ताज़ा खबर
जन्म प्रमाण पत्र ऑनलाइन कैसे बनवाएं: 21 दिन का नियम, CRS पोर्टल, देर से पंजीकरण और सुधार का तरीका गलत खाते में पैसा चला गया? UPI या नेट बैंकिंग से गलत ट्रांसफर के बाद तुरंत क्या करें, बैंक, NPCI और RBI लोकपाल में शिकायत का तरीका BREAKING: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग, इंडिया गठबंधन ने लगाया जन महाभियोग आलू की खेती: अक्टूबर नवंबर में बुवाई का सही समय, कुफरी किस्में, बीज की मात्रा, मेड़ चढ़ाना और पछेती झुलसा से बचाव BREAKING: कगिसो रबाडा बने सबसे कम गेंदों में 350 टेस्ट विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज राज्य निर्वाचन आयोग क्या है: पंचायत और नगर निकाय चुनाव कौन कराता है, अनुच्छेद 243K और 243ZA, चुनाव आयोग से कितना अलग BREAKING: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मध्य प्रदेश राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया दिवाली के बाद सफाई कैसे करें: पटाखों का कचरा, दीये, मोम और फूल-पत्तियों को सही तरीके से निपटाने के तरीके
ट्रेंडिंग
आपका पैसा

आलू की खेती: अक्टूबर नवंबर में बुवाई का सही समय, कुफरी किस्में, बीज की मात्रा, मेड़ चढ़ाना और पछेती झुलसा से बचाव

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में आलू की मुख्य बुवाई का समय चल रहा है। सही किस्म और बीज से पैदावार काफी बढ़ सकती है।

खेत में मेड़ों पर उगती आलू की फसल का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • आलू भारत की सबसे ज्यादा उगाई और खाई जाने वाली सब्जी फसलों में से एक है।
  • केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने कई कुफरी किस्में विकसित की हैं।
  • बुवाई के 25 से 30 दिन बाद, जब पौधे 15 से 20 सेंटीमीटर के हो जाएं, तो निराई कर पौधों पर मिट्टी चढ़ाएं।
  • आलू के दाम हर साल काफी ऊपर नीचे होते हैं। बुवाई और बिक्री का फैसला करते समय किसान Agmarknet और e-NAM पोर्टल पर अपनी मंडी के ताजा भाव देख सकते हैं।

आलू भारत की सबसे ज्यादा उगाई और खाई जाने वाली सब्जी फसलों में से एक है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात, पंजाब और मध्य प्रदेश इसके बड़े उत्पादक राज्य हैं। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में अक्टूबर और नवंबर आलू की बुवाई का मुख्य समय होता है। सही समय पर बुवाई, स्वस्थ बीज और रोगों से बचाव पर ध्यान दिया जाए तो किसान अच्छी पैदावार और बेहतर दाम पा सकते हैं। इस लेख में ICAR के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान की सलाह के आधार पर आलू की खेती की पूरी जानकारी दी गई है।

बुवाई का सही समय

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में अगेती फसल की बुवाई सितंबर के आखिर से अक्टूबर की शुरुआत तक होती है। मुख्य फसल की बुवाई मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर तक की जाती है। बुवाई के समय दिन का तापमान लगभग 30 डिग्री से कम और रात का तापमान ठंडा होना चाहिए। बहुत गर्मी में बोने से बीज सड़ने का खतरा रहता है, जबकि देर से बोने पर फसल पाले और पछेती झुलसा की चपेट में ज्यादा आती है।

मुख्य बातें: खेत में मेड़ों पर उगती आलू की फसल का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

मिट्टी और खेत की तैयारी

आलू के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए ताकि कंद आसानी से बढ़ सकें। खेत की दो तीन बार जुताई कर पाटा लगाएं। आखिरी जुताई से पहले अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। खाद की मात्रा मिट्टी जांच के आधार पर तय करना सबसे अच्छा रहता है।

उन्नत किस्में

केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने कई कुफरी किस्में विकसित की हैं।

  • कुफरी ज्योति: मैदानी और पहाड़ी दोनों इलाकों के लिए
  • कुफरी बहार: उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में लोकप्रिय
  • कुफरी पुखराज: जल्दी तैयार होने वाली, अच्छी पैदावार
  • कुफरी बादशाह: बड़े कंद वाली किस्म
  • कुफरी चिप्सोना: चिप्स और प्रोसेसिंग उद्योग के लिए

अपने इलाके के लिए किस्म चुनने से पहले कृषि विज्ञान केंद्र या जिला कृषि अधिकारी से सलाह जरूर लें।

यह भी पढ़ें: बचत खाता और चालू खाता में फर्क: ब्याज, लेनदेन की सीमा, ओवरड्राफ्ट और किसके लिए कौन सा सही | फेस्टिव सेल में शॉपिंग कैसे करें: असली छूट पहचानें, बैंक ऑफर, रिटर्न नीति और नकली डील से बचाव

बीज और बुवाई

बीज के लिए 30 से 50 ग्राम वजन वाले स्वस्थ, रोगमुक्त और अंकुरित कंद चुनें। आम तौर पर 25 से 30 क्विंटल बीज प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है, जो कंद के आकार पर निर्भर करता है। कोल्ड स्टोरेज से निकाले बीज को बुवाई से पहले 8 से 10 दिन छायादार और हवादार जगह पर फैलाकर रखें, ताकि अंकुर निकल आएं। कतार से कतार की दूरी लगभग 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी लगभग 20 सेंटीमीटर रखें। बीज उपचार के लिए कृषि विभाग की सलाह के अनुसार फफूंदनाशक का इस्तेमाल करें।

मेड़ चढ़ाना और सिंचाई

बुवाई के 25 से 30 दिन बाद, जब पौधे 15 से 20 सेंटीमीटर के हो जाएं, तो निराई कर पौधों पर मिट्टी चढ़ाएं। इससे कंद धूप में हरे नहीं होते और बढ़ने के लिए जगह मिलती है। पहली हल्की सिंचाई बुवाई के 8 से 10 दिन बाद की जाती है। इसके बाद मिट्टी की नमी के अनुसार 10 से 12 दिन के अंतर पर सिंचाई करें। ध्यान रहे कि मेड़ें पानी में पूरी न डूबें। खुदाई से लगभग 10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें।

पछेती झुलसा से बचाव

पछेती झुलसा आलू का सबसे खतरनाक रोग है, जो फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टान्स नाम के रोगजनक से फैलता है। ठंडे, नम और बादल वाले मौसम में यह तेजी से फैलता है। पत्तियों पर पानी से भीगे जैसे भूरे काले धब्बे बनते हैं और कुछ ही दिनों में पूरा खेत झुलस सकता है। ऐसे मौसम में कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर सुरक्षात्मक फफूंदनाशक का छिड़काव करें। रोगरोधी किस्में और स्वस्थ बीज इस रोग से बचाव का सबसे अच्छा तरीका हैं।

खुदाई और भंडारण

आलू की फसल किस्म के अनुसार 70 से 120 दिन में तैयार हो जाती है। पत्तियां पीली होकर सूखने लगें तो खुदाई से 10 से 15 दिन पहले डंठल काट दें, ताकि छिलका सख्त हो जाए। खुदाई के बाद कंदों को छाया में सुखाकर छंटाई करें। लंबे समय तक रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज में भंडारण किया जाता है।

मंडी भाव पर नजर

आलू के दाम हर साल काफी ऊपर नीचे होते हैं। बुवाई और बिक्री का फैसला करते समय किसान Agmarknet और e-NAM पोर्टल पर अपनी मंडी के ताजा भाव देख सकते हैं। कई किसान खुदाई के तुरंत बाद बेचने के बजाय कोल्ड स्टोरेज में रखकर बेहतर दाम का इंतजार करते हैं, लेकिन इसमें भंडारण का खर्च भी जोड़ना चाहिए।

आलू की बुवाई कब करें

मैदानी इलाकों में मुख्य फसल मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर तक।

एक हेक्टेयर में कितना बीज लगता है

लगभग 25 से 30 क्विंटल।

आलू की प्रमुख किस्में कौन सी हैं

कुफरी ज्योति, कुफरी बहार, कुफरी पुखराज, कुफरी बादशाह और कुफरी चिप्सोना।

पछेती झुलसा कब फैलता है

ठंडे, नम और बादल वाले मौसम में।

स्रोत: ICAR-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला, ICAR, Agmarknet मंडी भाव

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X