धनतेरस और दिवाली पर गाड़ियों की बिक्री सबसे ज्यादा होती है। ज्यादातर लोग कार या दोपहिया वाहन लोन पर खरीदते हैं। शोरूम पर ही तुरंत लोन मंजूरी का ऑफर मिल जाता है, लेकिन जल्दबाजी में लोन की शर्तें पढ़े बिना हस्ताक्षर करना बाद में महंगा पड़ सकता है। जानिए कार लोन लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखें।
अपना बजट तय करें
- गाड़ी की ऑन-रोड कीमत देखें, जिसमें रजिस्ट्रेशन, बीमा और दूसरे शुल्क शामिल हों
- तय करें कि डाउन पेमेंट कितना कर सकते हैं
- EMI ऐसी हो कि बाकी जरूरी खर्च और बचत पर असर न पड़े
- पेट्रोल, सर्विसिंग, बीमा और पार्किंग का मासिक खर्च भी जोड़ें

ब्याज दर की तुलना करें
- अपने बैंक, दूसरे बैंकों और NBFC की दरें मिलाएं
- ब्याज दर स्थिर है या बदलने वाली, यह पूछें
- आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है, तो बेहतर दर के लिए मोलभाव करें
- विज्ञापन में लिखी शुरुआती दर सभी को नहीं मिलती
की फैक्ट स्टेटमेंट मांगें
RBI के निर्देशों के अनुसार बैंक और NBFC को खुदरा कर्ज के लिए की फैक्ट स्टेटमेंट देना होता है, जिसमें कुल ब्याज, सभी शुल्क और सालाना प्रतिशत दर यानी APR एक जगह लिखे होते हैं। इससे अलग-अलग लोन की सही तुलना की जा सकती है। इसे जरूर मांगें और पढ़ें।
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लोन की अवधि
लंबी अवधि का लोन लेने से EMI कम दिखती है, लेकिन कुल चुकाया गया ब्याज काफी बढ़ जाता है। गाड़ी की कीमत समय के साथ घटती है, इसलिए बहुत लंबा लोन लेने पर कई बार बकाया लोन गाड़ी की कीमत से ज्यादा हो जाता है। अपनी क्षमता के हिसाब से जितनी कम अवधि ले सकें, उतना बेहतर है।
दूसरे शुल्क
- प्रोसेसिंग शुल्क
- दस्तावेज शुल्क
- समय से पहले लोन चुकाने पर प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर शुल्क
- EMI देर से भरने पर दंड
इन सबकी जानकारी लिखित में लें।
डीलर फाइनेंस
शोरूम पर मिलने वाला लोन आसान लगता है, लेकिन इसकी दर और शुल्क बैंक से अलग हो सकते हैं। कई बार डीलर लोन के साथ महंगा बीमा या ऐड-ऑन जोड़ देते हैं। आप चाहें तो बीमा अलग से भी ले सकते हैं। लोन किसी भी बैंक से लेने का अधिकार आपका है।
गाड़ी पर हाइपोथिकेशन
लोन पर खरीदी गई गाड़ी के रजिस्ट्रेशन में बैंक का नाम हाइपोथिकेशन के रूप में दर्ज होता है। लोन पूरा चुकाने के बाद बैंक से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC लेकर RTO में यह नाम हटवाना न भूलें।
शिकायत
लोन से जुड़ी शिकायत पहले बैंक में करें। समाधान न मिले, तो RBI के शिकायत पोर्टल cms.rbi.org.in पर शिकायत की जा सकती है।
क्या जीरो डाउन पेमेंट लोन लेना ठीक है?
जीरो डाउन पेमेंट में पूरा पैसा लोन होता है, जिससे EMI और कुल ब्याज दोनों बढ़ते हैं। जितना संभव हो, कुछ डाउन पेमेंट करना बेहतर रहता है।
स्रोत: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): उचित व्यवहार संहिता और की फैक्ट स्टेटमेंट, RBI शिकायत प्रबंधन प्रणाली। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





