सर्दियों के मौसम में गुड़ और मूंगफली से बनी चिक्की लगभग हर घर में पसंद की जाती है। महाराष्ट्र का लोनावला अपनी चिक्की के लिए खास तौर पर मशहूर है, लेकिन इसे घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है। चिक्की बनाने में सिर्फ दो तीन चीजें लगती हैं, लेकिन असली कमाल गुड़ की चाशनी में है। चाशनी कम पकी तो चिक्की चिपचिपी बनेगी और ज्यादा पकी तो कड़वी हो जाएगी। इस लेख में जानिए घर पर कुरकुरी मूंगफली चिक्की बनाने का आसान तरीका।
सामग्री
- मूंगफली के दाने: एक कप।
- गुड़: एक कप, कद्दूकस किया या छोटे टुकड़ों में तोड़ा।
- घी: एक से दो छोटे चम्मच।
- पानी: दो बड़े चम्मच।
- इलायची पाउडर: एक चुटकी, यह वैकल्पिक है।
- चिक्की बेलने के लिए बेलन और चिकनाई लगी प्लेट या बटर पेपर।

मूंगफली भूनें
मूंगफली को भारी तले की कड़ाही में धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें। जब दानों का छिलका फटने लगे और हल्की खुशबू आए, तो गैस बंद कर दें। ठंडा होने पर दानों को हथेलियों के बीच रगड़ कर छिलके हटा दें। अब दानों को दो हिस्सों में तोड़ लें या हल्का कूट लें। पूरे दाने रखने से चिक्की कम जमती है, इसलिए दानों को आधा करना बेहतर है।
गुड़ कैसा हो
चिक्की के लिए अच्छी क्वालिटी का गहरे रंग का गुड़ अच्छा रहता है। कुछ लोग चिक्की वाला खास गुड़ इस्तेमाल करते हैं, जो जल्दी जमता है। बहुत नरम या गीला गुड़ हो तो चाशनी जमने में ज्यादा समय लेती है। गुड़ खरीदते समय भरोसेमंद दुकान चुनें।
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चाशनी कैसे बनाएं
कड़ाही में एक छोटा चम्मच घी गर्म करें। इसमें गुड़ और दो चम्मच पानी डालें। धीमी आंच पर गुड़ को पिघलने दें और लगातार चलाते रहें। गुड़ पिघलने के बाद उसमें झाग उठने लगेगा और रंग गहरा होने लगेगा। इस दौरान आंच धीमी से मध्यम ही रखें, ताकि गुड़ जले नहीं।
चाशनी की जांच
चाशनी तैयार है या नहीं, यह जानने का सबसे आसान तरीका है पानी वाला टेस्ट। एक कटोरी में ठंडा पानी लें और उसमें चाशनी की कुछ बूंदें डालें। अगर बूंद पानी में जम कर सख्त हो जाए और उसे तोड़ने पर कड़क आवाज के साथ टूटे, तो चाशनी तैयार है। अगर बूंद नरम और चिपचिपी रहे, तो थोड़ी देर और पकाएं। ज्यादा पकाने से गुड़ कड़वा हो सकता है, इसलिए हर मिनट जांच करते रहें।
चिक्की जमाएं
चाशनी तैयार होते ही गैस बंद करें और तुरंत भुनी मूंगफली व इलायची डाल कर तेजी से मिलाएं। मिश्रण को घी लगी प्लेट या बटर पेपर पर डालें। बेलन पर हल्का घी लगा कर मिश्रण को गर्म रहते ही पतला बेल लें। चिक्की ठंडी होने लगे तो बेलना मुश्किल हो जाता है, इसलिए यह काम जल्दी करना होता है। हल्की गर्म रहते ही चाकू से चौकोर टुकड़ों के निशान लगा दें।
तोड़ें और रखें
पूरी तरह ठंडी होने पर चिक्की निशान के हिसाब से आसानी से टूट जाएगी। इसे एयरटाइट डिब्बे में रखें। नमी लगने पर चिक्की नरम और चिपचिपी हो सकती है। अच्छी तरह बनी चिक्की कई दिन तक कुरकुरी रहती है।
दूसरी तरह की चिक्की
- तिल की चिक्की: मूंगफली की जगह भुने सफेद तिल डालें।
- मिक्स ड्राई फ्रूट चिक्की: काजू, बादाम और पिस्ता के टुकड़े डालें।
- चना चिक्की: भुने चने की दाल से बनाएं।
- मुरमुरा चिक्की: मुरमुरे को गुड़ की चाशनी में मिला कर लड्डू या चौकोर टुकड़े बनाएं।
आम गलतियां
- तेज आंच पर चाशनी बनाना, जिससे गुड़ जल जाता है।
- चाशनी की जांच किए बिना मूंगफली डालना।
- मिश्रण ठंडा होने के बाद बेलने की कोशिश।
- गीले डिब्बे में चिक्की रखना।
किन बातों का ध्यान रखें
चिक्की में गुड़ होता है, इसलिए यह मीठी और ऊर्जा से भरपूर होती है। मधुमेह के मरीज या वजन पर नजर रखने वाले लोग इसे सीमित मात्रा में ही खाएं। छोटे बच्चों को देते समय सावधानी रखें, क्योंकि सख्त टुकड़े गले में फंस सकते हैं। मूंगफली से एलर्जी वाले लोग तिल या दूसरे विकल्प चुन सकते हैं।
मूंगफली और गुड़ खरीदते समय
मूंगफली के दाने खरीदते समय देखें कि उनमें फफूंद, कालापन या बासी गंध न हो। खराब दानों से चिक्की का स्वाद बिगड़ जाता है। गुड़ का रंग बहुत ज्यादा चमकीला पीला हो तो उसमें रंग मिलाए जाने का शक हो सकता है, इसलिए हल्के भूरे या गहरे रंग का गुड़ लेना बेहतर है। बनाने से पहले मूंगफली को अच्छी तरह भूनना जरूरी है, कच्चे दानों वाली चिक्की जल्दी नरम हो जाती है।
चिक्की चिपचिपी क्यों बनती है
चाशनी कम पकने पर या नमी लगने पर।
चाशनी तैयार है कैसे पहचानें
पानी में डाली बूंद जम कर कड़क आवाज से टूटे।
चिक्की कितने दिन चलती है
एयरटाइट डिब्बे में कई दिन तक।
स्रोत: FSSAI: Eat Right India, FSSAI, Wikipedia: Chikki





