Sarso Mandi Bhav Today: देशभर की प्रमुख तिलहन मंडियों में सरसों की दैनिक कीमतों को लेकर किसानों, तेल मिल कारोबारियों और कृषि जिंस व्यापारियों में हलचल तेज है। त्योहारी सीजन के दौरान खाद्य तेलों की घरेलू खपत में बढ़ोतरी के बीच सरसों की मांग और आपूर्ति के समीकरण लगातार बदल रहे हैं। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को मंडियों में सरसों की आवक, तेल मिलों की पेराई क्षमता और अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल बाजारों से मिलने वाले संकेतों के आधार पर भावों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। अपनी उपज बेचने की तैयारी कर रहे किसानों के लिए जरूरी है कि वे अलग-अलग मंडियों के न्यूनतम, अधिकतम और मॉडल भावों का सटीक विश्लेषण करें ताकि उन्हें अपनी मेहनत का सही मूल्य प्राप्त हो सके।
Sarso Mandi Bhav Today: उत्तर प्रदेश की मंडियों में सरसों के दाम
उत्तर प्रदेश की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में हालिया सत्रों के दौरान सरसों के भावों में काफी विविधता देखने को मिली है। हाल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों में सरसों की दरें 6,500 रुपये से लेकर 9,100 रुपये प्रति क्विंटल के विस्तृत दायरे में दर्ज की गई हैं। रायबरेली जिले की जायस मंडी में उच्च गुणवत्ता वाली सरसों का मॉडल भाव 9,006 रुपये प्रति क्विंटल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा, जबकि लखीमपुर खीरी मंडी में भी यह 8,983 रुपये प्रति क्विंटल के मजबूत स्तर पर दर्ज किया गया।
दूसरी ओर हरदोई जिले की माधोगंज मंडी में मॉडल भाव 7,700 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहा। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के बीच कीमतों का यह बड़ा फासला स्थानीय तेल मिलों की मांग, बीज में तेल की मात्रा यानी ऑयल प्रतिशत और माल की स्थानीय उपलब्धता पर निर्भर करता है। मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसान जो आगामी दिनों में मंडी जाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अपने नजदीकी बाजार समिति के दैनिक बुलेटिन से ताजा बोली की पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।
हरियाणा की सिरसा मंडी का हाल: आवक और नीलामी दरों का लेखा-जोखा
हरियाणा के प्रमुख तिलहन व्यापार केंद्र सिरसा मंडी में 21 अक्टूबर को सरसों का कारोबार खासी सक्रियता के साथ देखा गया। उपलब्ध मंडी आंकड़ों के अनुसार सिरसा में सरसों का मॉडल भाव 6,025 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया था। इस दौरान नीलामी में न्यूनतम भाव 5,637 रुपये प्रति क्विंटल और अच्छी गुणवत्ता वाले बोल्ड दाने का अधिकतम भाव 6,347 रुपये प्रति क्विंटल तक बोला गया।
मंडी प्रांगण में दैनिक आवक लगभग 7,000 बोरी दर्ज की गई, जिससे स्पष्ट होता है कि किसान धीरे-धीरे अपनी बची हुई उपज को बाजार में ला रहे हैं। हरियाणा और राजस्थान सीमा से सटी मंडियों में दैनिक आवक का दबाव अधिक रहने से भाव स्थिर दायरे में बने हुए हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि आगामी दिनों में रबी सीजन की बुवाई में तेजी आने के बाद किसान खेती के कार्यों में व्यस्त होंगे, जिससे आवक में गिरावट आ सकती है और कीमतों को अतिरिक्त सहारा मिल सकता है।
सरसों के भाव में उतार-चढ़ाव के मुख्य कारण: घरेलू मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार
सरसों की कीमतों की दिशा तय करने में कई घरेलू और वैश्विक कारक एक साथ भूमिका निभाते हैं। सबसे बड़ा घटक स्थानीय स्तर पर कच्ची घानी और एक्सपेलर तेल मिलों की लिवाली है। करवा चौथ, धनतेरस और दीपावली के चलते देश में सरसों तेल और रिफाइंड तेलों की खुदरा मांग चरम पर पहुंच जाती है, जिससे पेराई मिलें सक्रिय होकर स्टॉक खरीदती हैं।
इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम तेल और सोयाबीन तेल की आयात कीमतों का असर भी घरेलू तिलहन बाजार पर सीधा पड़ता है। जब विदेशी खाद्य तेल महंगे होते हैं, तो घरेलू सरसों तेल की मांग स्वतः बढ़ जाती है। हालांकि, मंडी स्तर पर अंतिम बोली पूरी तरह से सरसों के दाने की चमक, कचरा या धूल की मात्रा और सबसे महत्वपूर्ण रूप से दाने में मौजूद नमी के प्रतिशत पर निर्भर करती है। जिस उपज में नमी की मात्रा निर्धारित आठ प्रतिशत के भीतर होती है, उसे व्यापारी प्रीमियम दरों पर हाथों-हाथ खरीदते हैं।
Sarso Mandi Bhav Today: एगमार्कनेट पोर्टल से लें सटीक जानकारी और उपज बेचने से पहले जरूरी सावधानियां
सरसों बेचने जा रहे किसान भाइयों के लिए भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एगमार्कनेट पोर्टल एक अत्यंत उपयोगी साधन है। किसान अपने मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से इस पोर्टल पर जाकर संबंधित राज्य, जिला और विशिष्ट मंडी का चयन करके वास्तविक समय के न्यूनतम, अधिकतम और मॉडल भावों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मॉडल भाव वह प्रामाणिक दर होती है जिस पर मंडी में सर्वाधिक बोरियों का सौदा हुआ होता है।
मंडी में अपनी ट्राली ले जाने से पहले किसानों को उपज को अच्छी तरह सुखाकर और छानकर ले जाने की सलाह दी जाती है। खेत से सीधे लाई गई गीली सरसों पर व्यापारी भारी कटौती करते हैं, जिससे किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा किसी एक आढ़ती की बात पर तुरंत सहमति देने के बजाय नीलामी शेड में अन्य ढेरी के भावों की तुलना करना और इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर ही सटीक तौल कराना सुनिश्चित करें। भुगतान के समय मंडी समिति की वैध पर्ची और बैंक अंतरण के विवरण की जांच अवश्य कर लें ताकि लेनदेन पूरी तरह सुरक्षित रहे।
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