हिंदू पंचांग में कार्तिक मास को बहुत पवित्र महीना माना जाता है। इसी दौर में करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, छठ, देवउठनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा जैसे बड़े पर्व आते हैं। शरद ऋतु की साफ रातों और दीयों की रोशनी के कारण इसे रोशनी का महीना भी कहा जाता है। जानिए कार्तिक मास का महत्व और इससे जुड़ी प्रमुख परंपराएं।
कार्तिक मास कब से कब तक
पंचांग की अलग-अलग पद्धतियों में महीने की गणना अलग होती है। उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत पद्धति में कार्तिक मास शरद पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है, जबकि अमांत पद्धति में इसकी शुरुआत और अंत अलग दिनों पर होते हैं। इसलिए अपने क्षेत्र की सही तारीखों के लिए स्थानीय पंचांग या पुरोहित से जानकारी लें।

कार्तिक मास को पवित्र क्यों माना जाता है
पौराणिक मान्यता है कि यह महीना भगवान विष्णु को विशेष प्रिय है। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की मान्यता है, जिसके बाद शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली और गुरु नानक जयंती भी मनाई जाती है। इन कारणों से इस पूरे महीने को धर्म, दान और साधना का समय माना जाता है।
कार्तिक स्नान
कई श्रद्धालु इस महीने में सूर्योदय से पहले नदी, सरोवर या घर पर ही स्नान करने का संकल्प लेते हैं। जो लोग नदी तक नहीं जा सकते, वे घर पर स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करते हैं। ठंड बढ़ने पर बुजुर्ग और बीमार लोग अपनी सेहत के अनुसार ही नियम अपनाएं।
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दीपदान की परंपरा
कार्तिक मास में शाम को दीपक जलाने की परंपरा सबसे प्रमुख है। लोग घर के मंदिर, तुलसी के पास, मुख्य द्वार, नदी के घाट और मंदिरों में दीपदान करते हैं। कुछ स्थानों पर घर के ऊपर ऊंचे बांस पर आकाशदीप भी टांगा जाता है। दीपदान को अंधकार पर प्रकाश और नकारात्मकता पर सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
तुलसी पूजा
इस महीने में तुलसी के पौधे की विशेष पूजा होती है। सुबह जल चढ़ाना, शाम को दीपक जलाना और परिक्रमा करना आम परंपरा है। देवउठनी एकादशी के आसपास कई घरों में तुलसी विवाह भी किया जाता है। मान्यता है कि रविवार और एकादशी को तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
सादगी, दान और संयम
कार्तिक मास में बहुत से लोग सात्विक भोजन करते हैं, कुछ लोग एक समय भोजन करते हैं और कुछ लोग इस दौरान खास चीजें छोड़ देते हैं। अन्न, वस्त्र, दीपक और गर्म कपड़ों का दान भी इस महीने में पुण्य माना जाता है। सर्दी शुरू होने के समय जरूरतमंदों को कंबल या गर्म कपड़े देना दान का व्यावहारिक रूप है।
घर पर कैसे निभाएं परंपराएं
- रोज शाम को घर के मंदिर और तुलसी के पास एक दीपक जलाएं
- सुबह जल्दी उठकर स्नान और कुछ देर ध्यान या पाठ करें
- महीने भर किसी एक अच्छी आदत का संकल्प लें
- अपनी क्षमता के अनुसार दान करें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कार्तिक मास में सभी नियम मानना जरूरी है?
नहीं, नियम श्रद्धा और परिवार की परंपरा के अनुसार अपनाए जाते हैं। अपनी सेहत और सुविधा का ध्यान रखें।
स्रोत: द्रिक पंचांग: हिंदू कैलेंडर और त्योहार। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।






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