बैंक में खाता खोलना हो, नई बीमा पॉलिसी लेनी हो या म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करना हो, हर जगह KYC यानी अपने ग्राहक को जानिए की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। पहले हर संस्था अलग अलग पहचान और पते के कागज मांगती थी। इसी परेशानी को कम करने के लिए भारत में सेंट्रल KYC यानी CKYC व्यवस्था बनाई गई। इसमें आपकी KYC जानकारी एक केंद्रीय रजिस्ट्री में सुरक्षित रहती है और आपको एक पहचान नंबर मिलता है। इस लेख में जानिए CKYC क्या है, यह कैसे काम करता है और इससे आपको क्या फायदा है।
CKYC क्या है
CKYC का पूरा नाम सेंट्रल KYC रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री है। यह एक केंद्रीय डेटाबेस है, जिसमें ग्राहकों की KYC जानकारी और दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी रखी जाती है। इसे धन शोधन निवारण नियमों में बदलाव के बाद शुरू किया गया। व्यक्तियों के लिए इसका कामकाज 2016 में शुरू हुआ। इस रजिस्ट्री का संचालन CERSAI करता है, जो भारत सरकार के तहत काम करने वाली संस्था है।

14 अंकों का पहचान नंबर
जब आपकी KYC जानकारी पहली बार CKYC रजिस्ट्री में दर्ज होती है, तो आपको 14 अंकों का एक पहचान नंबर दिया जाता है। इसे KYC पहचान नंबर या KIN कहा जाता है। आमतौर पर यह नंबर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या ईमेल पर भेजा जाता है। आगे किसी दूसरी वित्तीय संस्था में खाता खोलते समय यह नंबर देकर संस्था आपकी KYC जानकारी रजिस्ट्री से ले सकती है।
कौन सी संस्थाएं इसका इस्तेमाल करती हैं
- बैंक, जिनमें सरकारी, निजी, सहकारी और ग्रामीण बैंक शामिल हैं
- बीमा कंपनियां
- म्यूचुअल फंड और उनके रजिस्ट्रार
- गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां यानी NBFC
- पेंशन से जुड़ी संस्थाएं और दूसरे वित्तीय मध्यस्थ
इन संस्थाओं को रिपोर्टिंग एंटिटी कहा जाता है। ये ग्राहकों की KYC जानकारी रजिस्ट्री में अपलोड करती हैं और जरूरत पड़ने पर वहां से डाउनलोड करती हैं।
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CKYC के फायदे
- बार बार कागज देने की जरूरत कम होती है।
- नया खाता या पॉलिसी लेने की प्रक्रिया तेज होती है।
- जानकारी एक जगह रहने से रिकॉर्ड में एकरूपता रहती है।
- पता या मोबाइल नंबर बदलने पर एक जगह अपडेट करने से कई संस्थाओं तक बदलाव पहुंच सकता है।
- फर्जी पहचान से खाता खोलने के मामलों को रोकने में मदद मिलती है।
कौन से दस्तावेज लगते हैं
CKYC के लिए वही आधिकारिक रूप से मान्य दस्तावेज लगते हैं जो सामान्य KYC में मांगे जाते हैं। इनमें आधार, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और मनरेगा जॉब कार्ड जैसे दस्तावेज शामिल हैं। इसके साथ PAN और हाल की फोटो भी जरूरी होती है। संस्था ये दस्तावेज जांचकर रजिस्ट्री में अपलोड करती है।
अपना CKYC नंबर कैसे जानें
अगर आपने हाल के वर्षों में कोई बैंक खाता, बीमा पॉलिसी या म्यूचुअल फंड निवेश शुरू किया है, तो संभव है कि आपका CKYC रिकॉर्ड पहले से बना हो। ऐसे में रजिस्ट्री की ओर से आए SMS या ईमेल में KIN नंबर मिल सकता है। अगर संदेश नहीं मिला, तो अपने बैंक, बीमा कंपनी या म्यूचुअल फंड रजिस्ट्रार से अपना CKYC नंबर पूछ सकते हैं। कुछ निवेश प्लेटफॉर्म भी PAN के आधार पर KYC की स्थिति दिखाते हैं।
जानकारी अपडेट कैसे करें
पता, मोबाइल नंबर, ईमेल या नाम में बदलाव होने पर आप किसी भी रिपोर्टिंग एंटिटी, जैसे अपने बैंक की शाखा, में जाकर नया दस्तावेज देकर अपडेट करा सकते हैं। संस्था बदलाव को CKYC रजिस्ट्री में अपलोड करती है। रजिस्ट्री में अपडेट होने के बाद आपके रिकॉर्ड से जुड़ी दूसरी संस्थाओं को भी बदलाव की सूचना जा सकती है। अपडेट होने पर आपको SMS या ईमेल से सूचना भेजी जाती है।
सावधानी जरूरी
CKYC नंबर अपने आप में कोई पासवर्ड नहीं है, लेकिन इसे अनजान लोगों के साथ साझा न करें। KYC अपडेट के नाम पर आने वाले फर्जी कॉल, SMS या लिंक से सावधान रहें। कोई भी बैंक या संस्था फोन पर OTP, PIN या पासवर्ड नहीं मांगती। KYC अपडेट केवल संस्था की शाखा, आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से ही कराएं।
KYC और CKYC में अंतर
KYC एक प्रक्रिया है, जिसमें कोई वित्तीय संस्था अपने ग्राहक की पहचान और पते की जांच करती है। CKYC उस प्रक्रिया से जुटाई गई जानकारी को रखने का केंद्रीय भंडार है। यानी KYC हर संस्था करती है, लेकिन CKYC के कारण एक बार दर्ज की गई जानकारी दूसरी संस्थाएं भी इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके बावजूद कुछ मामलों में संस्था अपने नियमों के तहत अतिरिक्त दस्तावेज या वीडियो KYC मांग सकती है।
पुराने ग्राहकों के लिए
जिन ग्राहकों ने CKYC शुरू होने से पहले खाते खोले थे, उनकी जानकारी भी समय के साथ बैंक और दूसरी संस्थाएं रजिस्ट्री में अपलोड कर रही हैं। अगर आपको कभी री KYC के लिए कहा जाए, तो उसे समय पर पूरा करें, ताकि खाते के लेनदेन पर कोई रोक न लगे।
CKYC का पूरा नाम क्या है
सेंट्रल KYC रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री।
CKYC नंबर कितने अंकों का होता है
14 अंकों का।
CKYC रजिस्ट्री कौन चलाता है
CERSAI।
CKYC जानकारी कैसे अपडेट करें
किसी भी बैंक, बीमा कंपनी या म्यूचुअल फंड जैसी वित्तीय संस्था के जरिए।
स्रोत: CKYC Registry (CERSAI), CERSAI, RBI: Master Direction on KYC





