कई कंपनियां, मैनेजमेंट कॉलेज और कुछ भर्तियां इंटरव्यू से पहले ग्रुप डिस्कशन यानी GD कराती हैं। इसमें 8 से 12 उम्मीदवारों के समूह को एक विषय दिया जाता है और उस पर तय समय तक चर्चा करनी होती है। कई उम्मीदवार सोचते हैं कि सबसे ज्यादा बोलने वाला चुना जाएगा, जबकि ऐसा जरूरी नहीं। जानिए ग्रुप डिस्कशन में कैसे बोलें।
चयनकर्ता क्या परखते हैं
GD में चयनकर्ता यह देखते हैं कि आप किसी विषय को कितना समझते हैं, अपनी बात कितनी साफ और तर्क के साथ रखते हैं, दूसरों की बात सुनते हैं या नहीं, और समूह को सही दिशा में ले जाने में मदद करते हैं या नहीं। नेतृत्व, धैर्य, आत्मविश्वास और टीम में काम करने की क्षमता भी परखी जाती है।

तैयारी कैसे करें
- रोज अखबार पढ़ें और समसामयिक विषयों पर नजर रखें
- तकनीक, शिक्षा, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और समाज से जुड़े आम विषयों पर दोनों पक्षों के तर्क सोचें
- महत्वपूर्ण तथ्य और आंकड़े भरोसेमंद स्रोत से याद रखें, लेकिन गलत आंकड़ा बोलने से बेहतर है आंकड़ा न बोलना
- दोस्तों के साथ अभ्यास करें और एक-दूसरे को सुधार बताएं
- सार यानी “ऐब्स्ट्रैक्ट” विषयों का भी अभ्यास करें, जैसे “लाल रंग” या “शून्य”
शुरुआत कैसे करें
विषय मिलने पर पहले कुछ पल सोचें और मुख्य बिंदु मन में तय करें। अगर आपके पास विषय की अच्छी समझ है, तो शुरुआत करना फायदेमंद हो सकता है। शुरुआत में विषय की परिभाषा, उसका महत्व या कोई प्रासंगिक तथ्य बताकर चर्चा को दिशा दें। लेकिन अगर विषय समझ न आए, तो जल्दबाजी में शुरुआत करने के बजाय दूसरों को सुनकर फिर ठोस बात रखें।
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चर्चा के दौरान
अपनी बात छोटे और साफ वाक्यों में कहें। हर तर्क के साथ उदाहरण दें। किसी से असहमत हों, तो विनम्रता से कहें, जैसे “मैं आपकी बात से कुछ हद तक सहमत हूं, लेकिन एक दूसरा पहलू भी है।” दूसरों के अच्छे बिंदुओं को स्वीकार करें और उन्हें आगे बढ़ाएं। अगर कोई शांत सदस्य बोल नहीं पा रहा, तो उसे मौका देना भी अच्छे नेतृत्व की निशानी है। आंखों से संपर्क बनाए रखें और केवल चयनकर्ताओं की ओर देखकर न बोलें।
निष्कर्ष
अगर चर्चा के अंत में मौका मिले, तो पूरी चर्चा के मुख्य बिंदुओं को संक्षेप में जोड़कर निष्कर्ष दें। निष्कर्ष में केवल अपनी बात नहीं, बल्कि समूह की प्रमुख बातें शामिल करें।
आम गलतियां
- बीच में टोकना, चिल्लाना या बहस को निजी बना देना
- विषय से भटक जाना
- बिना तथ्य के बड़े-बड़े दावे करना
- पूरी चर्चा में चुप रहना
- बार-बार एक ही बात दोहराना
शांत, संतुलित और आत्मविश्वास भरा व्यवहार अक्सर ज्यादा बोलने से बेहतर असर छोड़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या GD हिंदी में हो सकता है?
यह संस्था पर निर्भर करता है। कई जगह अंग्रेजी अपेक्षित होती है, इसलिए पहले से पूछ लें और उसी भाषा में अभ्यास करें।
स्रोत: नेशनल करियर सर्विस (NCS), श्रम एवं रोजगार मंत्रालय। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।






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