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Term Insurance Plan: टर्म इंश्योरेंस प्लान कैसे चुनें, प्रीमियम, कवर और कंपनी चुनते समय इन 5 बातों पर दें ध्यान

Term Insurance Plan: टर्म इंश्योरेंस प्लान कैसे चुनें, प्रीमियम, कवर और कंपनी चुनते समय इन 5 बातों पर दें ध्यान
Term Insurance Plan

सारांश

  • जरूरत के हिसाब से कवर चुनें: परिवार के खर्च, आय, कर्ज और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर समुचित कवर तय करें।
  • सिर्फ कम प्रीमियम न देखें: सस्ता प्लान लेने के बजाय कवरेज, exclusions और policy terms को ध्यान से समझें।
  • पॉलिसी अवधि पर ध्यान दें: आपकी आर्थिक जिम्मेदारियां और रिटायरमेंट की योजना अवधि तय करने में अहम हैं।
  • कंपनी का रिकॉर्ड जांचें: कंपनी की वित्तीय स्थिति, ग्राहक सेवा और उपलब्ध claim-related information की तुलना करें।
  • सभी जानकारी सही दें: प्रस्ताव फॉर्म में स्वास्थ्य, आय और अन्य जरूरी जानकारी छिपाने या गलत बताने से बचें।
  • पॉलिसी दस्तावेज पढ़ें: IRDAI के नियमों के तहत जीवन बीमा उत्पादों की प्रमुख विशेषताएं सरल भाषा में उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
Term Insurance Plan: जीवन बीमा के विकल्पों में टर्म इंश्योरेंस को कम प्रीमियम पर बड़ा कवर देने वाला प्लान माना जाता है। उदाहरण के तौर पर 30 वर्ष की आयु वाला व्यक्ति एक करोड़ रुपये के कवर के लिए लंबे समय तक मासिक कुछ सौ रुपये का प्रीमियम दे सकता है। देश में कई बीमा कंपनियां अलग-अलग टर्म प्लान पेश करती हैं, इसलिए सिर्फ सस्ती कीमत देखकर फैसला करना पर्याप्त नहीं होता। कवर की राशि, प्रीमियम भरने की क्षमता, पॉलिसी की अवधि, स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी और कंपनी कीclaim सेटलमेंट क्षमता इन पांच बिंदुओं पर ध्यान देने से पॉलिसी लंबे समय तक उपयोगी रहती है। गलत चुनाव से या तो प्रीमियम का बोझ बढ़ जाता है या जरूरत पड़ने पर क्लेम में अड़चन आती है।

टर्म प्लान शुद्ध सुरक्षा देता है। इसमें मैच्योरिटी पर कोई बड़ी रकम वापस नहीं मिलती, लेकिन पॉलिसी अवधि के दौरान धारक की मृत्यु होने पर नामित व्यक्ति को सम एश्योर्ड मिलता है। इसलिए खरीदते समय परिवार की जरूरत और अपनी भुगतान क्षमता दोनों को तौलना जरूरी है। नीचे इन्हीं बातों को प्रश्न रूप में समझाया गया है।

Term Insurance Plan: टर्म इंश्योरेंस का कवर कितना बड़ा रखना चाहिए?

सम एश्योर्ड यानी बीमा राशि इतनी होनी चाहिए कि परिवार के मासिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई, शादी जैसे लक्ष्य और चल रहे लोन—खासकर होम लोन—की भरपाई हो सके। अगर कवर कम रखा जाए तो बीमा लेने का मूल उद्देश्य अधूरा रह जाता है। आने वाले वर्षों में महंगाई को भी ध्यान में रखना चाहिए, क्योंकि आज की एक करोड़ रुपये की राशि दस-पंद्रह साल बाद उतनी पर्याप्त नहीं रहती। कई सलाहकार वार्षिक आय का दस से पंद्रह गुना कवर सुझाते हैं, लेकिन यह नियम हर परिवार पर एक समान लागू नहीं होता। देनदारियां, आश्रितों की संख्या और भविष्य के बड़े खर्च जोड़कर गणना करें। कवर तय करने के बाद ही प्रीमियम की तुलना करें, अन्यथा सस्ता प्लान भी जरूरत के समय कम पड़ सकता है।

प्रीमियम की राशि कितनी रखें ताकि भुगतान में दिक्कत न आए?

उतना ही बड़ा कवर लें जिसका प्रीमियम आप नियमित रूप से भर सकें। मासिक या वार्षिक दोनों विकल्प उपलब्ध होते हैं। वार्षिक भुगतान पर अक्सर छूट मिलती है, लेकिन मासिक किस्त उन लोगों के लिए आसान रहती है जिनकी आय हर महीने आती है। प्रीमियम इतना हो कि बाकी घरेलू बजट प्रभावित न हो। अगर बीच में किस्त छूट जाए तो पॉलिसी लैप्स हो सकती है और कवर समाप्त हो जाता है। उम्र बढ़ने के साथ नया प्लान महंगा पड़ता है, इसलिए युवा अवस्था में लंबी अवधि का प्लान लेना अपेक्षाकृत सस्ता रहता है। प्रीमियम की तुलना करते समय राइडर की अतिरिक्त लागत भी जोड़ लें, क्योंकि दुर्घटना या गंभीर बीमारी वाले राइडर अलग से शुल्क लेते हैं।

टर्म प्लान कितने वर्षों के लिए लेना उचित रहता है?

पॉलिसी की अवधि उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कवर की राशि। कवर तब तक मिलना चाहिए जब तक व्यक्ति कमाने की स्थिति में रहे और परिवार की प्रमुख जिम्मेदारियां पूरी न हो जाएं। पहले 60 वर्ष की आयु तक का टर्म आम था, लेकिन देर से शादी और बच्चों की पढ़ाई लंबी खिंचने के कारण कई विशेषज्ञ कम से कम 65 वर्ष तक का कवर सुझाते हैं। अगर होम लोन 20 वर्ष का है और बच्चे अभी छोटे हैं, तो पॉलिसी अवधि इन दोनों जरूरतों को कवर करे। बहुत छोटी अवधि चुनने पर बाद में नया बीमा महंगा और स्वास्थ्य जांच के अधीन हो जाता है। अवधि तय करते समय रिटायरमेंट की योजना और आश्रितों की उम्र दोनों देखें।

स्वास्थ्य और आदतों की सही जानकारी क्यों जरूरी है?

बीमा कंपनी प्रीमियम तय करते समय चिकित्सा इतिहास, धूम्रपान और शराब की आदत पूछती है। इन बातों को छिपाने या गलत बताने से प्रीमियम तो कम दिख सकता है, लेकिन क्लेम के समय जांच में सच्चाई सामने आने पर नामित व्यक्ति का दावा ठुकराया जा सकता है। अगर परिवार में कोई वंशानुगत बीमारी रही हो या व्यक्ति तंबाकू का सेवन करता हो, तो उसे फॉर्म में स्पष्ट लिखना चाहिए। कंपनी मेडिकल जांच भी करवा सकती है। सही जानकारी देने पर प्रीमियम थोड़ा अधिक हो सकता है, पर पॉलिसी विश्वसनीय रहती है। बाद में बीमारी का पता चलने पर भी अगर प्रस्ताव के समय तथ्य छिपाए गए हों तो विवाद उत्पन्न होता है। इसलिए आवेदन भरते समय दस्तावेज और आदतें दोनों ईमानदारी से बताएं।

Term Insurance Plan: बीमा कंपनी की स्थिरता और क्लेम रिकॉर्ड कैसे जांचें?

कंपनी कितनी पुरानी है, उसका क्लेम सेटलमेंट रेशियो क्या है और नियामक के पास शिकायतों का स्तर कैसा है ये बातें देख लें। रेगुलेटर नई कंपनियों पर भी पॉलिसी का सम्मान करने का दायित्व रखता है, फिर भी लंबे समय से काम कर रही और अच्छा क्लेम रिकॉर्ड रखने वाली कंपनी चुनना व्यावहारिक रहता है। कंपनी की वित्तीय स्थिति और ग्राहक सेवा की समीक्षा भी उपयोगी होती है। सस्ते प्रीमियम वाली नई कंपनी अगर क्लेम प्रक्रिया में देरी करती है तो परिवार को परेशानी हो सकती है। पॉलिसी दस्तावेज में एक्सक्लूजन और वेटिंग पीरियड पढ़ लें। राइडर जोड़ने से कवर बढ़ता है, लेकिन हर राइडर की शर्त अलग होती है।

टर्म इंश्योरेंस के फायदे में कम प्रीमियम पर बड़ा कवर, धारा 80सी के तहत कर छूट और परिवार को आर्थिक सुरक्षा शामिल हैं। नुकसान यह है कि मैच्योरिटी पर कोई रकम नहीं मिलती और यह निवेश का साधन नहीं है। उम्र बढ़ने पर प्रीमियम महंगा होता है तथा पॉलिसी लैप्स होने पर पूरा लाभ समाप्त हो जाता है। सम एश्योर्ड वह रकम है जो पॉलिसी अवधि में मृत्यु होने पर नामित व्यक्ति को मिलती है। प्रीमियम मासिक या वार्षिक भरा जा सकता है। इन पांच बातों—कवर की मात्रा, भुगतान क्षमता, अवधि, सही स्वास्थ्य घोषणा और कंपनी का रिकॉर्ड को तौलकर लिया गया टर्म प्लान लंबे समय तक परिवार की सुरक्षा में सहायक रहता है।

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लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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