अक्टूबर-नवंबर में उत्तर भारत की मंडियों में धान की आवक तेज रहती है। ऐसे में किसानों के लिए सबसे अहम सवाल होता है कि सरकारी खरीद में उन्हें कितना दाम मिलेगा। केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 13 मई 2026 को खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को मंजूरी दी थी। पत्र सूचना कार्यालय यानी PIB की विज्ञप्ति के मुताबिक सामान्य धान का MSP ₹2,441 प्रति क्विंटल और ग्रेड A धान का ₹2,461 प्रति क्विंटल तय किया गया है। दोनों में पिछले साल के मुकाबले ₹72 की बढ़ोतरी हुई है।
अनाज फसलों का MSP
- धान (सामान्य): ₹2,441, पिछले साल ₹2,369
- धान (ग्रेड A): ₹2,461, पिछले साल ₹2,389
- ज्वार (हाइब्रिड): ₹4,023, पिछले साल ₹3,699
- ज्वार (मालदांडी): ₹4,073, पिछले साल ₹3,749
- बाजरा: ₹2,900, पिछले साल ₹2,775
- रागी: ₹5,205, पिछले साल ₹4,886
- मक्का: ₹2,410, पिछले साल ₹2,400
सभी दरें रुपये प्रति क्विंटल में हैं।

दलहन फसलों का MSP
- अरहर या तुअर: ₹8,450, पिछले साल ₹8,000
- मूंग: ₹8,780, पिछले साल ₹8,768
- उड़द: ₹8,200, पिछले साल ₹7,800
तिलहन फसलों का MSP
- मूंगफली: ₹7,517, पिछले साल ₹7,263
- सूरजमुखी बीज: ₹8,343, पिछले साल ₹7,721
- सोयाबीन (पीला): ₹5,708, पिछले साल ₹5,328
- तिल: ₹10,346, पिछले साल ₹9,846
- रामतिल: ₹10,052, पिछले साल ₹9,537
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कपास का MSP
- कपास (मध्यम रेशा): ₹8,267, पिछले साल ₹7,710
- कपास (लंबा रेशा): ₹8,667, पिछले साल ₹8,110
सबसे ज्यादा बढ़ोतरी किसमें
PIB के अनुसार पिछले साल की तुलना में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सूरजमुखी बीज में ₹622 प्रति क्विंटल की हुई है। इसके बाद कपास में ₹557, रामतिल में ₹515 और तिल में ₹500 की बढ़ोतरी की गई है। मक्का में सबसे कम ₹10 और मूंग में ₹12 की बढ़ोतरी हुई है।
लागत पर कितना मुनाफा
सरकार का कहना है कि MSP को उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना स्तर पर रखने की नीति के अनुरूप तय किया गया है, जिसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2018-19 में हुई थी। विज्ञप्ति के मुताबिक लागत पर सबसे ज्यादा अनुमानित मार्जिन मूंग में 61 प्रतिशत है। इसके बाद बाजरा और मक्का में 56 प्रतिशत और अरहर में 54 प्रतिशत मार्जिन है। बाकी फसलों में यह 50 प्रतिशत आंका गया है। धान की अनुमानित लागत ₹1,627 प्रति क्विंटल बताई गई है।
इस लागत में मजदूरी, बैल या मशीन का खर्च, पट्टे की जमीन का किराया, बीज, खाद, सिंचाई, उपकरणों का घिसाव, कार्यशील पूंजी पर ब्याज, डीजल-बिजली और परिवार के श्रम का अनुमानित मूल्य शामिल है।
MSP पर फसल कैसे बेचें
- अपने राज्य के खाद्य विभाग या खरीद एजेंसी के पोर्टल पर किसान पंजीकरण कराएं, उत्तर प्रदेश में यह fcs.up.gov.in पर होता है
- पंजीकरण में खतौनी, आधार और बैंक खाते का विवरण सही भरें
- अपने नजदीकी सरकारी क्रय केंद्र की जानकारी लें और जरूरत हो तो टोकन या तारीख लें
- फसल को अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके ले जाएं, नमी तय सीमा से ज्यादा होने पर खरीद में दिक्कत आ सकती है
- तौल की पर्ची जरूर लें, भुगतान सीधे बैंक खाते में आता है
उत्तर प्रदेश में धान खरीद
उत्तर प्रदेश में धान की सरकारी खरीद खाद्य एवं रसद विभाग के क्रय केंद्रों के जरिए होती है। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में खरीद शुरू होने की तारीखें अलग-अलग तय होती हैं, जिनकी घोषणा राज्य सरकार हर साल करती है। किसान fcs.up.gov.in पर पंजीकरण की स्थिति, नजदीकी क्रय केंद्र और भुगतान की स्थिति देख सकते हैं। किसी भी समस्या के लिए विभाग का टोल फ्री नंबर पोर्टल पर दिया गया है। अपने जिले के जिला खाद्य विपणन अधिकारी या क्षेत्रीय विपणन अधिकारी से भी संपर्क किया जा सकता है।
धान बेचते समय ध्यान रखें
- सरकारी खरीद में धान की गुणवत्ता के मानक तय होते हैं, जैसे नमी की सीमा, टूटे दाने, बदरंग दाने और कचरे की मात्रा
- धान को साफ और सूखी जगह पर रखें, ताकि बारिश या ओस से नमी न बढ़े
- बिचौलियों के कहने पर पंजीकरण के कागज किसी और को न दें
- तौल में गड़बड़ी लगे तो केंद्र प्रभारी से लिखित शिकायत करें
MSP और मंडी भाव का फर्क
MSP वह न्यूनतम दाम है जिस पर सरकार अपनी एजेंसियों के जरिए खरीद करती है। खुले बाजार में मंडी भाव मांग और आपूर्ति से तय होते हैं और यह MSP से ऊपर या नीचे हो सकते हैं। हर फसल की सरकारी खरीद हर राज्य में एक जैसी नहीं होती। धान और गेहूं की खरीद बड़े पैमाने पर होती है, जबकि दलहन और तिलहन की खरीद मूल्य समर्थन योजना जैसी व्यवस्थाओं के तहत तय मात्रा में होती है।
धान का MSP 2026-27 कितना है
सामान्य धान का MSP ₹2,441 प्रति क्विंटल और ग्रेड A धान का ₹2,461 प्रति क्विंटल है।
MSP कौन तय करता है
कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिश के आधार पर केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति MSP को मंजूरी देती है।
स्रोत: PIB: खरीफ फसलों का MSP 2026-27 (13 मई 2026), कृषि लागत और मूल्य आयोग





