यह बदलाव राज्य सरकार की ‘थाई मामन थंगा मोथिरम थिट्टम’ योजना शुरू होने के लगभग एक सप्ताह बाद किया गया है। योजना के तहत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जन्म लेने वाले नवजात बच्चों को 22 कैरेट सोने की एक ग्राम अंगूठी दी जाती है। सरकारी अस्पतालों में हर साल औसतन करीब 4.4 लाख प्रसव होते हैं, जिससे इस योजना के जरिए सालाना लगभग 441 किलोग्राम सोना बाजार में आने का अनुमान है। गोल्ड लोन सीमा बढ़ाने को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है ताकि लोगों को अपने आभूषणों पर बेहतर ऋण मिल सके।
Tamil Nadu News: गोल्ड लोन की पुरानी सीमा क्या थी और नई व्यवस्था में क्या बदला?
पहले सहकारी बैंक और समितियां गिरवी रखे आभूषणों के मूल्य का 75 प्रतिशत तक ऋण देती थीं, लेकिन प्रति ग्राम अधिकतम सीमा 7,000 रुपये थी। छह महीने के भीतर चुकाने वाले ऋणों में मासिक औसत सोने के मूल्य का 75 प्रतिशत तक कर्ज देने की छूट थी और उस श्रेणी में प्रति ग्राम की कोई ऊपरी सीमा नहीं थी। नई व्यवस्था में सामान्य गोल्ड लोन की प्रति ग्राम सीमा 10,000 रुपये कर दी गई है। इससे ग्राहक को उसी आभूषण पर पहले की तुलना में अधिक राशि मिल सकेगी। अधिकारियों के अनुसार सीमा बढ़ाने का उद्देश्य लोगों को सहकारी संस्थानों की ओर प्रोत्साहित करना है, जहां ब्याज दर अपेक्षाकृत नियंत्रित रहती है।
बाजार में सोने की कीमत और अन्य ऋणदाताओं की सीमा कितनी है?
सोमवार को सोने की कीमत 13,675 रुपये प्रति ग्राम रही। निजी वाणिज्यिक बैंक करीब 9,600 से 10,400 रुपये प्रति ग्राम तक गोल्ड लोन दे रहे हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लगभग 8,800 से 9,300 रुपये प्रति ग्राम की सीमा पर काम कर रहे हैं। निजी गिरवी कारोबारी, गोल्ड लोन पर केंद्रित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां और ट्रेडिंग फर्म करीब 10,500 से 11,000 रुपये प्रति ग्राम तक कर्ज दे रही हैं। नई सीमा के बाद सहकारी बैंकों की पेशकश इन विकल्पों के निकट आ गई है। ग्राहक अब सहकारी मार्ग चुनकर निजी साहूकारों की ऊंची दरों से बच सकते हैं, बशर्ते आभूषण की शुद्धता और वजन की जांच सही हो।
सहकारी गोल्ड लोन पर ब्याज दर कितनी है और लागत कैसे नियंत्रित की जा रही है?
बैंकों के गोल्ड लोन पर ब्याज दर आमतौर पर 14 से 18 प्रतिशत के बीच रहती है। सहकारिता विभाग ने पिछले वर्ष गोल्ड लोन की ब्याज दर 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 13 प्रतिशत कर दी थी। एक अधिकारी ने बताया कि बढ़ी हुई ऋण सीमा से अधिक ग्राहक सहकारी बैंकों की ओर आ सकते हैं, क्योंकि उन्हें गिरवी आभूषण पर पहले से ज्यादा राशि मिलेगी। प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों के मुनाफे की सीमा 2.25 प्रतिशत तय करने का फैसला भी हाल की बैठक में हुआ। केंद्रीय सहकारी बैंकों से कैश क्रेडिट के जरिए वित्त पोषित समितियों के गोल्ड लोन पर ब्याज दर, उन्हीं बैंकों की शाखाओं द्वारा सीधे दिए जाने वाले लोन की दर से 1.25 प्रतिशत कम रखी जाएगी। इन उपायों से ऋण राशि बढ़ने के साथ लागत पर भी अंकुश लगाने की कोशिश है।
यह फैसला कमजोर वर्ग और त्योहारी जरूरत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
त्योहारों के मौसम में परिवारों को नकदी की जरूरत बढ़ जाती है। कई लोग सोने के गहने गिरवी रखकर अल्पकालिक कर्ज लेते हैं। निजी साहूकारों पर निर्भर रहने से ब्याज अधिक चुकाना पड़ता है और आभूषण वापस पाने में देरी हो सकती है। सहकारी बैंकों की सीमा 10,000 रुपये प्रति ग्राम होने से संस्थागत विकल्प मजबूत होता है। सरकार का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को औपचारिक ऋण व्यवस्था से जोड़ना इस कदम का मुख्य उद्देश्य है। ‘थाई मामन थंगा मोथिरम थिट्टम’ के तहत बाजार में अतिरिक्त सोना आने की संभावना को भी ध्यान में रखा गया है, ताकि नए आभूषण रखने वाले परिवारों को ऋण की सुविधा मिल सके।
ग्राहकों को गोल्ड लोन लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
ऋण राशि आभूषण के वजन, कैरेट और वर्तमान मूल्यांकन पर निर्भर करती है। सहकारी समिति या बैंक से लोन लेने से पहले ब्याज दर, चुकौती अवधि और जुर्माने की शर्तें पढ़ लें। छह महीने के भीतर चुकाने वाले लोन पर नियम अलग हो सकते हैं। आभूषण की शुद्धता की जांच करवाएं और रसीद संभालकर रखें। समय पर किस्त भरने से आभूषण सुरक्षित रहता है और अतिरिक्त ब्याज नहीं लगता। अगर लोन की जरूरत छोटी अवधि की है तो सहकारी मार्ग की तुलना निजी एनबीएफसी से करें, क्योंकि नई सीमा के बाद दोनों के बीच अंतर घटा है। दस्तावेज पूरे रखने और नॉमिनी की जानकारी अपडेट करने से बाद में विवाद कम होता है।
तमिलनाडु सहकारिता विभाग का यह फैसला गोल्ड लोन की उपलब्ध राशि बढ़ाने और कृषि सहकारी समितियों के माध्यम से लागत नियंत्रित करने की दिशा में है। 10,000 रुपये प्रति ग्राम की नई सीमा से ग्राहकों को पहले की तुलना में अधिक कर्ज मिल सकेगा, जबकि ब्याज संबंधी व्यवस्था को संतुलित रखने के उपाय भी किए गए हैं। त्योहारी सीजन में नकदी की जरूरत रखने वाले परिवारों के लिए सहकारी बैंक अब अपेक्षाकृत प्रतिस्पर्धी विकल्प बन सकते हैं।
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