Late Night Scrolling: देर रात सोशल मीडिया स्क्रॉल करने की आदत को डॉक्टर शालिनी सिंह सालुंके सेहत के जोखिम से जोड़ती हैं। उनके मुताबिक रोज रात 10 बजे के बाद सोना शरीर और दिमाग दोनों पर दबाव डालता है। सुबह देर तक सोकर नींद पूरी होने का एहसास भले हो, वे इसे सही नहीं मानतीं।
लेट सोने से सर्केडियन रिदम बिगड़ने और हार्मोनल असंतुलन की बात उन्होंने कही है। रात की भूख, इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन, कॉर्टिसोल, मूड स्विंग, फोकस, चिंता और उदासी भी इसी क्रम में रखे गए हैं। हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल की आशंका भी उनके बयान में है। ये चिकित्सकीय राय है, हर व्यक्ति पर एक जैसा नतीजा नहीं।
उन्होंने सोने और जागने का समय तय करने, सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन छोड़ने और आदत को धीरे धीरे सुधारने की सलाह दी है। परेशानी बनी रहे या दिन के काम पर असर पड़े तो डॉक्टर से मिलने को कहा है।
Late Night Scrolling: रात 10 बजे के बाद सोने पर डॉक्टर क्या कहती हैं?
डॉक्टर शालिनी सिंह सालुंके के अनुसार रोज 10 बजे के बाद सोने से शरीर और दिमाग खतरे में पड़ते हैं। देर तक जागना कई नुकसान ला सकता है। लेट नाइट नींद सर्केडियन रिदम बिगाड़ती है। इसी से हार्मोनल असंतुलन शुरू होने की बात है।
सर्केडियन रिदम शरीर की दिन रात वाली घड़ी है। जब सोने का समय रोज पीछे खिसकता है, यह घड़ी लड़खड़ाती है। सुबह की अतिरिक्त नींद रात की देरी को पूरा नहीं कर पाती, यही उनका मत है। स्क्रॉल उसी देरी का आम कारण बनता है, क्योंकि फोन हाथ में रहते आंख नहीं लगती।
यह सामान्य सलाह है। शिफ्ट ड्यूटी या बीमारी वाली नींद अलग विषय है। स्रोत उस अपवाद को नहीं खोलता। जो कहा गया है वह रोज देर से सोने वाली आदत पर है।
रात की भूख वजन और शुगर से कैसे जुड़ती है?
देर जागने पर भूख लगती है और लोग रात में कुछ भी खा लेते हैं। डॉक्टर के अनुसार इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और यही डायबिटीज का कारण बन सकता है। वजन भी बढ़ता है। शब्द कारण बन सकता है आशंका है, पक्का निदान नहीं।
स्क्रॉल और नाश्ता साथ चलते हैं। स्क्रीन पर समय बीतता है, रसोई खुलती है। नियमित रात का खाना और अनियमित रात का चबा जाना अलग हैं। दूसरा वाला पैटर्न इंसुलिन और वजन से जोड़ा गया है। खाने की मात्रा या कैलोरी इस रिपोर्ट में नहीं है।
सुबह देर तक सोने से यह चक्र नहीं टूटता। भूख रात को जागने से जुड़ी बताई गई है, सुबह की नींद से नहीं। इसलिए सुधार सोने के समय पर टिका है।
Late Night Scrolling: मूड, फोकस और काम पर क्या असर बताया गया?
रोज देर से सोने पर कॉर्टिसोल बढ़ता चला जाता है। सेहत खराब होने और उम्र से पहले बूढ़ा दिखने की आशंका डॉक्टर ने जताई है। मूड स्विंग होते हैं। क्रेविंग बढ़ती है। फोकस नहीं बनता। चिंता और उदासी भी इसी वजह से महसूस हो सकती है।
ये सब काम और पढ़ाई को प्रभावित करते हैं। लेट सोने से हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल भी हो सकते हैं। इसलिए देर से सोना फायदेमंद नहीं माना गया। एक रात जागना और रोज की आदत में फर्क है। बात रोज की आदत पर है।
चिंता या उदासी महसूस होना निदान का विकल्प नहीं। लक्षण बने रहें तो डॉक्टर से मिलना स्रोत में अलग से लिखा है। खुद दवा या लेबल लगाना इस लेख का विषय नहीं।
सोने का समय कैसे ठीक करें?
सोने और उठने का समय तय करें। रोज एक समय पर सोएं और एक समय पर उठें। हो सके तो सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और स्क्रीन छोड़ दें। बेवजह सोशल मीडिया स्क्रॉल न करें। सोने से पहले आराम करने की कोशिश करें।
पुरानी आदत एक दिन में न बदलें। सोने का समय धीरे धीरे पहले करें। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर और दिमाग दोनों के लिए जरूरी बताई गई है। अचानक बड़ा बदलाव थकान बढ़ा सकता है, इसलिए धीमा कदम सुझाया गया है।
एक घंटे की स्क्रीन दूरी व्यावहारिक नियम है। फोन दूसरे कमरे में रखना या अलार्म के लिए अलग घड़ी रखना व्यक्ति खुद तय कर सकता है। स्रोत केवल दूरी और स्क्रॉल रोकने तक कहता है।
Late Night Scrolling: डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
नींद की परेशानी लगातार रहे या दिनभर के काम पर असर पड़े तो सलाह लेना बेहतर है। देर रात स्क्रॉल हर बीमारी का अकेला कारण साबित नहीं हुआ है इस रिपोर्ट में। डॉक्टर ने संबंध बताया है। जांच व्यक्तिगत होती है।
ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, शुगर या मूड की शिकायत हो तो उसे नींद की आदत से अलग भी देखा जा सकता है। लेख केवल लेट नाइट स्क्रॉल और लेट सोने तक सीमित है। अन्य इलाज या सप्लिमेंट यहां नहीं दिए गए।
नियम साफ है। 10 बजे के बाद की रोजमर्रा की नींद जोखिम बताई गई है। स्क्रीन एक घंटा पहले छोड़ें। समय धीरे आगे खींचें। दिक्कत रहे तो चिकित्सक से मिलें।
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