धनतेरस और दीपावली पर कई परिवार सोने-चांदी के गहने, इलेक्ट्रॉनिक सामान और घर का दूसरा कीमती सामान खरीदते हैं। लेकिन बहुत कम लोग इनका बीमा कराते हैं। त्योहार के दिनों में दीयों, पटाखों और बिजली की झालरों के कारण आग का जोखिम भी बढ़ता है, और घर बंद करके बाहर जाने पर चोरी का डर भी रहता है। जानिए ज्वेलरी इंश्योरेंस और होम इंश्योरेंस कैसे आपकी मदद कर सकते हैं।
होम इंश्योरेंस क्या है
होम इंश्योरेंस में आम तौर पर दो हिस्से होते हैं। पहला, घर का ढांचा यानी इमारत और दूसरा, घर के अंदर का सामान, जैसे फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण। किराये पर रहने वाले लोग केवल सामान का बीमा भी ले सकते हैं। बीमा नियामक IRDAI ने एक मानक होम इंश्योरेंस पॉलिसी भारत गृह रक्षा की व्यवस्था की है, जो अलग-अलग बीमा कंपनियां देती हैं।

किन जोखिमों का कवर मिलता है
पॉलिसी के अनुसार आम तौर पर इन जोखिमों का कवर मिल सकता है:
- आग और बिजली गिरना
- विस्फोट
- बाढ़, तूफान और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं
- दंगे और तोड़फोड़
- चोरी या सेंधमारी, अगर पॉलिसी में शामिल हो या ऐड-ऑन लिया गया हो
कवर की सटीक सूची पॉलिसी के दस्तावेज में दी होती है, जिसे खरीदने से पहले पढ़ना जरूरी है।
ज्वेलरी का बीमा
सामान्य होम इंश्योरेंस में गहने और कीमती चीजें अपने आप पूरी तरह कवर नहीं होतीं। इसके लिए अलग से ऐड-ऑन या अतिरिक्त कवर लेना पड़ता है और गहनों की कीमत अलग से बतानी होती है। कुछ बीमा कंपनियां बैंक लॉकर में रखे गहनों के लिए भी कवर देती हैं। ध्यान रहे कि बैंक लॉकर में रखे सामान के नुकसान पर बैंक की जिम्मेदारी सीमित होती है, इसलिए अलग बीमा उपयोगी हो सकता है।
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किन चीजों का कवर नहीं मिलता
- सामान्य टूट-फूट और पुराना होने से हुआ नुकसान
- जानबूझकर किया गया नुकसान
- बिना सबूत के गायब हुआ सामान
- पॉलिसी में बताई गई अपवाद वाली स्थितियां
बिल और मूल्यांकन क्यों जरूरी
क्लेम के समय सामान की कीमत साबित करनी होती है। इसलिए गहनों और कीमती सामान के पक्के बिल, हॉलमार्क की जानकारी और फोटो संभालकर रखें। पुराने गहनों का किसी प्रमाणित मूल्यांकनकर्ता से मूल्यांकन करा सकते हैं। बीमा राशि सामान की सही कीमत के आसपास रखें, बहुत कम बीमा राशि पर क्लेम भी कम मिल सकता है।
क्लेम कैसे करें
नुकसान होने पर तुरंत बीमा कंपनी को सूचना दें। चोरी या सेंधमारी के मामले में पुलिस में FIR दर्ज कराएं। नुकसान की फोटो लें और कंपनी के सर्वेयर के आने तक सबूत संभालें। बिल, FIR की प्रति और पॉलिसी के दस्तावेज क्लेम फॉर्म के साथ जमा करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
होम इंश्योरेंस का प्रीमियम कितना होता है?
प्रीमियम घर, सामान की कीमत, जगह और चुने गए कवर पर निर्भर करता है। अलग-अलग कंपनियों से कोटेशन लेकर तुलना करें।
स्रोत: भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





