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EMI Late Payment CIBIL Score: EMI लेट होने पर क्या तुरंत बिगड़ जाता है सिबिल स्कोर? जानिए क्या कहते हैं नियम

EMI Late Payment CIBIL Score
EMI Late Payment CIBIL Score

सारांश

  • EMI Late Payment CIBIL Score: मौजूदा दौर में पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन लेना आम बात हो गई है, लेकिन कई बार वित्तीय असंतुलन या अन्य कारणों से तय तारीख पर ईएमआई का भुगतान करना मुश्किल हो…
  • भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के मौजूदा नियमों के मुताबिक, बैंक और तमाम वित्तीय संस्थान अब महीने में चार बार क्रेडिट ब्यूरो को ग्राहकों की लोन रीपेमेंट से जुड़ी जानकारी अपडेट करते हैं।
  • भले ही एक बार की मामूली देरी से आपका सिबिल स्कोर पूरी तरह बर्बाद नहीं होता है, लेकिन यदि यह लापरवाही बार-बार दोहराई जाती है, तो स्थितियां बदल सकती हैं।
  • समय पर अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करना और लोन की ईएमआई का भुगतान तय समय पर करना हर कर्जदार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

EMI Late Payment CIBIL Score: मौजूदा दौर में पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन लेना आम बात हो गई है, लेकिन कई बार वित्तीय असंतुलन या अन्य कारणों से तय तारीख पर ईएमआई का भुगतान करना मुश्किल हो जाता है। अगर आपकी लोन ईएमआई एक, दो या तीन दिन लेट हो गई है, तो क्या आपका सिबिल स्कोर तुरंत खराब हो जाएगा? क्या बैंक आपको तुरंत डिफॉल्टर मान लेगा? बढ़ती डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के इस दौर में यह सवाल हर उस व्यक्ति के मन में आता है जिसने किसी प्रकार का कर्ज ले रखा है। जानकारों के अनुसार, यदि किसी तकनीकी खराबी या अन्य वजह से आपकी ईएमआई नियत तारीख पर नहीं कट पाती है, तो तुरंत घबराने की आवश्यकता नहीं है। ईएमआई मिस होते ही बैंक आपको सीधे तौर पर डिफॉल्टर घोषित नहीं कर देता है, लेकिन इस मामले में समय बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

EMI Late Payment CIBIL Score: बैंक और क्रेडिट ब्यूरो के बीच रिपोर्टिंग का नया सिस्टम

भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के मौजूदा नियमों के मुताबिक, बैंक और तमाम वित्तीय संस्थान अब महीने में चार बार क्रेडिट ब्यूरो को ग्राहकों की लोन रीपेमेंट से जुड़ी जानकारी अपडेट करते हैं। ऐसे में यदि आपकी ईएमआई भुगतान की तय तारीख निकल जाती है, तो इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि क्रेडिट ब्यूरो को डेटा भेजने के समय आपका खाता किस स्थिति में था। अगर आपकी तरफ से कुछ ही दिनों में बकाया राशि चुका दी जाती है, तो आपके सिबिल स्कोर पर इसका कोई बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना कम होती है। हालांकि, यदि रिपोर्टिंग साइकिल के दौरान डेटा अपडेट होने तक भुगतान बकाया रहता है, तो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री में यह देरी दर्ज हो सकती है। इसलिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखना और समय पर रीपेमेंट करना हमेशा समझदारी भरा कदम माना जाता है।

लेट फीस और पेनल्टी से जुड़े महत्वपूर्ण नियम

यदि लोन की ईएमआई केवल एक से छह दिन की छोटी सी देरी के बाद जमा कर दी जाती है, तो हर मामले में क्रेडिट स्कोर खराब हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं होता है। अधिकांश बैंक और वित्तीय संस्थान शुरुआती कुछ दिनों की देरी को मानवीय भूल या तकनीकी समस्या के रूप में देखते हैं। इसके बावजूद, बैंक अपनी आंतरिक नीतियों के अनुसार आपसे लेट फीस या अतिरिक्त पेनल ब्याज वसूल सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान के मामलों में केंद्रीय बैंक के नियमों के तहत डिफॉल्ट रिपोर्ट करने से पहले ग्राहकों को कुछ दिनों का ग्रेस पीरियड मिलता है। इस दौरान यदि ग्राहक अपना बकाया चुका देते हैं, तो उनका क्रेडिट स्कोर सुरक्षित रहता है और उन्हें किसी बड़ी पेनाल्टी से भी राहत मिल जाती है।

बार-बार ईएमआई चूकने पर भविष्य में आने वाली मुश्किलें

भले ही एक बार की मामूली देरी से आपका सिबिल स्कोर पूरी तरह बर्बाद नहीं होता है, लेकिन यदि यह लापरवाही बार-बार दोहराई जाती है, तो स्थितियां बदल सकती हैं। लगातार ईएमआई लेट होने पर या लंबे समय तक बकाया राशि न चुकाने पर वित्तीय संस्थान आपको उच्च जोखिम वाले श्रेणी के ग्राहक के रूप में देखने लगते हैं। इसका सीधा असर भविष्य में मिलने वाले नए लोन, होम लोन या क्रेडिट कार्ड की स्वीकृति पर पड़ता है। बैंक ऐसे ग्राहकों के लोन आवेदन या तो अस्वीकार कर देते हैं या फिर उनसे बहुत अधिक ब्याज दर वसूलते हैं। इसके अलावा, क्रेडिट लिमिट में कटौती जैसी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है, जिससे आपकी वित्तीय साख कमजोर होती है।

EMI Late Payment CIBIL Score: ऐसी स्थिति से बचने और समाधान के लिए जरूरी कदम

यदि किसी आकस्मिक कारण से आपकी ईएमआई छूट जाती है, तो सबसे पहली प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि आप जल्द से जल्द अपना बकाया अमाउंट बैंक में जमा करवा दें। इसके बाद अपने बैंक खाते के स्टेटमेंट की जांच करें ताकि यह पता चल सके कि बैंक ने कोई अतिरिक्त लेट चार्ज या पेनल्टी तो नहीं लगाई है। भविष्य में इस तरह की असुविधा से बचने के लिए अपने बैंक खाते में हमेशा पर्याप्त मिनिमम बैलेंस रखें या फिर ऑटो-डेबिट की सुविधा का इस्तेमाल करें। आप चाहें तो अपने मोबाइल पर पेमेंट की तारीख का रिमाइंडर भी सेट कर सकते हैं। यदि आप किसी गंभीर आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं और ईएमआई चुकाने में असमर्थ हैं, तो इस बात को छिपाने के बजाय तुरंत अपने संबंधित बैंक से संपर्क करके रीस्ट्रक्चरिंग के विकल्पों पर चर्चा करनी चाहिए।

समय पर अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करना और लोन की ईएमआई का भुगतान तय समय पर करना हर कर्जदार की प्राथमिकता होनी चाहिए। छोटी-सी चूक से बचने के लिए डिजिटल बैंकिंग टूल्स का सही उपयोग करें और यदि कोई समस्या आती है तो बैंक के साथ पारदर्शिता बनाए रखें।

आधिकारिक जानकारी के लिए देखें: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)

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लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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