ताज़ा खबर
दिवाली के बाद क्रेडिट कार्ड बिल: पूरा भुगतान, न्यूनतम राशि का जाल और बिल चुकाने की योजना BREAKING: डब्ल्यूटीसी अंक तालिका में न्यूजीलैंड शीर्ष पर पहुंचा ऑस्ट्रेलिया को दक्षिण अफ्रीका से मिली हार PMAY-G: Who Gets a Pucca House Under PM Awas Yojana Gramin, Rs 1.20 Lakh Aid and How to Check the List विश्वनाथन आनंद: भारत के पहले ग्रैंडमास्टर, पांच बार विश्व चैंपियन, पहला खेल रत्न और देश में शतरंज क्रांति लाने वाले खिलाड़ी BREAKING: Prime Minister Approves New Delhi to Varanasi and Guwahati Bullet Train Corridor BREAKING: दिल्ली से वाराणसी और गुवाहाटी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को प्रधानमंत्री की मंजूरी मिली Mustard Farming Guide for Rabi: Sowing Time, Seed Rate, Irrigation and Pest Control Tips प्रदूषण में N95 मास्क: सही मास्क कैसे चुनें, कैसे पहनें और कपड़े का मास्क क्यों काफी नहीं
ट्रेंडिंग
धर्म

कार्तिक मास का महत्व: स्नान, दीपदान, तुलसी पूजा और इस महीने से जुड़ी प्रमुख परंपराएं

कार्तिक मास क्यों खास माना जाता है, इस महीने के प्रमुख त्योहार, कार्तिक स्नान, दीपदान, तुलसी पूजा, आकाशदीप, दान और सादगी से जुड़ी मान्यताएं और घर पर इन्हें निभाने के आसान तरीके।

कार्तिक मास में दीपदान और तुलसी पूजा का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • हिंदू पंचांग में कार्तिक मास को बहुत पवित्र महीना माना जाता है।
  • पौराणिक मान्यता है कि यह महीना भगवान विष्णु को विशेष प्रिय है।
  • कार्तिक मास में शाम को दीपक जलाने की परंपरा सबसे प्रमुख है। लोग घर के मंदिर, तुलसी के पास, मुख्य द्वार, नदी के घाट और मंदिरों में दीपदान करते हैं।
  • कार्तिक मास में बहुत से लोग सात्विक भोजन करते हैं, कुछ लोग एक समय भोजन करते हैं और कुछ लोग इस दौरान खास चीजें छोड़ देते हैं।

हिंदू पंचांग में कार्तिक मास को बहुत पवित्र महीना माना जाता है। इसी दौर में करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, छठ, देवउठनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा जैसे बड़े पर्व आते हैं। शरद ऋतु की साफ रातों और दीयों की रोशनी के कारण इसे रोशनी का महीना भी कहा जाता है। जानिए कार्तिक मास का महत्व और इससे जुड़ी प्रमुख परंपराएं।

कार्तिक मास कब से कब तक

पंचांग की अलग-अलग पद्धतियों में महीने की गणना अलग होती है। उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत पद्धति में कार्तिक मास शरद पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है, जबकि अमांत पद्धति में इसकी शुरुआत और अंत अलग दिनों पर होते हैं। इसलिए अपने क्षेत्र की सही तारीखों के लिए स्थानीय पंचांग या पुरोहित से जानकारी लें।

मुख्य बातें: कार्तिक मास में दीपदान और तुलसी पूजा का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

कार्तिक मास को पवित्र क्यों माना जाता है

पौराणिक मान्यता है कि यह महीना भगवान विष्णु को विशेष प्रिय है। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की मान्यता है, जिसके बाद शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली और गुरु नानक जयंती भी मनाई जाती है। इन कारणों से इस पूरे महीने को धर्म, दान और साधना का समय माना जाता है।

कार्तिक स्नान

कई श्रद्धालु इस महीने में सूर्योदय से पहले नदी, सरोवर या घर पर ही स्नान करने का संकल्प लेते हैं। जो लोग नदी तक नहीं जा सकते, वे घर पर स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करते हैं। ठंड बढ़ने पर बुजुर्ग और बीमार लोग अपनी सेहत के अनुसार ही नियम अपनाएं।

यह भी पढ़ें: कार्तिक पूर्णिमा 2026: 24 नवंबर को स्नान-दान, वाराणसी में देव दीपावली, जानें तिथि, मुहूर्त और मान्यताएं | दीया सजावट के आसान आइडिया: मिट्टी के दीये रंगने, सजाने और सुरक्षित तरीके से जलाने के टिप्स

दीपदान की परंपरा

कार्तिक मास में शाम को दीपक जलाने की परंपरा सबसे प्रमुख है। लोग घर के मंदिर, तुलसी के पास, मुख्य द्वार, नदी के घाट और मंदिरों में दीपदान करते हैं। कुछ स्थानों पर घर के ऊपर ऊंचे बांस पर आकाशदीप भी टांगा जाता है। दीपदान को अंधकार पर प्रकाश और नकारात्मकता पर सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

तुलसी पूजा

इस महीने में तुलसी के पौधे की विशेष पूजा होती है। सुबह जल चढ़ाना, शाम को दीपक जलाना और परिक्रमा करना आम परंपरा है। देवउठनी एकादशी के आसपास कई घरों में तुलसी विवाह भी किया जाता है। मान्यता है कि रविवार और एकादशी को तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

सादगी, दान और संयम

कार्तिक मास में बहुत से लोग सात्विक भोजन करते हैं, कुछ लोग एक समय भोजन करते हैं और कुछ लोग इस दौरान खास चीजें छोड़ देते हैं। अन्न, वस्त्र, दीपक और गर्म कपड़ों का दान भी इस महीने में पुण्य माना जाता है। सर्दी शुरू होने के समय जरूरतमंदों को कंबल या गर्म कपड़े देना दान का व्यावहारिक रूप है।

घर पर कैसे निभाएं परंपराएं

  • रोज शाम को घर के मंदिर और तुलसी के पास एक दीपक जलाएं
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान और कुछ देर ध्यान या पाठ करें
  • महीने भर किसी एक अच्छी आदत का संकल्प लें
  • अपनी क्षमता के अनुसार दान करें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या कार्तिक मास में सभी नियम मानना जरूरी है?

नहीं, नियम श्रद्धा और परिवार की परंपरा के अनुसार अपनाए जाते हैं। अपनी सेहत और सुविधा का ध्यान रखें।

स्रोत: द्रिक पंचांग: हिंदू कैलेंडर और त्योहार। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

टिप्पणियां (6)

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X