UP Free Boring Yojana 2026: उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादन को बढ़ाने और किसानों को सूखे जैसी अनिश्चितताओं से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा निशुल्क बोरिंग योजना का संचालन किया जा रहा है। प्रदेश के अधिकांश ग्रामीण अंचलों में समय पर वर्षा न होने या नहरों के अंतिम छोर तक पानी न पहुंचने के कारण फसलों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ता है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए लघु सिंचाई विभाग द्वारा चलाई जा रही यह योजना लघु और सीमांत किसानों के लिए एक मजबूत संबल बनकर उभरी है। इस योजना के माध्यम से किसान अपने निजी खेतों में बोरिंग करवाकर अपनी फसलों के लिए सुनिश्चित और स्वतंत्र सिंचाई प्रणाली स्थापित कर सकते हैं, जिससे पैदावार में सुधार होता है और उत्पादन लागत में कमी आती है।

UP Free Boring Yojana 2026: योजना का मुख्य स्वरूप और श्रेणीवार अनुदान की व्यवस्था
यूपी निःशुल्क बोरिंग योजना के तहत लघु सिंचाई विभाग बोरिंग पर श्रेणीवार अनुदान देता है। सामान्य वर्ग के लघु किसान को अधिकतम ₹5,000 और सीमांत किसान को अधिकतम ₹7,000 का अनुदान मिलता है। बोरिंग अधिकतम 30 मीटर गहराई तक और 110 मिमी व्यास की होती है।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों को बोरिंग पर अधिकतम ₹10,000 का अनुदान मिलता है। बोरिंग के साथ पंपसेट लेने पर भी अलग से अनुदान का प्रावधान है: लघु किसान को ₹4,500, सीमांत किसान को ₹6,000 और SC/ST किसान को ₹9,000 तक। पंपसेट लेना किसान की इच्छा पर है।
पात्रता के मुख्य मानक: किन किसानों को मिलेगा लाभ
निःशुल्क बोरिंग योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों को मिलता है। विभाग के मानकों के अनुसार सामान्य वर्ग में 0.2 से 1.0 हेक्टेयर जोत वाले किसान सीमांत और 1.001 से 2.0 हेक्टेयर जोत वाले किसान लघु श्रेणी में आते हैं।
बोरिंग की अनुमति भूजल की उपलब्धता और स्थल की तकनीकी जांच पर निर्भर करती है, इसलिए आवेदन से पहले अपने ब्लॉक की स्थिति लघु सिंचाई कार्यालय से जरूर पूछ लें। आवेदक किसान पहले किसी समान सरकारी बोरिंग अनुदान योजना का लाभार्थी नहीं होना चाहिए।
आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं
योजना का लाभ प्राप्त करने और सत्यापन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए किसानों के पास वैध पहचान और भूमि से जुड़े अभिलेख होना आवश्यक है। आवेदक के पास पहचान प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और आधार कार्ड होना चाहिए। जाति आधारित अतिरिक्त अनुदान का लाभ लेने के लिए सक्षम राजस्व अधिकारी द्वारा जारी वैध जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
भूमि के विवरण के लिए खतौनी, 61-ख (जोत प्रमाण) और खसरे की प्रति लगानी होती है, ताकि जोत की श्रेणी स्पष्ट हो सके। अनुदान सीधे बैंक खाते में पाने के लिए बैंक पासबुक की प्रति और पासपोर्ट साइज फोटो भी जरूरी है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रिया
यूपी निःशुल्क बोरिंग योजना में आवेदन के लिए किसान अपने विकासखंड के खंड विकास अधिकारी (BDO) कार्यालय या सहायक अभियंता (लघु सिंचाई) कार्यालय से संपर्क करते हैं। योजना की जानकारी लघु सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट minorirrigationup.gov.in पर उपलब्ध है।
आवेदन के लिए निर्धारित प्रपत्र इन्हीं कार्यालयों से मिलता है। फॉर्म भरकर और दस्तावेजों की प्रतियां लगाकर संबंधित कार्यालय में जमा कराया जाता है। जिला स्तर पर अधिशासी अभियंता (लघु सिंचाई) कार्यालय से भी जानकारी ली जा सकती है।
खेत का भौतिक सत्यापन और अनुदान जारी होने का तंत्र
आवेदन जमा होने के बाद लघु सिंचाई विभाग के तकनीकी अधिकारी और राजस्व विभाग की टीम द्वारा किसान के खेत का भौतिक सत्यापन (स्थलीय मुआयना) किया जाता है। इस जांच के दौरान भूजल की उपलब्धता, बोरिंग स्थल की उपयुक्तता और खेत के रकबे की पुष्टि की जाती है। जांच में सभी तथ्य सही पाए जाने पर बोरिंग निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी जाती है।
स्वीकृति मिलने के पश्चात किसान विभाग के तकनीकी पर्यवेक्षण में बोरिंग का कार्य संपन्न करवाता है। बोरिंग का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होने और जांच टीम द्वारा उसकी कार्यप्रणाली की अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद, स्वीकृत अनुदान की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थी किसान के बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी जाती है। यह पूरी प्रक्रिया बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।
UP Free Boring Yojana 2026: सुनिश्चित सिंचाई से किसानों की आर्थिक समृद्धि की राह
खेतों में निजी बोरिंग की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों की वर्षा पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो जाती है। समय पर सिंचाई मिलने से खरीफ और रबी के साथ-साथ जायद की फसलों की बुवाई भी संभव हो पाती है, जिससे किसान साल भर में तीन फसलें ले सकते हैं। इससे खाद्यान्न, दलहन, तिलहन और सब्जियों की उत्पादकता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है। उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल न केवल भूजल का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करती है, बल्कि लघु व सीमांत किसानों की आय को स्थिर और टिकाऊ बनाकर ग्रामीण समृद्धि को नई दिशा प्रदान करती है।
स्रोत: लघु सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश; विभाग के निःशुल्क बोरिंग योजना FAQ; जिला प्रशासन बलिया।
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