ताज़ा खबर
BREAKING: Union Cabinet approves 14500 crore viability gap funding scheme for energy storage systems BREAKING: केंद्रीय कैबिनेट ने ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए 14500 करोड़ रुपये की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण योजना को मंजूरी दी राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 26 नवंबर: श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन की जयंती, भारत कैसे बना दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक दिवाली झालर लगाते समय सावधानी: एक्सटेंशन बोर्ड, तार, बालकनी और पेड़ों पर लाइट के लिए बिजली सुरक्षा के नियम BREAKING: केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों का सेवा कार्यकाल दो साल बढ़ाया सबरीमाला 2026: 16 नवंबर को खुलेंगे मंदिर के द्वार, मंडला पूजा 27 दिसंबर, मकरविलक्कु 14 जनवरी, जानिए यात्रा के नियम बही खाता पूजन: दिवाली पर व्यापारियों के चोपड़ा पूजन की परंपरा, तैयारी, शुभ चिह्न और नए खाते की शुरुआत PMGKAY Free Ration: Who Gets It, How Much Grain and How to Check Your Entitlement
ट्रेंडिंग
दुनिया

अरब लीग क्या है: 22 मार्च 1945 को काहिरा में बना संगठन, 22 सदस्य, मिस्र का निलंबन और सीरिया की वापसी

पश्चिम एशिया की हर बड़ी घटना पर अरब लीग की बैठक होती है। जानिए यह संगठन कैसे काम करता है।

पश्चिम एशिया के नक्शे और राजनयिक बैठक का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका की राजनीति में जब भी कोई बड़ा संकट आता है, तो अक्सर खबर आती है कि अरब लीग ने आपात बैठक बुलाई है।
  • अरब लीग का मुख्यालय काहिरा में है। संगठन की सबसे बड़ी संस्था लीग परिषद है, जिसमें हर सदस्य देश का एक वोट होता है।
  • अरब लीग के चार्टर के अनुसार सर्वसम्मति से लिए गए फैसले सभी सदस्यों पर लागू होते हैं, जबकि बहुमत से लिए गए फैसले सिर्फ उन्हीं पर लागू होते हैं जिन्होंने उनके पक्ष में वोट दिया।
  • भारत के अरब देशों से ऐतिहासिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं।

पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका की राजनीति में जब भी कोई बड़ा संकट आता है, तो अक्सर खबर आती है कि अरब लीग ने आपात बैठक बुलाई है। अरब लीग यानी लीग ऑफ अरब स्टेट्स अरबी भाषी देशों का क्षेत्रीय संगठन है। इसका मकसद सदस्य देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाना है। इस लेख में जानिए अरब लीग कब बना, इसके सदस्य कौन हैं, यह कैसे काम करता है और इसकी सीमाएं क्या हैं।

स्थापना

अरब लीग की स्थापना 22 मार्च 1945 को मिस्र की राजधानी काहिरा में हुई थी। यह संयुक्त राष्ट्र के बनने से भी कुछ महीने पहले की बात है। शुरुआत में सात देश इसके संस्थापक सदस्य थे: मिस्र, इराक, ट्रांसजॉर्डन जिसे आज जॉर्डन कहते हैं, लेबनान, सऊदी अरब, सीरिया और यमन। दूसरे विश्व युद्ध के आखिरी दौर में अरब देशों में आजादी और एकता की भावना मजबूत हो रही थी, जिसने इस संगठन को जन्म दिया।

मुख्य बातें: पश्चिम एशिया के नक्शे और राजनयिक बैठक का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सदस्य देश

समय के साथ नए आजाद हुए अरब देश इसमें शामिल होते गए। आज अरब लीग के 22 सदस्य हैं, जो पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका में फैले हैं। इनमें सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान, इराक, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, यमन, फिलिस्तीन, लीबिया, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, मोरक्को, मॉरिटानिया, सूडान, सोमालिया, जिबूती और कोमोरोस शामिल हैं। फिलिस्तीन को भी पूर्ण सदस्य का दर्जा मिला हुआ है।

मुख्यालय और ढांचा

अरब लीग का मुख्यालय काहिरा में है। संगठन की सबसे बड़ी संस्था लीग परिषद है, जिसमें हर सदस्य देश का एक वोट होता है। परिषद की बैठक राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन के स्तर पर और मंत्रियों के स्तर पर होती है। संगठन का रोजमर्रा का काम महासचिव के नेतृत्व में सचिवालय करता है। परंपरा के तौर पर ज्यादातर महासचिव मिस्र से रहे हैं।

यह भी पढ़ें: ब्रिक्स क्या है, इतिहास और भारत की भूमिका, 11 सदस्य, 2006 से सफर और 2026 की अध्यक्षता | ईरान में 23 वर्षीय छात्रा नजमे अमीनी को सोशल मीडिया पोस्ट पर ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा, अपील का रास्ता खुला

मिस्र का निलंबन

1979 में मिस्र ने इजराइल के साथ शांति समझौता किया, जिसे कैंप डेविड समझौते से जोड़ा जाता है। इसके विरोध में अरब लीग ने मिस्र की सदस्यता निलंबित कर दी और मुख्यालय काहिरा से ट्यूनीशिया की राजधानी ट्यूनिस ले जाया गया। करीब दस साल बाद 1989 में मिस्र की सदस्यता बहाल हुई और 1990 के आसपास मुख्यालय फिर काहिरा लौट आया।

सीरिया का निलंबन और वापसी

2011 में सीरिया में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई के बाद अरब लीग ने सीरिया की सदस्यता निलंबित कर दी थी। मई 2023 में करीब 12 साल बाद सीरिया को फिर से संगठन में शामिल किया गया। यह फैसला क्षेत्र की बदलती राजनीति का संकेत माना गया।

फैसले कैसे होते हैं

अरब लीग के चार्टर के अनुसार सर्वसम्मति से लिए गए फैसले सभी सदस्यों पर लागू होते हैं, जबकि बहुमत से लिए गए फैसले सिर्फ उन्हीं पर लागू होते हैं जिन्होंने उनके पक्ष में वोट दिया। इस वजह से कई अहम मुद्दों पर संगठन एकजुट कदम नहीं उठा पाता।

किन मुद्दों पर सक्रिय रहा

फिलिस्तीन का मुद्दा अरब लीग के एजेंडे में शुरू से सबसे ऊपर रहा है। 2002 में अरब लीग ने अरब शांति पहल का समर्थन किया था, जिसमें इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने को 1967 से पहले की सीमाओं पर फिलिस्तीनी राष्ट्र के गठन से जोड़ा गया था। इसके अलावा लीग ने आर्थिक सहयोग, शिक्षा और संस्कृति से जुड़ी कई संस्थाएं भी बनाई हैं।

आलोचना

आलोचकों का कहना है कि सदस्य देशों के आपसी मतभेद, खाड़ी की राजनीति और बाहरी ताकतों के असर की वजह से अरब लीग कई संकटों में प्रभावी भूमिका नहीं निभा सकी। यमन, लीबिया और सूडान के संघर्षों में भी संगठन की भूमिका सीमित रही। खाड़ी के छह देशों का अलग संगठन खाड़ी सहयोग परिषद भी है, जो कई मामलों में ज्यादा सक्रिय दिखता है।

भारत और अरब लीग

भारत के अरब देशों से ऐतिहासिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। भारत और अरब लीग के बीच अरब भारत सहयोग मंच के जरिए बातचीत होती है।

अरब लीग की दूसरी संस्थाएं

अरब लीग के तहत कई विशेष संस्थाएं काम करती हैं। इनमें शिक्षा, संस्कृति और विज्ञान से जुड़ा संगठन, श्रम संगठन और आर्थिक विकास से जुड़े कोष शामिल हैं। सदस्य देशों के बीच 1950 में संयुक्त रक्षा और आर्थिक सहयोग संधि भी हुई थी, लेकिन व्यवहार में साझा सैन्य कदम बहुत कम उठाए गए। ग्रेटर अरब मुक्त व्यापार क्षेत्र के जरिए सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की कोशिश भी की गई है।

शिखर सम्मेलन

अरब लीग का शिखर सम्मेलन हर साल किसी सदस्य देश में होता है। इन बैठकों में पश्चिम एशिया के युद्ध, शरणार्थी संकट, आतंकवाद और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर साझा बयान जारी किए जाते हैं।

अरब लीग की स्थापना कब हुई

22 मार्च 1945 को काहिरा में।

अरब लीग में कितने सदस्य हैं

22 सदस्य।

अरब लीग का मुख्यालय कहां है

काहिरा, मिस्र में।

स्रोत: League of Arab States, Britannica: Arab League, Wikipedia: Arab League

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X