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नो बॉल और फ्री हिट के नियम: फ्रंट फुट, बैक फुट, कमर से ऊंची फुल टॉस, किन हालात में आउट हो सकता है बल्लेबाज

क्रिकेट में एक नो बॉल मैच का रुख बदल सकती है। जानिए नो बॉल और फ्री हिट से जुड़े नियम आसान भाषा में।

क्रिकेट पिच पर पॉपिंग क्रीज और गेंदबाज का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • क्रिकेट में कई बार एक नो बॉल पूरे मैच का पासा पलट देती है। बल्लेबाज आउट होकर भी बच जाता है, टीम को एक अतिरिक्त रन मिलता है और सीमित ओवर के मैच में अगली गेंद फ्री हिट होती है, जिस पर…
  • सबसे आम नो बॉल फ्रंट फुट यानी अगले पैर से जुड़ी है। गेंद फेंकते समय गेंदबाज के अगले पैर का कुछ हिस्सा पॉपिंग क्रीज के पीछे होना चाहिए, चाहे जमीन पर हो या हवा में।
  • सीमित ओवर के मैचों में एक ओवर में कंधे से ऊंची बाउंसर गेंदों की संख्या तय है।
  • टेस्ट क्रिकेट में ओवर और समय की सीमा नहीं होती, इसलिए यहां रन रोकने का दबाव सीमित ओवर के मैच जैसा नहीं होता।

क्रिकेट में कई बार एक नो बॉल पूरे मैच का पासा पलट देती है। बल्लेबाज आउट होकर भी बच जाता है, टीम को एक अतिरिक्त रन मिलता है और सीमित ओवर के मैच में अगली गेंद फ्री हिट होती है, जिस पर बल्लेबाज बिना डर के बड़ा शॉट खेल सकता है। लेकिन नो बॉल सिर्फ गेंदबाज के पैर के क्रीज से बाहर जाने पर ही नहीं होती। इसके कई दूसरे कारण भी हैं। इस लेख में जानिए नो बॉल और फ्री हिट से जुड़े नियम आसान भाषा में।

नियम कौन बनाता है

क्रिकेट के नियम लंदन का मैरिलबोन क्रिकेट क्लब यानी MCC बनाता है। नो बॉल से जुड़ी बातें MCC के नियमों के लॉ 21 में हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी ICC इन नियमों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए अपनी खेल शर्तें तय करती है, जिनमें फ्री हिट जैसे प्रावधान जोड़े गए हैं।

मुख्य बातें: क्रिकेट पिच पर पॉपिंग क्रीज और गेंदबाज का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

फ्रंट फुट नो बॉल

सबसे आम नो बॉल फ्रंट फुट यानी अगले पैर से जुड़ी है। गेंद फेंकते समय गेंदबाज के अगले पैर का कुछ हिस्सा पॉपिंग क्रीज के पीछे होना चाहिए, चाहे जमीन पर हो या हवा में। पॉपिंग क्रीज वह रेखा है, जो स्टंप से करीब चार फुट आगे खींची जाती है। अगर पूरा अगला पैर इस रेखा के आगे चला जाए, तो नो बॉल दी जाती है। ध्यान रहे कि रेखा पर पैर होना भी पीछे माना जाता है, रेखा खुद क्रीज का हिस्सा है।

बैक फुट नो बॉल

गेंदबाज का पिछला पैर रिटर्न क्रीज के अंदर होना चाहिए और उसे छूना नहीं चाहिए। रिटर्न क्रीज पॉपिंग क्रीज के दोनों छोरों पर सीधी खींची गई रेखाएं हैं। अगर गेंदबाज का पिछला पैर रिटर्न क्रीज को छू ले या उसके बाहर हो, तो नो बॉल होती है। यह नियम इसलिए है कि गेंदबाज बहुत चौड़े कोण से गेंद न फेंके।

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गेंद की ऊंचाई से नो बॉल

अगर गेंद बिना टप्पा खाए बल्लेबाज की कमर से ऊंची जाए, यानी कमर से ऊपर फुल टॉस हो, और बल्लेबाज क्रीज में सीधा खड़ा हो, तो यह नो बॉल है। ऐसी गेंद को बीमर भी कहा जाता है और यह खतरनाक मानी जाती है। अंपायर बार बार ऐसी गेंद फेंकने पर गेंदबाज को चेतावनी दे सकते हैं और गेंदबाजी से हटा भी सकते हैं। टप्पा खाने के बाद अगर गेंद बल्लेबाज के सिर के ऊपर से जाए, तो खेल शर्तों के हिसाब से उसे वाइड या नो बॉल माना जा सकता है।

बाउंसर की सीमा

सीमित ओवर के मैचों में एक ओवर में कंधे से ऊंची बाउंसर गेंदों की संख्या तय है। वनडे में आम तौर पर दो और टी20 में एक बाउंसर की अनुमति होती है। सीमा से ज्यादा बाउंसर फेंकने पर नो बॉल दी जाती है।

नो बॉल के दूसरे कारण

  • गेंदबाज अंपायर को बताए बिना गेंदबाजी का हाथ या विकेट के किस तरफ से गेंद फेंकेगा, यह बदल दे।
  • गेंद फेंकते समय कोहनी को नियम से ज्यादा सीधा करना, जिसे थ्रो करना कहा जाता है।
  • विकेटकीपर गेंद के बल्लेबाज तक पहुंचने से पहले स्टंप के आगे आ जाए।
  • गेंद फेंकते समय लेग साइड में स्क्वायर लेग के पीछे दो से ज्यादा फील्डर हों।
  • सीमित ओवरों में फील्डिंग की पाबंदियों का उल्लंघन हो।
  • गेंद पिच से बाहर टप्पा खाए या दो से ज्यादा बार टप्पा खाए या लुढ़कती हुई जाए।

नो बॉल की सजा

नो बॉल पर बल्लेबाजी टीम को एक अतिरिक्त रन मिलता है और यह गेंद ओवर की छह गेंदों में नहीं गिनी जाती। इस गेंद पर बल्लेबाज जो भी रन बनाता है, वे उसके खाते में जुड़ते हैं। नो बॉल पर बल्लेबाज बोल्ड, कैच, LBW या स्टंप आउट नहीं हो सकता। लेकिन रन आउट, गेंद को दो बार मारना और फील्डिंग में बाधा जैसे तरीकों से आउट हो सकता है।

फ्री हिट क्या है

फ्री हिट का नियम सीमित ओवर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2007 में शुरू हुआ। शुरुआत में यह सिर्फ फ्रंट फुट नो बॉल के बाद मिलता था। 2015 से वनडे और टी20 में हर तरह की नो बॉल के बाद अगली गेंद फ्री हिट होती है। फ्री हिट पर बल्लेबाज उन्हीं तरीकों से आउट हो सकता है जिनसे नो बॉल पर आउट हो सकता है, यानी मुख्य रूप से रन आउट। अगर फ्री हिट वाली गेंद वाइड हो जाए, तो अगली गेंद भी फ्री हिट रहती है। फ्री हिट पर फील्डर अपनी जगह तभी बदल सकते हैं जब स्ट्राइक पर बल्लेबाज बदल जाए।

टेस्ट में फ्री हिट क्यों नहीं

टेस्ट क्रिकेट में ओवर और समय की सीमा नहीं होती, इसलिए यहां रन रोकने का दबाव सीमित ओवर के मैच जैसा नहीं होता। इसी वजह से टेस्ट में नो बॉल के बाद फ्री हिट नहीं दिया जाता। हालांकि नो बॉल पर एक रन और अतिरिक्त गेंद का नियम यहां भी लागू है।

तीसरे अंपायर की भूमिका

अब अंतरराष्ट्रीय मैचों में फ्रंट फुट नो बॉल पर नजर रखने की जिम्मेदारी अक्सर तीसरे अंपायर को दी जाती है, जो हर गेंद का रीप्ले देखकर मैदान के अंपायर को बताते हैं। इससे गलत फैसलों में कमी आई है।

नो बॉल पर कितने रन मिलते हैं

एक अतिरिक्त रन, साथ में बल्लेबाज के बनाए रन।

फ्री हिट पर बल्लेबाज कैसे आउट हो सकता है

मुख्य रूप से रन आउट, गेंद दो बार मारने या फील्डिंग में बाधा से।

क्या टेस्ट में फ्री हिट मिलता है

नहीं।

नो बॉल का नियम कौन सा लॉ है

MCC का लॉ 21।

स्रोत: MCC Laws of Cricket: Law 21 No Ball, ICC Playing Conditions, BCCI

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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