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प्रिस्क्रिप्शन दवा के विज्ञापन पर सख्ती का प्रस्ताव: रिटेलर और डिस्ट्रीब्यूटर को भी लेनी होगी केंद्र की मंजूरी

ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन के मसौदे पर 30 दिन में सुझाव दिए जा सकते हैं। प्रस्ताव DTAB की 93वीं बैठक की सिफारिश पर आया है।

प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के विज्ञापन पर सख्ती के प्रस्ताव वाला डेमोक्रेटिक भारत लाइव का ग्राफिक
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सारांश

  • संक्षेप में: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के विज्ञापन पर रोक का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
  • द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने 28 सितंबर को गजट अधिसूचना G.S.R. 861(E) के जरिए ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का मसौदा जारी किया है।
  • प्रिस्क्रिप्शन दवा की इन श्रेणियों में वे दवाएं आती हैं जिन्हें डॉक्टर की निगरानी में लेना जरूरी होता है, जैसे कुछ एंटीबायोटिक और मनोविकार से जुड़ी (साइकोट्रोपिक) दवाएं।
  • मंत्रालय ने कहा है कि गजट अधिसूचना की प्रतियां जनता को उपलब्ध होने की तारीख से 30 दिन के अंदर कोई भी व्यक्ति या संस्था आपत्ति और सुझाव भेज सकती है।

संक्षेप में: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के विज्ञापन पर रोक का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। ड्राफ्ट नियम के तहत शेड्यूल H, H1 और X की दवाएं बेचने वाले रिटेलर, थोक विक्रेता और डिस्ट्रीब्यूटर भी केंद्र सरकार की पहले से मंजूरी के बिना इनका विज्ञापन नहीं कर सकेंगे। इस पर 30 दिन के अंदर सुझाव दिए जा सकते हैं।

ड्राफ्ट नियम में क्या प्रस्ताव है

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने 28 सितंबर को गजट अधिसूचना G.S.R. 861(E) के जरिए ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इसमें नियम 65 के तहत एक नया उप-नियम जोड़ने का प्रस्ताव है। इसके बाद दवाएं बेचने, स्टॉक करने, प्रदर्शित करने या वितरित करने का लाइसेंस रखने वाले कारोबारी भी शेड्यूल H, H1 और X की प्रिस्क्रिप्शन दवा का विज्ञापन केंद्र की अनुमति के बिना नहीं कर पाएंगे।

अभी तक नियम में क्या कमी थी

मौजूदा व्यवस्था में दवा निर्माता कंपनियों पर पहले से रोक है कि वे इन शेड्यूल की दवाओं का विज्ञापन सरकार की मंजूरी के बिना नहीं कर सकतीं। लेकिन यही पाबंदी दवाओं की खुदरा और थोक बिक्री करने वालों पर साफ तौर पर लागू नहीं होती थी। प्रस्तावित संशोधन इस कमी को दूर करके पूरी सप्लाई चेन पर एक जैसा नियम लागू करना चाहता है।

प्रिस्क्रिप्शन दवा के प्रचार से क्या खतरा है

प्रिस्क्रिप्शन दवा की इन श्रेणियों में वे दवाएं आती हैं जिन्हें डॉक्टर की निगरानी में लेना जरूरी होता है, जैसे कुछ एंटीबायोटिक और मनोविकार से जुड़ी (साइकोट्रोपिक) दवाएं। बिना अनुमति प्रचार होने पर लोग डॉक्टर की सलाह के बिना खुद दवा लेने लगते हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा और दवाओं के दुरुपयोग का खतरा बढ़ता है। एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल से दवा प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस) की समस्या भी बढ़ती है।

किसकी सिफारिश पर आया प्रस्ताव

यह प्रस्ताव ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की 16 फरवरी 2026 को हुई 93वीं बैठक की सिफारिशों के बाद आया है। बोर्ड ने दवा बिक्री और वितरण लाइसेंस रखने वालों के विज्ञापनों को नियंत्रित करने की जरूरत पर विचार किया था।

आम लोग कैसे दे सकते हैं सुझाव

मंत्रालय ने कहा है कि गजट अधिसूचना की प्रतियां जनता को उपलब्ध होने की तारीख से 30 दिन के अंदर कोई भी व्यक्ति या संस्था आपत्ति और सुझाव भेज सकती है। तय समय में मिले सुझावों पर विचार करने के बाद ही केंद्र सरकार अंतिम नियम जारी करेगी। तब तक यह केवल प्रस्ताव है और मौजूदा नियम लागू रहेंगे। पाठकों के लिए सलाह यही है कि किसी विज्ञापन या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर प्रिस्क्रिप्शन दवा न लें।

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स्रोत: द हिंदू (10 अक्टूबर 2026), केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की गजट अधिसूचना G.S.R. 861(E)।

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लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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