाद जानकारी मिली। जिन उत्पादों का जिक्र है उनमें मिल्की मिस्ट फ्रेश लो फैट क्रीम, मिल्की मिस्ट फार्म फ्रेश दही और मिल्की मिस्ट ग्रीक योगर्ट शामिल हैं।

एफएसएसएआई ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बड़ी कार्रवाई की गई है। पोस्ट में कहा गया कि अमेजन, स्विगी इंस्टामार्ट, बिगबास्केट, फ्लिपकार्ट इंडिया और जेप्टो के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू हो चुकी है। वजह खाद्य सुरक्षा और नियामकीय नियमों का अलग अलग तरह से पालन न होना बताई गई।

नियामक ने स्पष्ट किया कि इसमें गलत ब्रांडिंग या गुमराह करने वाले दावे तथा ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए प्रतिबंधित या जहरीले खाने पीने की चीजों की बिक्री और डिस्प्ले शामिल है। यानी आरोप सिर्फ एक पैक या एक दावे तक सीमित नहीं है। प्लेटफॉर्म पर दिखाई जा रही जानकारी और बिक्री योग्य वस्तु की वैधता, दोनों पर सवाल उठाए गए हैं।

नेस्ले इंडिया के मामले में क्या हुआ?

ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई ऐसे समय आई है जब कुछ दिन पहले एफएसएसएआई ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ कानूनी कदम की बात कही थी। नियामक के अनुसार बेबी फूड का एक सैंपल क्वालिटी स्टैंडर्ड पर खरा नहीं उतरा। दो अन्य इन्फेंट न्यूट्रिशन उत्पादों को ऐसे उत्पादों के नियमों के खिलाफ प्रमोट किया गया।

एचटी रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी के फॉलो अप फॉर्मूला के एक सैंपल में लैब टेस्ट के दौरान बायोटिन की मात्रा मानक से कम पाई गई। एफएसएसएआई ने कहा कि उसने नेस्ले इंडिया के खिलाफ तीन उत्पादों को लेकर तीन अलग अलग सुनवाई या निर्णय के मामले दर्ज किए हैं।

नेस्ले का पक्ष यह है कि उसके उत्पाद सभी लागू नियमों का पूरी तरह पालन करते हैं। कंपनी ने कहा कि वह इस मामले पर एफएसएसएआई के साथ मिलकर काम करती रहेगी। नियामकीय कार्रवाई की खबर के बाद कंपनी के शेयर लगभग 3 प्रतिशत गिर गए, लेकिन जल्द संभलकर लगभग सपाट बंद हुए।

नेस्ले इंडिया के एक प्रवक्ता ने बताया कि एफएसएसएआई ने प्रमोशनल नियमों के उल्लंघन के लिए जिन दो उत्पादों का जिक्र किया है, उनके लेबल और उत्पाद नियामक की विशेषज्ञ समिति से मंजूर थे। यानी कंपनी मंजूरी की प्रक्रिया का हवाला दे रही है, जबकि नियामक प्रमोशन और सैंपल टेस्ट दोनों को अलग अलग मामलों में रख रहा है।

ग्राहकों के लिए यह कार्रवाई क्यों मायने रखती है?

ऑनलाइन किराना और तैयार खाद्य सामान की खरीद अब रोजमर्रा की आदत बन चुकी है। ग्राहक पैक पर लिखे दावे, फैट प्रतिशत, स्वाद और स्वास्थ्य संबंधी भाषा देखकर ऑर्डर करते हैं। अगर वे दावे भ्रामक हों या उत्पाद जानकारी गलत हो तो घर पहुंचने वाला पैक और अपेक्षा के बीच अंतर रह जाता है।

एफएसएसएआई का कदम इसी अंतर को नियामकीय उल्लंघन मानता है। प्लेटफॉर्म केवल मार्केटप्लेस नहीं रह जाते। उन पर दिख रही लिस्टिंग, दावे और बिक्री योग्य वस्तु की वैधता भी जांच के दायरे में आती है। हैपिलो डेट बाइट्स और मिल्की मिस्ट डेयरी आइटम जैसे रोजमर्रा के उत्पाद इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि ये आम घरों तक पहुंचते हैं।

नियामक ने पिछले छह महीनों में फूड बिजनेस ऑपरेटर्स और ई कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ सख्ती बढ़ाई है। इससे साफ है कि कार्रवाई किसी एक दिन की घटना नहीं, बल्कि लगातार निगरानी का हिस्सा है। प्रतिबंधित या जहरीले खाद्य पदार्थ की बिक्री और प्रदर्शन का उल्लेख इसलिए गंभीर है क्योंकि यह सामान्य लेबल गलती से आगे की श्रेणी में जाता है।

साथ ही नेस्ले प्रकरण शिशु आहार से जुड़ा है। ऐसे उत्पाद माता पिता की नजर में सबसे संवेदनशील माने जाते हैं। सैंपल में बायोटिन कम मिलना और प्रमोशन नियमों का हवाला दोनों अलग मुद्दे हैं, लेकिन ग्राहक इन्हें एक साथ पढ़ता है। इसलिए नियामक की भाषा और कंपनी के जवाब दोनों को साथ रखकर देखना जरूरी है।

FSSAI e-Commerce Crackdown: अब आगे प्रक्रिया क्या हो सकती है?

एफएसएसएआई ने दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की बात कही है। इसका मतलब जांच, नोटिस, सुनवाई और फिर जुर्माना या अन्य दंड की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। पांच प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई एफएसएस अधिनियम 2006 के तहत बताई गई है।

नेस्ले के मामले में तीन अलग मामले दर्ज होने का मतलब है कि हर उत्पाद पर अलग फाइल चलेगी। कंपनी सहयोग और पूर्ण अनुपालन का दावा कर रही है। दो उत्पादों के लेबल विशेषज्ञ समिति से मंजूर होने का उल्लेख उसने अपने बचाव में किया है। अंतिम नतीजा सुनवाई के बाद ही साफ होगा।

ई कॉमर्स कंपनियों के लिए तात्कालिक असर लिस्टिंग की जांच, दावों की समीक्षा और कुछ उत्पादों को प्लेटफॉर्म से हटाने या सुधारने के रूप में दिख सकता है। ग्राहकों के लिए असर यह हो सकता है कि कुछ पैक पर लिखी भाषा बदले, कुछ लिस्टिंग गायब हों या चेतावनी स्पष्ट हो।

नियामक का संदेश साफ है। ऑनलाइन बिक्री में भी वही खाद्य सुरक्षा मानक लागू होंगे जो पारंपरिक दुकान पर लागू होते हैं। गलत दावा, गलत जानकारी और प्रतिबंधित वस्तु का प्रदर्शन अब प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी के दायरे में गिना जा रहा है। पांच कंपनियों पर शुरू हुई कार्रवाई और नेस्ले के तीन मामले इसी दिशा की दो अलग कड़ियां हैं।

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About The Author

Adarsh Pandey Author at Democratic Bharat Live

लेखक

Adarsh Pandey

I am a professional content writer and news journalist with over 1 years of experience in the digital media industry. I specialize in delivering news with accuracy, integrity, and an unbiased approach. My expertise lies in covering Trending News, Sports, Business, and Entertainment beats, where I bring engaging and well-researched stories to the readers.

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