टेस्ट क्रिकेट को ज्यादा प्रतिस्पर्धी और अर्थपूर्ण बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी ICC ने 2019 में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप शुरू की थी। इसके बाद से हर द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज का एक बड़ा मकसद हो गया है, अंकतालिका में ऊपर पहुंचना और फाइनल में जगह बनाना। भारतीय टीम इस महीने न्यूजीलैंड में दो टेस्ट खेलने वाली है, वेलिंगटन में 19 से 23 नवंबर और क्राइस्टचर्च में 27 नवंबर से 1 दिसंबर तक। ऐसे में यह समझना उपयोगी है कि WTC के अंक कैसे मिलते हैं और तालिका कैसे बनती है।
WTC का ढांचा
WTC दो साल के चक्र में खेली जाती है। इसमें टेस्ट खेलने वाले शीर्ष नौ देश हिस्सा लेते हैं। हर टीम इस दौरान छह सीरीज खेलती है, तीन घर पर और तीन विदेश में। सभी टीमें एक-दूसरे से नहीं खेलतीं और हर सीरीज में मैचों की संख्या भी अलग होती है, कोई सीरीज दो टेस्ट की होती है तो कोई पांच टेस्ट की। चक्र के अंत में तालिका की शीर्ष दो टीमें फाइनल में आमने-सामने होती हैं।
अब तक के फाइनल का नतीजा देखें तो 2021 में न्यूजीलैंड, 2023 में ऑस्ट्रेलिया और 2025 में दक्षिण अफ्रीका चैंपियन बने। भारत 2021 और 2023 दोनों फाइनल में पहुंचा, लेकिन खिताब नहीं जीत सका।

हर मैच के अंक
मौजूदा व्यवस्था में हर टेस्ट मैच के अंक तय हैं, चाहे सीरीज कितने भी मैचों की हो:
- जीत: 12 अंक
- टाई: 6 अंक
- ड्रॉ: 4 अंक
- हार: 0 अंक
पहले चक्र में अंक प्रति सीरीज बांटे जाते थे, जिससे दो टेस्ट की सीरीज के एक मैच की कीमत पांच टेस्ट की सीरीज के एक मैच से बहुत ज्यादा हो जाती थी। इस असमानता की आलोचना के बाद अंक प्रति मैच तय किए गए।
रैंकिंग प्रतिशत से क्यों
क्योंकि हर टीम अलग-अलग संख्या में मैच खेलती है, इसलिए कुल अंक जोड़कर तुलना करना ठीक नहीं होता। ज्यादा मैच खेलने वाली टीम के अंक अपने आप ज्यादा हो जाते। इस समस्या को दूर करने के लिए अंकों का प्रतिशत यानी PCT इस्तेमाल होता है।
PCT का सूत्र आसान है:
- टीम ने जितने मैच खेले, उनमें अधिकतम कितने अंक मिल सकते थे, यह निकालें, यानी मैच की संख्या गुणा 12
- टीम ने असल में जितने अंक जीते, उन्हें अधिकतम संभव अंकों से भाग दें
- नतीजे को 100 से गुणा करें
एक उदाहरण
मान लीजिए किसी टीम ने 10 टेस्ट खेले, 6 जीते, 2 ड्रॉ रहे और 2 हारे। उसके अंक होंगे 6 गुणा 12 यानी 72, और 2 गुणा 4 यानी 8, कुल 80। अधिकतम संभव अंक 10 गुणा 12 यानी 120 थे। तो PCT होगा 80 भाग 120 गुणा 100, यानी लगभग 66.67 प्रतिशत।
दूसरी टीम ने सिर्फ 6 टेस्ट खेलकर 4 जीते और 2 हारे, तो उसके 48 अंक और अधिकतम 72 में से PCT भी 66.67 प्रतिशत होगा। यानी कम मैच खेलने के बावजूद वह बराबरी पर रहेगी।
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धीमी ओवर गति पर अंक कटते हैं
WTC में धीमी ओवर गति की सजा सिर्फ मैच फीस काटने तक सीमित नहीं है। ICC के नियमों के तहत तय समय में जितने ओवर कम फेंके जाते हैं, हर ओवर के लिए टीम के WTC अंक से एक अंक काटा जाता है। कई बार यह कटौती फाइनल की दौड़ में भारी पड़ चुकी है। इसलिए कप्तान अब ओवर गति को लेकर पहले से ज्यादा सावधान रहते हैं।
ड्रॉ की कीमत कम क्यों
ड्रॉ पर सिर्फ 4 अंक, यानी जीत का एक तिहाई। इसका असर यह होता है कि टीमें जीत के लिए खेलने को प्रेरित होती हैं। ड्रॉ से PCT घटता है, इसलिए घरेलू मैदान पर टीमें अक्सर नतीजा देने वाली पिच चाहती हैं और विदेश में भी आखिरी दिन जीत की कोशिश करती हैं।
न्यूजीलैंड दौरे का महत्व
विदेश में जीत हमेशा कठिन होती है और न्यूजीलैंड की परिस्थितियां भारतीय टीम के लिए चुनौती रही हैं। दो टेस्ट की सीरीज में दांव पर कुल 24 अंक हैं। एक जीत भी अंक प्रतिशत में बड़ा फर्क ला सकती है, जबकि दो हार तालिका में नीचे धकेल सकती हैं। ताजा अंकतालिका ICC की वेबसाइट पर हर मैच के बाद अपडेट होती है।
बराबरी हो तो
अगर फाइनल की दौड़ में दो टीमों का PCT बराबर हो, तो ICC के नियमों में तय टाई-ब्रेकर लागू होते हैं, जिनमें जीती गई सीरीज की संख्या जैसे पैमाने शामिल हैं। फाइनल ड्रॉ या टाई होने पर दोनों टीमों को संयुक्त विजेता घोषित करने का प्रावधान रहा है, और फाइनल के लिए एक रिजर्व दिन भी रखा जाता है।
WTC फाइनल में कितनी टीमें खेलती हैं
चक्र के अंत में अंकतालिका की शीर्ष दो टीमें एक फाइनल मैच खेलती हैं।
क्या घरेलू और विदेशी जीत के अंक अलग हैं
नहीं, मौजूदा व्यवस्था में जीत के अंक दोनों जगह बराबर, यानी 12 हैं।
स्रोत: ICC: विश्व टेस्ट चैंपियनशिप, BCCI





