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टर्म इंश्योरेंस क्या है: कितना कवर लें, प्रीमियम कैसे तय होता है और खरीदने से पहले जरूरी बातें

टर्म इंश्योरेंस का मतलब, दूसरी बीमा पॉलिसी से फर्क, कवर की रकम का अंदाजा, प्रीमियम पर असर डालने वाली बातें, सही जानकारी देना, नॉमिनी और क्लेम।

टर्म इंश्योरेंस से जुड़ी जरूरी बातें बताने वाला ग्राफिक
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सारांश

  • परिवार में कमाने वाले व्यक्ति के साथ अचानक कोई अनहोनी हो जाए, तो घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और कर्ज की किस्तें बड़ी चिंता बन जाती हैं।
  • एंडोमेंट या मनी-बैक जैसी पॉलिसियों में बीमा और बचत दोनों साथ होते हैं, इसलिए प्रीमियम ज्यादा और बीमा कवर अपेक्षाकृत कम होता है।
  • पॉलिसी की अवधि ऐसी चुनें कि वह आपकी कामकाजी उम्र और बड़ी जिम्मेदारियों तक चले।
  • किसी परेशानी पर पहले बीमा कंपनी से शिकायत करें, समाधान न मिले तो IRDAI के बीमा भरोसा पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।

परिवार में कमाने वाले व्यक्ति के साथ अचानक कोई अनहोनी हो जाए, तो घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और कर्ज की किस्तें बड़ी चिंता बन जाती हैं। टर्म इंश्योरेंस इसी जोखिम से बचाने के लिए बना जीवन बीमा का सबसे सीधा रूप है। जानिए टर्म इंश्योरेंस क्या है और इसे खरीदने से पहले किन बातों का ध्यान रखें।

टर्म इंश्योरेंस क्या है

टर्म इंश्योरेंस एक तय अवधि यानी टर्म के लिए लिया जाने वाला जीवन बीमा है। अगर पॉलिसी की अवधि के दौरान बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, तो बीमा कंपनी नॉमिनी को तय रकम यानी सम एश्योर्ड देती है। अवधि पूरी होने पर व्यक्ति जीवित रहे, तो सामान्य टर्म प्लान में कोई रकम वापस नहीं मिलती। इसी वजह से इसका प्रीमियम निवेश वाली बीमा पॉलिसियों की तुलना में काफी कम होता है। कुछ कंपनियां प्रीमियम वापसी वाले प्लान भी देती हैं, लेकिन उनका प्रीमियम ज्यादा होता है।

मुख्य बातें: टर्म इंश्योरेंस से जुड़ी जरूरी बातें बताने वाला ग्राफिक
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दूसरी बीमा पॉलिसियों से फर्क

एंडोमेंट या मनी-बैक जैसी पॉलिसियों में बीमा और बचत दोनों साथ होते हैं, इसलिए प्रीमियम ज्यादा और बीमा कवर अपेक्षाकृत कम होता है। टर्म इंश्योरेंस सिर्फ सुरक्षा देता है। कई वित्तीय सलाहकार बीमा और निवेश को अलग-अलग रखने की बात कहते हैं, ताकि कम प्रीमियम में बड़ा कवर मिल सके और बचत अलग जगह की जा सके।

कितना कवर लें

कवर की कोई एक तय रकम सबके लिए सही नहीं है। अंदाजा लगाने के लिए इन बातों को जोड़ें:

  • परिवार के कई सालों के जरूरी खर्च
  • होम लोन या दूसरे कर्ज की बकाया रकम
  • बच्चों की पढ़ाई और शादी जैसे बड़े भविष्य के खर्च
  • इनमें से पहले से मौजूद बचत और बीमा की रकम घटा दें

पॉलिसी की अवधि ऐसी चुनें कि वह आपकी कामकाजी उम्र और बड़ी जिम्मेदारियों तक चले।

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प्रीमियम कैसे तय होता है

प्रीमियम पर उम्र, सेहत, धूम्रपान या तंबाकू की आदत, कवर की रकम और पॉलिसी की अवधि का असर पड़ता है। कम उम्र में पॉलिसी लेने पर प्रीमियम आम तौर पर कम होता है और पूरी अवधि में वही रहता है। प्रस्ताव फॉर्म में अपनी सेहत, बीमारियों और आदतों की सही जानकारी दें। गलत या अधूरी जानकारी के कारण बाद में क्लेम खारिज हो सकता है।

खरीदने से पहले ये भी देखें

  • बीमा कंपनी IRDAI में पंजीकृत हो और क्लेम निपटाने का रिकॉर्ड जांचें
  • पॉलिसी में क्या शामिल नहीं है, यह शर्तें ध्यान से पढ़ें
  • गंभीर बीमारी या दुर्घटना जैसे राइडर जरूरत हो तभी लें
  • नॉमिनी का नाम जरूर जोड़ें और परिवार को पॉलिसी की जानकारी दें
  • पॉलिसी मिलने के बाद फ्री-लुक अवधि में शर्तें पसंद न आएं तो उसे लौटाया जा सकता है

किसी परेशानी पर पहले बीमा कंपनी से शिकायत करें, समाधान न मिले तो IRDAI के बीमा भरोसा पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या ऑफिस का ग्रुप बीमा काफी है?

ग्रुप बीमा नौकरी बदलने या छूटने पर खत्म हो सकता है और कवर भी सीमित होता है, इसलिए अलग टर्म पॉलिसी पर विचार करें।

स्रोत: भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI), बीमा भरोसा, IRDAI। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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