पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका की राजनीति में जब भी कोई बड़ा संकट आता है, तो अक्सर खबर आती है कि अरब लीग ने आपात बैठक बुलाई है। अरब लीग यानी लीग ऑफ अरब स्टेट्स अरबी भाषी देशों का क्षेत्रीय संगठन है। इसका मकसद सदस्य देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाना है। इस लेख में जानिए अरब लीग कब बना, इसके सदस्य कौन हैं, यह कैसे काम करता है और इसकी सीमाएं क्या हैं।
स्थापना
अरब लीग की स्थापना 22 मार्च 1945 को मिस्र की राजधानी काहिरा में हुई थी। यह संयुक्त राष्ट्र के बनने से भी कुछ महीने पहले की बात है। शुरुआत में सात देश इसके संस्थापक सदस्य थे: मिस्र, इराक, ट्रांसजॉर्डन जिसे आज जॉर्डन कहते हैं, लेबनान, सऊदी अरब, सीरिया और यमन। दूसरे विश्व युद्ध के आखिरी दौर में अरब देशों में आजादी और एकता की भावना मजबूत हो रही थी, जिसने इस संगठन को जन्म दिया।

सदस्य देश
समय के साथ नए आजाद हुए अरब देश इसमें शामिल होते गए। आज अरब लीग के 22 सदस्य हैं, जो पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका में फैले हैं। इनमें सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान, इराक, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, यमन, फिलिस्तीन, लीबिया, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, मोरक्को, मॉरिटानिया, सूडान, सोमालिया, जिबूती और कोमोरोस शामिल हैं। फिलिस्तीन को भी पूर्ण सदस्य का दर्जा मिला हुआ है।
मुख्यालय और ढांचा
अरब लीग का मुख्यालय काहिरा में है। संगठन की सबसे बड़ी संस्था लीग परिषद है, जिसमें हर सदस्य देश का एक वोट होता है। परिषद की बैठक राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन के स्तर पर और मंत्रियों के स्तर पर होती है। संगठन का रोजमर्रा का काम महासचिव के नेतृत्व में सचिवालय करता है। परंपरा के तौर पर ज्यादातर महासचिव मिस्र से रहे हैं।
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मिस्र का निलंबन
1979 में मिस्र ने इजराइल के साथ शांति समझौता किया, जिसे कैंप डेविड समझौते से जोड़ा जाता है। इसके विरोध में अरब लीग ने मिस्र की सदस्यता निलंबित कर दी और मुख्यालय काहिरा से ट्यूनीशिया की राजधानी ट्यूनिस ले जाया गया। करीब दस साल बाद 1989 में मिस्र की सदस्यता बहाल हुई और 1990 के आसपास मुख्यालय फिर काहिरा लौट आया।
सीरिया का निलंबन और वापसी
2011 में सीरिया में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई के बाद अरब लीग ने सीरिया की सदस्यता निलंबित कर दी थी। मई 2023 में करीब 12 साल बाद सीरिया को फिर से संगठन में शामिल किया गया। यह फैसला क्षेत्र की बदलती राजनीति का संकेत माना गया।
फैसले कैसे होते हैं
अरब लीग के चार्टर के अनुसार सर्वसम्मति से लिए गए फैसले सभी सदस्यों पर लागू होते हैं, जबकि बहुमत से लिए गए फैसले सिर्फ उन्हीं पर लागू होते हैं जिन्होंने उनके पक्ष में वोट दिया। इस वजह से कई अहम मुद्दों पर संगठन एकजुट कदम नहीं उठा पाता।
किन मुद्दों पर सक्रिय रहा
फिलिस्तीन का मुद्दा अरब लीग के एजेंडे में शुरू से सबसे ऊपर रहा है। 2002 में अरब लीग ने अरब शांति पहल का समर्थन किया था, जिसमें इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने को 1967 से पहले की सीमाओं पर फिलिस्तीनी राष्ट्र के गठन से जोड़ा गया था। इसके अलावा लीग ने आर्थिक सहयोग, शिक्षा और संस्कृति से जुड़ी कई संस्थाएं भी बनाई हैं।
आलोचना
आलोचकों का कहना है कि सदस्य देशों के आपसी मतभेद, खाड़ी की राजनीति और बाहरी ताकतों के असर की वजह से अरब लीग कई संकटों में प्रभावी भूमिका नहीं निभा सकी। यमन, लीबिया और सूडान के संघर्षों में भी संगठन की भूमिका सीमित रही। खाड़ी के छह देशों का अलग संगठन खाड़ी सहयोग परिषद भी है, जो कई मामलों में ज्यादा सक्रिय दिखता है।
भारत और अरब लीग
भारत के अरब देशों से ऐतिहासिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। भारत और अरब लीग के बीच अरब भारत सहयोग मंच के जरिए बातचीत होती है।
अरब लीग की दूसरी संस्थाएं
अरब लीग के तहत कई विशेष संस्थाएं काम करती हैं। इनमें शिक्षा, संस्कृति और विज्ञान से जुड़ा संगठन, श्रम संगठन और आर्थिक विकास से जुड़े कोष शामिल हैं। सदस्य देशों के बीच 1950 में संयुक्त रक्षा और आर्थिक सहयोग संधि भी हुई थी, लेकिन व्यवहार में साझा सैन्य कदम बहुत कम उठाए गए। ग्रेटर अरब मुक्त व्यापार क्षेत्र के जरिए सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की कोशिश भी की गई है।
शिखर सम्मेलन
अरब लीग का शिखर सम्मेलन हर साल किसी सदस्य देश में होता है। इन बैठकों में पश्चिम एशिया के युद्ध, शरणार्थी संकट, आतंकवाद और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर साझा बयान जारी किए जाते हैं।
अरब लीग की स्थापना कब हुई
22 मार्च 1945 को काहिरा में।
अरब लीग में कितने सदस्य हैं
22 सदस्य।
अरब लीग का मुख्यालय कहां है
काहिरा, मिस्र में।
स्रोत: League of Arab States, Britannica: Arab League, Wikipedia: Arab League





