भारत में न्याय व्यवस्था एक सीढ़ी की तरह है, जिसके सबसे ऊपर सुप्रीम कोर्ट है, उसके नीचे राज्यों के हाई कोर्ट और फिर जिला व अधीनस्थ अदालतें। अमेरिका जैसे देशों से अलग, भारत में केंद्र और राज्यों के लिए अलग-अलग न्यायपालिका नहीं, बल्कि एक एकीकृत न्यायपालिका है। जानिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट कैसे काम करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट
संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत भारत का सर्वोच्च न्यायालय स्थापित है, जो नई दिल्ली में है। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और संसद द्वारा कानून से तय संख्या में अन्य न्यायाधीश होते हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज 65 वर्ष की आयु तक पद पर रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश की सभी अदालतों पर बाध्यकारी होता है, यह अनुच्छेद 141 में कहा गया है। इसे संविधान का संरक्षक भी कहा जाता है, क्योंकि यह जांच सकता है कि कोई कानून संविधान के अनुरूप है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र
- मूल अधिकार क्षेत्र: केंद्र और राज्यों के बीच या राज्यों के आपसी विवाद सीधे सुप्रीम कोर्ट में आते हैं, यह अनुच्छेद 131 में है
- रिट अधिकार क्षेत्र: अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर नागरिक सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं
- अपीलीय अधिकार क्षेत्र: हाई कोर्ट के फैसलों के खिलाफ तय शर्तों पर अपील सुनी जाती है
- सलाहकारी अधिकार क्षेत्र: अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति किसी कानूनी प्रश्न पर सुप्रीम कोर्ट से राय मांग सकते हैं
हाई कोर्ट
अनुच्छेद 214 के अनुसार हर राज्य के लिए एक हाई कोर्ट होगा, हालांकि दो या अधिक राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक साझा हाई कोर्ट भी हो सकता है। हाई कोर्ट के जज 62 वर्ष की आयु तक पद पर रहते हैं। अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट को रिट जारी करने का अधिकार है, जो सिर्फ मौलिक अधिकारों तक सीमित नहीं, बल्कि दूसरे कानूनी अधिकारों के लिए भी है। हाई कोर्ट अपने क्षेत्र की जिला और अधीनस्थ अदालतों की निगरानी भी करता है, जो अनुच्छेद 227 में है।
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जजों की नियुक्ति
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। व्यवहार में यह नियुक्ति कॉलेजियम व्यवस्था के जरिए होती है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज नामों की सिफारिश करते हैं। जजों को उनके पद से केवल संसद में विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव के आधार पर, साबित दुर्व्यवहार या अक्षमता के लिए हटाया जा सकता है। यह व्यवस्था न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए है।
जिला और अधीनस्थ अदालतें
आम लोगों के ज्यादातर मामले, जैसे संपत्ति विवाद, पारिवारिक मामले और आपराधिक मुकदमे, पहले जिला स्तर की दीवानी और फौजदारी अदालतों में जाते हैं। इनके फैसलों के खिलाफ अपील हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक जा सकती है। लोक अदालत और परिवार न्यायालय जैसी व्यवस्थाएं भी विवाद सुलझाने में मदद करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रिट क्या होती है?
रिट अदालत का एक औपचारिक आदेश है, जैसे बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा।
स्रोत: भारत का सर्वोच्च न्यायालय, भारत का संविधान, विधायी विभाग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।






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