संक्षेप में: खराब सामान, सेवा में कमी, ज्यादा कीमत वसूलने या ऑनलाइन खरीदारी में धोखे जैसे मामलों में उपभोक्ता शिकायत के दो मुख्य रास्ते हैं। पहला, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915), जहां मुकदमे से पहले कंपनी से समाधान की कोशिश होती है। दूसरा, ई-जागृति पोर्टल पर उपभोक्ता आयोग में औपचारिक केस। यहां जानिए दोनों का तरीका।
उपभोक्ता के अधिकार क्या हैं
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत हर उपभोक्ता को सुरक्षा, जानकारी, चुनने, सुनवाई, शिकायत निवारण और उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार है। यह कानून दुकान से खरीदे सामान, ऑनलाइन खरीदारी, बैंकिंग, बीमा, बिजली, टेलीकॉम, परिवहन और स्वास्थ्य जैसी सेवाओं पर लागू होता है। भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापार व्यवहार के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है।
उपभोक्ता शिकायत से पहले क्या करें
- बिल, रसीद, वारंटी कार्ड, ऑर्डर का स्क्रीनशॉट, ईमेल और चैट संभालकर रखें।
- सबसे पहले विक्रेता या कंपनी के कस्टमर केयर में लिखित शिकायत करें और शिकायत नंबर नोट करें।
- तय समय में समाधान न मिले तो आगे की उपभोक्ता शिकायत दर्ज करें।
ऑनलाइन खरीदारी के मामलों में उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 के तहत हर प्लेटफॉर्म को शिकायत अधिकारी नियुक्त करना होता है, जिसे 48 घंटे में शिकायत की पावती देनी होती है और एक महीने में उसका निपटारा करना होता है। इसलिए पहले प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारी को लिखें।
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर उपभोक्ता शिकायत
उपभोक्ता मामले विभाग की राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) मुकदमे से पहले विवाद सुलझाने का मंच है। शिकायत इन तरीकों से दर्ज हो सकती है:
- टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल
- व्हाट्सऐप या SMS: 8800001915
- consumerhelpline.gov.in पोर्टल, NCH ऐप या UMANG ऐप
हेल्पलाइन 17 भाषाओं में सेवा देती है। शिकायत संबंधित कंपनी को भेजी जाती है और उसकी स्थिति पोर्टल पर देखी जा सकती है।
ई-जागृति पर उपभोक्ता आयोग में केस
हेल्पलाइन से समाधान न मिले तो उपभोक्ता आयोग में केस किया जा सकता है। इसके लिए ई-जागृति पोर्टल है, जो 1 जनवरी 2025 से शुरू हुआ और जिसमें पुराने OCMS, ई-दाखिल, NCDRC CMS और CONFONET सिस्टम मिला दिए गए हैं। इस पर ऑनलाइन केस दाखिल करना, फीस भरना, सुनवाई की जानकारी और आदेश देखना संभव है। कानून के अनुसार आयोग का क्षेत्राधिकार इस तरह है:
- जिला आयोग: 50 लाख रुपये तक के मामले
- राज्य आयोग: 50 लाख से 2 करोड़ रुपये तक
- राष्ट्रीय आयोग: 2 करोड़ रुपये से ज्यादा
शिकायत आम तौर पर कारण पैदा होने से दो साल के भीतर करनी होती है। उपभोक्ता खुद केस लड़ सकता है, वकील जरूरी नहीं है।
किन बातों का ध्यान रखें
- उपभोक्ता शिकायत में तारीख, रकम, कंपनी का नाम और मांगी गई राहत साफ लिखें।
- साइबर ठगी के मामले उपभोक्ता शिकायत नहीं हैं। इनके लिए 1930 पर कॉल करें या FIR दर्ज कराएं।
- सरकारी विभाग से जानकारी चाहिए तो RTI आवेदन का रास्ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
उपभोक्ता शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर क्या है?
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन का टोल-फ्री नंबर 1915 है। व्हाट्सऐप पर 8800001915 पर भी शिकायत कर सकते हैं।
क्या उपभोक्ता आयोग में वकील जरूरी है?
नहीं, उपभोक्ता खुद अपना केस दाखिल कर सकता है और पैरवी कर सकता है।
शिकायत करने की समय सीमा क्या है?
आम तौर पर कारण पैदा होने की तारीख से दो साल के भीतर आयोग में शिकायत करनी होती है।
स्रोत: राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन, ई-जागृति पोर्टल, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, उपभोक्ता मामले विभाग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





