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अमृत 2.0 योजना: शहरों में हर घर नल से जल, सीवर कनेक्शन, 2,99,000 करोड़ रुपये का खर्च और अब तक की प्रगति

शहरों में पानी की सप्लाई और सीवर व्यवस्था सुधारने वाला अमृत 2.0 मिशन क्या है, जानिए पूरी जानकारी।

शहर में पानी की पाइपलाइन और नल का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • शहरों में साफ पानी की सप्लाई और सीवर की व्यवस्था बड़ी चुनौती है।
  • दिशानिर्देशों के अनुसार अमृत 2.0 का कुल अनुमानित खर्च 2,99,000 करोड़ रुपये है।
  • योजना की प्रगति की निगरानी के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है, जिस पर प्रोजेक्ट की मंजूरी, ठेके और काम की स्थिति दर्ज होती है।
  • योजना के तहत हर शहर पानी की कमी, नल कनेक्शन और सीवर की स्थिति का आकलन कर अपनी कार्ययोजना बनाता है।

शहरों में साफ पानी की सप्लाई और सीवर की व्यवस्था बड़ी चुनौती है। कई बस्तियों में आज भी घर तक नल का पानी नहीं पहुंचता और गंदा पानी खुले नालों में बहता है। इन्हीं समस्याओं से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने अटल मिशन फॉर रिजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन यानी अमृत का दूसरा चरण शुरू किया, जिसे अमृत 2.0 कहा जाता है। इस लेख में जानिए इस योजना के बारे में जरूरी बातें।

अमृत 2.0 क्या है

आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार अमृत 2.0 की शुरुआत 1 अक्टूबर 2021 को हुई। इसका मकसद शहरों को पानी के मामले में सुरक्षित बनाना है। योजना के तहत सभी शहरों में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने और चुने हुए शहरों में सीवरेज तथा सेप्टेज प्रबंधन की पूरी व्यवस्था करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्य बातें: शहर में पानी की पाइपलाइन और नल का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

कितना खर्च

दिशानिर्देशों के अनुसार अमृत 2.0 का कुल अनुमानित खर्च 2,99,000 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र, राज्य और शहरी निकायों का हिस्सा शामिल है। केंद्र और राज्य के हिस्से का अनुपात शहर के आकार और राज्य की श्रेणी के अनुसार अलग हो सकता है।

मुख्य लक्ष्य

  • 2.68 करोड़ नए घरेलू नल कनेक्शन
  • 500 अमृत शहरों में सीवरेज और सेप्टेज की पूरी व्यवस्था, जिसके तहत 2.64 करोड़ सीवर या सेप्टेज कनेक्शन
  • पानी के स्रोतों का संरक्षण और जल निकायों का पुनरुद्धार
  • इस्तेमाल हुए पानी को साफ कर दोबारा उपयोग
  • शहरों में हरित क्षेत्र और पार्कों का विकास

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पहले चरण से अंतर

अमृत का पहला चरण 500 चुने हुए शहरों पर केंद्रित था। दिशानिर्देशों के अनुसार दूसरे चरण में पानी की सप्लाई का लक्ष्य सभी शहरों तक रखा गया है, जबकि सीवरेज और सेप्टेज का काम 500 अमृत शहरों पर केंद्रित है। दूसरे चरण में जल संरक्षण, जल निकायों की बहाली और पानी के दोबारा इस्तेमाल पर भी ज्यादा जोर है।

पानी के स्रोतों पर ध्यान

अमृत 2.0 सिर्फ पाइपलाइन बिछाने की योजना नहीं है। इसमें तालाबों, झीलों और कुओं जैसे जल स्रोतों के पुनरुद्धार पर भी जोर है, ताकि शहरों को लंबे समय तक पानी मिलता रहे। इस्तेमाल हुए पानी को साफ कर बागवानी, उद्योग और दूसरे कामों में दोबारा इस्तेमाल करने से पीने के पानी पर दबाव कम होता है।

निगरानी और पारदर्शिता

योजना की प्रगति की निगरानी के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है, जिस पर प्रोजेक्ट की मंजूरी, ठेके और काम की स्थिति दर्ज होती है। केंद्र स्तर पर शीर्ष समिति राज्यों की कार्ययोजनाओं और प्रगति की समीक्षा करती है।

अब तक की प्रगति

लोकसभा में 6 अगस्त 2026 को दिए गए उत्तर के अनुसार 9 जुलाई 2026 तक अमृत 2.0 के तहत 1,97,191.85 करोड़ रुपये के 8,777 प्रोजेक्ट मंजूर हो चुके थे। इनमें से 1,37,130.13 करोड़ रुपये के 7,687 प्रोजेक्ट के ठेके दिए जा चुके थे और 66,472 करोड़ रुपये का काम जमीन पर पूरा हो चुका था।

मिशन की अवधि

अमृत 2.0 की शीर्ष समिति की 26 फरवरी 2026 की बैठक के ब्योरे के अनुसार मिशन को 31 मार्च 2027 तक बढ़ाया गया है। आगे के विस्तार के लिए यह शर्त बताई गई कि उस समय तक केंद्र के हिस्से का कम से कम 50 प्रतिशत खर्च हो चुका हो। ताजा स्थिति के लिए अमृत पोर्टल देखें।

शहरों का चयन और योजना

योजना के तहत हर शहर पानी की कमी, नल कनेक्शन और सीवर की स्थिति का आकलन कर अपनी कार्ययोजना बनाता है। राज्य इन योजनाओं को जोड़कर राज्य स्तर की कार्ययोजना केंद्र को भेजते हैं। मंजूरी के बाद प्रोजेक्ट के लिए किस्तों में राशि जारी होती है।

आम लोगों को क्या फायदा

  • घर में नल से पीने का पानी
  • सीवर कनेक्शन से गंदे पानी की बेहतर निकासी
  • जलभराव और गंदगी से जुड़ी बीमारियों में कमी की उम्मीद
  • साफ जल निकाय और हरियाली वाले सार्वजनिक स्थान

नल कनेक्शन कैसे लें

अमृत 2.0 के तहत नल या सीवर कनेक्शन के लिए आम तौर पर अपने नगर निगम, नगर पालिका या जल बोर्ड से संपर्क करना होता है। हर शहर में आवेदन की प्रक्रिया, शुल्क और जरूरी कागज अलग हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय निकाय से जानकारी लें।

राज्यों की भूमिका

अमृत 2.0 में राज्यों और शहरी निकायों की भूमिका बहुत अहम है। प्रोजेक्ट बनाना, ठेके देना, काम की निगरानी करना और समय पर अपना हिस्सा जारी करना उन्हीं की जिम्मेदारी है। जिन राज्यों में काम तेजी से होता है, वहां लोगों तक फायदा भी जल्दी पहुंचता है। इसलिए मिशन की कामयाबी केंद्र, राज्य और शहर, तीनों के तालमेल पर निर्भर है।

अमृत 2.0 कब शुरू हुई

1 अक्टूबर 2021 को।

अमृत 2.0 का कुल खर्च कितना है

2,99,000 करोड़ रुपये।

कितने नए नल कनेक्शन का लक्ष्य है

2.68 करोड़।

अमृत 2.0 कौन सा मंत्रालय चलाता है

आवास और शहरी कार्य मंत्रालय।

स्रोत: MoHUA: AMRUT 2.0 Operational Guidelines (PDF), Lok Sabha: Unstarred Question 3022, 6 Aug 2026 (PDF), AMRUT 2.0 portal

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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